Shivpal says on alliance of SP-BSP Mayawati cheat her brother and Akhilesh Yadav cheat his father


मैनपुरी: सपा-बसपा के गठबंधन प्रगतिशील समाजवादी पार्टी प्रमुख शिवपाल यादव जोरदार हमला किया है. मैनपुरी में एक कार्यक्रम में पहुंचे शिवपाल यादव ने सपा-बसपा के गठबंधन पर तंज कसते हुए कहा कि एक ने भाई को धोखा दिया और दूसरे ने पिता को धोखा दिया है.

शिवपाल ने कहा कि मुलायम सिंह यादव (नेताजी) ने साल 1990 में बड़ा काम किया. उन्होंने कहा कि अगर नेती जी ने अयोध्या में बाबरी मस्जिद को न बचाया होता, तो आज हिंदुस्तान में ही दूसरा पाकिस्तान बन गया होता. इसके बाद भी मायावती ने बीजेपी से हाथ मिलाकर चुनाव प्रचार किया और फिर नरेंद्र मोदी और लालजी टंडन को भाई बनाया और बाद में उन्हें धोखा दे दिया.

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बसपा सुप्रीमो पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि बसपा के वो नेता धोखेबाज हैं. उन्होंने अखिलेश की तरफ इशारा करते हुए कहा कि सपा के जो नेता हैं, उन्होंने भी धोखा दिया है. उन्होंने दो टूक कहा कि एक ने भाई को धोखा दिया और दूसरे ने पिता को धोखा दिया है.

शिवपाल यादव यहीं नहीं रुके उन्होंने सपा से राज्य सभा सांसद प्रोफेसर रामगोपाल यादव पर भी निशाना साधा. प्रगतिशील समाजवादी पार्टी प्रमुख ने कहा कि ये कहा गया कि अखिलेश और मायावती के खिलाफ कोई बोलेगा तो पिटेगा. पूर्वांचल में हमने कई दौरे किए, हमें तो किसी ने नहीं पीटा. उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि प्रोफेसर साहब को पूछना चाहते है कि प्रोफेसर कौन होता है. 

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आपको बता दें इससे पहले बलिया में शिवपाल ने कहा कि एसपी-बीएसपी गठबंधन ‘बेमेल’ बताया था. अखिलेश और मायावती भरोसेमंद नहीं बल्कि ‘धोखेबाज’ हैं. उन्होंने कहा था कि दोनों ने सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव को धोखा दिया है. 

शिवपाल ने कहा कि बीएसपी ने 1993 में एसपी के साथ मिलकर सरकार बनाने के 17 माह बाद ही मुलायम को धोखा दे दिया था. उन्होंने कहा कि वह नहीं चाहते थे कि एसपी में विघटन हो लेकिन चुगलखोरों व चापलूसों ने विघटन करा दिया. बड़े भाई रामगोपाल यादव पर एसपी को बर्बाद करने का आरोप लगाते हुए शिवपाल ने कहा कि रामगोपाल यादव के कारण ही एसपी की लोकसभा व विधानसभा चुनाव में बुरी स्थिति हुई है.





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BJP got worried by SP-BSP coalition: Akhilesh Yadav


विपक्ष की रैली को यहां संबोधित करते हुए अखिलेश यादव ने प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार को लेकर विपक्षी दलों से सवाल करने पर भी भाजपा से जवाब मांगा.

ममता के मंच पर बोले अखिलेश, 'सपा-बसपा गठबंधन से देश में खुशी की लहर, लेकिन...'

फोटो सौजन्य:@AITCofficial





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BJP MLA Surendra Singh target on SP-BSP alliance in balia | BJP के विधायक सुरेंद्र सिंह बोले


बलिया: अपने विवादित बयानों को लेकर चर्चा में रहने वाले यूपी के बलिया के बीजेपी विधायक सुरेंद्र सिंह ने सपा-बसपा के गठबंधन पर तंज कसा है. उन्होंने चुटकी लेते हुए कहा कि गठबंधन के बाद बसपा सुप्रीमो मायावती ने 2019 में होने वाले लोकसभा चुनाव के बाद प्रधानमंत्री का ख्वाब देख रही है. उन्होंने कहा कि मायावती प्रधानमंत्री क्या ग्राम प्रधान भी नहीं बन सकती है. 2014 में हुए लोकसभा चुनाव का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि पिछली बार बसपा ने डबल जीरो पाया था, अबकी बार जीरो स्क्वायर मिलेगा. 

बीजेपी विधायक सुरेंद्र सिंह यहीं नहीं रुके उन्होंने बसपा के नेताओं को बिकाऊ बताया और दावा किया कि बसपा के लोग मायावती से टिकट खरीदकर दो-चार भाई चुनाव जीत भी गए तो जीतने के तुरंत बाद वो पीएम मोदी के साथ आ जाएंगे, क्योंकि वो सब बिकाऊ माल है. 

बीजेपी विधायक यही नहीं रुके और उन्होंने कहा कि आपकी बार संसार बनाम परिवार के बीच लड़ाई है. एक ओर ऐसे नेता है जो परिवार को ही संसार मानते हैं. वहीं, एक तरफ ऐसे नेता है जो अपने परिवार को ही संसार मानता है. सुरेंद्र सिंह ने सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव पर निशाना साधते हुए कहा कि अखिलेश यादव पार्टी के कोष के अपने चाचा को अलग कर दिया, पिता को अलग कर दिया. वो खुद पार्टी अध्यक्ष हैं और उनकी पत्नी कोषाध्यक्ष हैं. 

विधायक ने सपा मुखिया अखिलेश यादव और बसपा मुखिया मायावती के गठबंधन पर सवाल खड़ा करते हुए कहा कि जहां भावनाएं नहीं मिलती, वहां गठबंधन कैसे हो सकता है. उन्होंने इस गठबंधन को शुद्ध रूप से राजनीति का व्यापार बताया. उन्होंने कहा कि यूपी में मायावती की दुकान बंद हो गई थी. अपनी दुकान को खोलने के लिए उन्होंने अखिलेश का इस्तेमाल किया. 

सुरेंद्र सिंह ने कहा कि ये गठबंधन दो दलों की नहीं, बल्कि दो परिवारों का है. एक मायावती परिवार और दूसरा मुलायम परिवार. विधायक ने जोर देते हुए कहा कि अबकी बार 2019 की लड़ाई भारत में बोटी और बोतल बनाम रोटी और लंगोटी होने वाली है. विधायक ने मोदी को रोटी और लंगोटी पार्टी बताते हुए नेहरू परिवार, मायावती परिवार, मुलायम परिवार और लालू परिवार को बोटी और बोतल की पार्टी कह डाला. 





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Lok Sabha Elections 2019: Jayant Chaudhary meets Akhilesh Yadav SP-BSP Alliance


लखनऊ:

समाजवादी पार्टी (SP) अध्यक्ष अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) से आरएलडी उपाध्यक्ष जयंत चौधरी (Jayant Chaudhary) की मुलाकात के बाद तय हो गया कि अब आरएलडी भी सपा-बसपा गठबंधन (SP-BSP Alliance) का हिस्सा होगी. फिलहाल समाजवादी पार्टी RLD को तीन सीट देने के लिए तैयार है और आरएलडी (RLD) चौथी सीट के लिए कोशिश कर रही है. लखनऊ में समाजवादी पार्टी के दफ्तर में अखिलेश यादव और जयंत चौधरी के बीच एक घंटे तक सीटों के गणित पर माथापच्ची चलती रही. सूत्रों के मुताबिक गठबंधन मुजफ्फरनगर और बागपत सीट आरएलडी को देने को तैयार था. अब मथुरा सीट के लिए भी राजी हो गया है.

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मुजफ्फरनगर से अजीत सिंह, बागपत से जयंत चौधरी चुनाव लड़ना चाहते हैं. सपा की पेशकश है कि मथुरा से आरएलडी के टिकट पर समाजवादी पार्टी के किसी नेता को लड़ाया जाए. वहीं, आरएलडी को उम्मीद है कि इस फॉर्मूले पर उसे सपा से एक सीट और मिल जाएगी. आरएलडी उपाध्यक्ष जयंत चौधरी ने कहा कि सीटों का मसला नहीं है. सवाल विश्वास का है. सवाल रिश्तों का है और दोनों बहुत मजबूत है.

 

 

बता दें कि पिछले साल हुए कैराना उपचुनाव में आरएलडी और समाजवादी पार्टी बीजेपी के खिलाफ साथ आए थे और उसका नतीजा भी निकला था. अब समाजवादी पार्टी की उम्मीदवार तबस्सुम हसन आरएलडी के निशान पर चुनाव लड़के जीती थीं. अजीत सिंह चाहते हैं कि कुछ उसी तरह चौथी सीट भी पार्टी को मिल जाए. जयंत चौधरी ने कहा कि कैराना में हमने एक दूसरे के साथ तालमेल बनाया. वह सफल तालमेल साबित हुआ है. बहुत लचीलेपन को अपनाया. हमने ये नहीं देखा कि यह हमारा है, वो हमारा है. लड़ाई हमारी है हम मिलकर लड़ेंगे.

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वहीं, समाजवादी पार्टी भी पश्चिमी यूपी में गठबंधन में आरएलडी की अहमियत समझ रही है. समाजवादी पार्टी के एमएलसी उदयवीर सिंह ने कहा कि हमें ऐसा भरोसा है कि जिस गठबंधन और जिस सामाजिक समीकरण के तहत हम पुराना चुनाव लड़े थे, उसके अनुसार हमारी मित्रता रहेगी और हमलोग सब साथ रहेंगे और जिस तरह भाजपा को परास्त किया था उसी तरह से देश विरोधी नीतियों के कारण भारतीय जनता पार्टी को हराएंगे. सपा-बसपा गठबंधन में शामिल होने के लिए आरएलडी की बातचीत के नतीजे सकारात्मक लग रहे हैं और शायद गठबंधन भी यह नहीं चाहेगा कि आरएलडी पश्चिमी यूपी में कांग्रेस के साथ जाए. इसलिए लगता है कि नतीजे सकारात्मक ही होंगे.

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VIDEO: यूपी में सपा-बसपा के बीच हुआ गठबंधन

 





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RLD is demanding four seats from SP-BSP Alliance


नई दिल्ली: यूपी में एसपी-बीएसपी गठबंधन में आरएलडी के शामिल होने के लेकर आज फैसला हो सकता है. दोनों नेताओं के कार्यक्रम में थोड़ी बदलाव किया गया है. पहले राष्ट्रीय लोक दल (रालोद) के उपाध्यक्ष जयंत चौधरी, सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव की ये मुलाकात दिल्ली में होने थी, लेकिन अब ये बैठक लखनऊ में दोपहर एक बजे होगी. इसके बाद दोनों नेताओं की मुलाकात मायावती से होगी. सूत्रों का कहना है की आरएलडी एसपी-बीएसपी गठबंधन में चार लोकसभा सीट की मांग पर अड़ी है. आखिरी दौर की बातचीत में गठबंधन का फॉर्मूला आज (16 जनवरी) को ही तय होगा. 

सपा-बसपा गठबंधन से पहले माना जा रहा था कि अजित सिंह की पार्टी राष्‍ट्रीय लोक दल (रालोद) को भी इसमें शामिल किया जाएगा. सूत्रों के मुताबिक, रालोद गठबंधन में पांच-छह सीटें अपने लिए मांग रही थी, लेकिन इसके बावजूद जब मायावती और अखिलेश ने गठबंधन का ऐलान किया तो कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्‍व के लिए दो सीटें छोड़ने के बाद 38-38 सीटों पर चुनाव लड़ने की घोषणा सपा-बसपा ने की. इस तरह बाकी दलों के लिए केवल दो सीटों की गुंजाइश गठबंधन ने छोड़ी. सूत्रों के मुताबिक, इस गठबंधन ने ये दो अन्‍य सीटें रालोद के लिए छोड़ी थीं लेकिन, रालोद इससे संतुष्‍ट नहीं है.

सपा नेता अखिलेश यादव और रालोद नेता जयंत चौधरी की आज (बुधवार) को होने वाली मुलाकात में भी इसी मुद्दे पर चर्चा संभव है. सूत्रों के मुताबिक, कैराना फॉर्मूले के तहत एक सीट रालोद को और दी जा सकती है. कैराना लोकसभा उपचुनाव के वक्‍त सपा और रालोद के बीच जो तालमेल हुआ था, उसके तहत कैराना में रालोद के चुनाव चिन्‍ह पर सपा के प्रत्‍याशी ने चुनाव लड़ा था. उसको ही कैराना फॉर्मूला कहा जाता है.

गठबंधन में राष्ट्रीय लोकदल (रालोद) को मुंहमांगी सीटें न मिलने के बाद भी पार्टी के नेता नाउम्मीद नहीं हैं. पार्टी के नेताओं का कहना है कि अभी गठबंधन में शामिल नेताओं से बात की जाएगी और हमें हमारा वाजिब हक मिलेगा. रालोद के वरिष्ठ नेता मसूद अहमद कहा चुके हैं कि रालोद अभी भी गठबंधन में है, हमारे उपाध्यक्ष जयंत चौधरी ने कुछ दिनों पहले अखिलेश यादव से छह सीटों की मांग की थी, अभी हम नाउम्मीद नहीं है. हमारे नेता जयंत गठबंधन के नेताओं से बातचीत करेंगे और हमें हमारा हक मिलेगा. उन्होंने कहा कि एक हफ्ते में मामला साफ हो जाएगा और हमें उम्मीद है कि गठबंधन के नेता हमारी मांगों पर विचार करेंगे.

रालोद के राष्ट्रीय प्रवक्ता अनिल दुबे ने कहा कि गठबंधन की सीटें तय हो गई हैं. हमारी अभी वार्ता चल रही है. सीट का कोई मुददा नहीं है, सीटें निकल आएंगी. हमारा मुख्य उद्देश्य बीजेपी को हराना है जिसके लिए सबको साथ आना है. समर्पण भी है, त्याग भी है…मगर सम्मानजनक होना चाहिए.

सूत्रों के मुताबिक, पिछले शनिवार (12 जनवरी) को गठबंधन की औपचारिक घोषणा के बाद दोनों दलों के अध्यक्ष अखिलेश यादव और मायावती अगले एक सप्ताह में यह तय कर लेंगे कि कौन किस सीट पर चुनाव लड़ेगा. साथ ही दोनों दल साझा चुनाव अभियान की भी रूपरेखा जल्द तय कर लेंगे.





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SP-BSP Alliance: Jayant Chaudhary can meet today Akhilesh Yadav and Mayawati in Delhi


नई दिल्‍ली: उत्तर प्रदेश में एसपी-बीएसपी गठबंधन के बाद सियासी हलचल तेज हो गई है. खबर है की राष्ट्रीय लोकदल इस गठबंधन में शामिल हो सकता है. बुधवार (16 जनवरी) को राष्ट्रीय लोकदल (रालोद) के उपाध्यक्ष जयंत चौधरी दिल्ली में पहले अखिलेश यादव से मुलाकात करेंगे. इसके बाद दोनों नेताओं की मुलाकात मायावती से होगी. सूत्रों का कहना है की चार सीटों पर आरएलडी के साथ बात बन सकती है. 

सपा-बसपा गठबंधन से पहले माना जा रहा था कि अजित सिंह की पार्टी राष्‍ट्रीय लोक दल (रालोद) को भी इसमें शामिल किया जाएगा. सूत्रों के मुताबिक, रालोद गठबंधन में पांच-छह सीटें अपने लिए मांग रही थी, लेकिन इसके बावजूद जब मायावती और अखिलेश ने गठबंधन का ऐलान किया तो कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्‍व के लिए दो सीटें छोड़ने के बाद 38-38 सीटों पर चुनाव लड़ने की घोषणा सपा-बसपा ने की. इस तरह बाकी दलों के लिए केवल दो सीटों की गुंजाइश गठबंधन ने छोड़ी. सूत्रों के मुताबिक, इस गठबंधन ने ये दो अन्‍य सीटें रालोद के लिए छोड़ी थीं लेकिन, रालोद इससे संतुष्‍ट नहीं है.

सपा नेता अखिलेश यादव और रालोद नेता जयंत चौधरी की आज (बुधवार) को होने वाली मुलाकात में भी इसी मुद्दे पर चर्चा संभव है. सूत्रों के मुताबिक, कैराना फॉर्मूले के तहत एक सीट रालोद को और दी जा सकती है. कैराना लोकसभा उपचुनाव के वक्‍त सपा और रालोद के बीच जो तालमेल हुआ था, उसके तहत कैराना में रालोद के चुनाव चिन्‍ह पर सपा के प्रत्‍याशी ने चुनाव लड़ा था. उसको ही कैराना फॉर्मूला कहा जाता है.

गठबंधन में राष्ट्रीय लोकदल (रालोद) को मुंहमांगी सीटें न मिलने के बाद भी पार्टी के नेता नाउम्मीद नहीं हैं. पार्टी के नेताओं का कहना है कि अभी गठबंधन में शामिल नेताओं से बात की जाएगी और हमें हमारा वाजिब हक मिलेगा. रालोद के वरिष्ठ नेता मसूद अहमद कहा चुके हैं कि रालोद अभी भी गठबंधन में है, हमारे उपाध्यक्ष जयंत चौधरी ने कुछ दिनों पहले अखिलेश यादव से छह सीटों की मांग की थी, अभी हम नाउम्मीद नहीं है. हमारे नेता जयंत गठबंधन के नेताओं से बातचीत करेंगे और हमें हमारा हक मिलेगा. उन्होंने कहा कि एक हफ्ते में मामला साफ हो जाएगा और हमें उम्मीद है कि गठबंधन के नेता हमारी मांगों पर विचार करेंगे.

रालोद के राष्ट्रीय प्रवक्ता अनिल दुबे ने कहा कि गठबंधन की सीटें तय हो गई हैं. हमारी अभी वार्ता चल रही है. सीट का कोई मुददा नहीं है, सीटें निकल आएंगी. हमारा मुख्य उद्देश्य बीजेपी को हराना है जिसके लिए सबको साथ आना है. समर्पण भी है, त्याग भी है…मगर सम्मानजनक होना चाहिए.

सूत्रों के मुताबिक, पिछले शनिवार (12 जनवरी) को गठबंधन की औपचारिक घोषणा के बाद दोनों दलों के अध्यक्ष अखिलेश यादव और मायावती अगले एक सप्ताह में यह तय कर लेंगे कि कौन किस सीट पर चुनाव लड़ेगा. साथ ही दोनों दल साझा चुनाव अभियान की भी रूपरेखा जल्द तय कर लेंगे.





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Yogi Adityanath on SP-BSP Alliance, Now We will effectively tackle them


खास बातें

  1. सपा-बसपा गठबंधन पर योगी आदित्यनाथ ने दिया बयान
  2. बोले, इस गठबंधन से प्रदेश की राजनीति पर कोई फर्क नहीं
  3. कहा- क्यों नहीं दोनों दलों का एक में विलय कर देते हैं

नई दिल्ली :

सपा-बसपा गठबंधन  (SP-BSP Alliance) पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि ‘अच्छा हुआ दोनों दल एक हो गए. इस गठबंधन से प्रदेश की राजनीति पर कोई फर्क नहीं पड़ने वाला है. अब बीजेपी को इन्हें ”कायदे” से निपटाने में मदद मिलेगी. योगी आदित्यनाथ (Yogi Adityanath) ने एक कार्यक्रम में कहा, ‘सपा-बसपा के गठबंधन का मतलब, भ्रष्टाचारी, जातिवादी मानसिकता वाले अराजक और गुंडों को सीधे-सीधे सत्ता देकर जनता को उसके भाग्य पर छोड़ देने जैसा है. मैं कह सकता हूं कि इस गठबंधन का प्रदेश की राजनीति पर कोई असर नहीं होने वाला है. अच्छा हुआ दोनों एक हो गये हैं. हमें मदद मिलेगी कायदे से इनको निपटाने के लिये.’. दिल्ली में आयोजित भाजपा के राष्ट्रीय अधिवेशन में महागठबंधन का बार-बार जिक्र किये जाने के औचित्य के बारे में योगी  (Yogi Adityanath) ने कहा, ‘गठबंधन कोई चुनौती नहीं है. मैं सपा मुखिया अखिलेश यादव से पूछना चाहता हूं कि प्रधानमंत्री के रूप में पिछली बार वह (सपा संस्थापक) मुलायम सिंह यादव को आगे कर रहे थे. वह स्पष्ट करें कि इस बार प्रधानमंत्री पद के लिये उनकी नजर में मुलायम हैं या बसपा प्रमुख मायावती.

‘बुआ-बबुआ’ की जोड़ी ने कांग्रेस को दिया झटका, 38-38 सीटों पर लड़ेगी SP-BSP, RLD समेत किसी सहयोगी दल का नहीं किया जिक्र

चुनाव के पहले नेता भी स्पष्ट होने चाहिये. नेतृत्वविहीन गठबंधन को जनता खारिज करेगी’.योगी आदित्यनाथ नेकहा कि, ‘सपा और बसपा अलग-अलग पार्टी क्यों हैं, दोनों का विलय कर दीजिये’. सीएम योगी ने कहा कि सपा और बसपा ने वर्ष 1993 से लेकर 1995 तक उत्तर प्रदेश में मिलकर सरकार चलायी. दूसरा, सपा और बसपा को प्रदेश में पूर्ण बहुमत की सरकार चलाने का अवसर भी मिला. उनकी कार्यपद्धति को सबने देखा. आपको बता दें कि लोकसभा चुनाव से पहले मायावती और अखिलेश यादव ने सपा-बसपा गठबंधन (SP-BSP Alliance) का औपचारिक ऐलान किया. इस ऐलान के मुताबिक, यूपी की 80 सीटों में 38-38 सीटों पर सपा और बसपा लड़ेगी. बसपा और सपा यूपी की 80 लोकसभा सीटों में से 38-38 पर चुनाव लड़ेंगी. कांग्रेस की परंपरागत सीट अमेठी और रायबरेली में महागठबंधन कोई उम्मीदवार नहीं उतारेगा.

25 साल पहले हुए गेस्ट हाउस कांड पर बोलीं मायावती- हमने देशहित में उसको किनारे रख दिया

अखिलेश यादव ने कहा कि भाजपा के अहंकार का विनाश करने के लिए सपा-बसपा का मिलना जरूरी था. मैंने कहा था कि इस गठबंधन के लिए अगर दो कदम पीछे भी हटना पड़ा तो हम करेंगे. आज से सपा का कार्यकर्ता यह गांठ बांध ले कि मायावती जी का अपमान मेरा अपमान होगा. हम समाजवादी हैं औऱ समाजवादियों की विशेषता होती है कि हम दुख और सुख के साथ होते हैं. बीजेपी हमारे बीच गलतफहमी पैदा कर सकती है. बीजेपी दंगा-फसाद भी करा सकती है लेकिन हमें संयम और धैर्य से काम लेना है. मैं मायावती जी के इस निर्णय का स्वागत करता हूं. (इनपुट- भाषा से भी)

यूपी में गठबंधन के बाद किस सीट पर कौन लड़ेगा ? मायावती के जन्मदिन पर होगा फैसला! 

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वीडियो- यूपी में साथ आए बुआ-बबुआ



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Om Prakash Rajbhar In Uttar Pradesh Says SP-BSP Will Put Up Strong Fight


Om Prakash Rajbhar said no party “has the courage” to fight elections alone (File Photo)

Ballia, Uttar Pradesh: 

Suheldev Bhartiya Samaj Party (SBSP), an ally of the ruling BJP in Uttar Pradesh, Sunday said the newly-formed SP-BSP alliance will put up a strong fight in this year’s Lok Sabha elections.

“The country is witnessing an era of coalition, and no party has the courage to go to the polls alone. The SP-BSP alliance is a strong alliance, and it will put up a strong contest in the elections,” Uttar Pradesh Cabinet minister and SBSP chief Om Prakash Rajbhar told reporters on Saturday.

Replying to another query on whether his party will go with the SP-BSP alliance, Mr Rajbhar said there was no truth in such rumours.

Taking a jibe at the BJP, Mr Rajbhar said, “The BJP feels there is a saffron wave across the state. The BJP is having the galat fahmi (wrong perception) that more than 60 per cent of the people are supporting it.”

He said the party could see the result of this wrong perception during the Lok Sabha by-polls when it lost the Gorakhpur, Phoolpur and Kairana, and Noorpur assembly seat.”

Mr Rajbhar also said, “If the alliance with the BJP has to continue, then there should be a division of reservation quota of the backward castes into three categories — backward, very backward) and most backward.”





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Shiv Sena says SP-BSP tie-up in UP puts question mark on grand alliance| सपा-बसपा के गठबंधन ने ‘महागठबंधन’ पर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं : शिवसेना


मुंबई: शिवसेना ने शनिवार को कहा कि उत्तर प्रदेश में सपा और बसपा के चुनाव पूर्व गठबंधन ने कांग्रेस की परिकल्पना वाले ‘‘महागठबंधन’’ पर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं. लोकसभा चुनाव के लिए सपा और बसपा के बीच गठबंधन की औपचारिक घोषणा पर निशाना साधते हुए शिवसेना प्रवक्ता मनीषा कायंद ने कहा कि दोनों पार्टियों की विचारधारा अलग है और कोई भी जनोन्मुखी नहीं है.

कायंद ने कहा, ‘यह गठबंधन जनोन्मुखी गठबंधन नहीं है. इसका एकमात्र मकसद दक्षिणपंथी पार्टियों का दूर रखना है. लोग जानते हैं कि दोनों पार्टियों ने पूर्व में कटुतापूर्वक एक-दूसरे का विरोध किया है और वे पूरी तरह से बिना निश्चित एजेंडे के चुनावी उद्देश्य के लिए एक साथ आई हैं.’ 

उन्होंने कहा, ‘इस गठबंधन ने ‘महागठबंधन’ पर सवालिया निशान लगा दिए हैं और उसका भविष्य अनिश्चित बना दिया है. भविष्य ही बताएगा कि क्या एनसीपी प्रमुख शरद पवार और कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी चुनावों से पहले अपने लिए कुछ कर पाएंगे.’ 

इस बीच, एनसीपी नेता धनंजय मुंडे ने दावा किया कि भाजपा और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ 2019 का लोकसभा चुनाव ‘दूसरा स्वतंत्रता संघर्ष’ होगा. महाराष्ट्र विधान परिषद में विपक्ष के नेता ने कहा, ‘इसके लिए सभी धर्मनिरपेक्ष दलों को एक साथ आना चाहिए और जिम्मेदारी से काम करना चाहिए. सपा-बसपा-कांग्रेस और अन्य सभी एक जैसी विचारधारा वाले दलों को हमारे संविधान तथा लोकतंत्र की रक्षा के लिए एकजुट होना होगा.’ 





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मोदी सरकार को सत्ता में आने से रोकने के लिए SP-BSP गठबंधन सकारात्मक पहल : AAP


आप ने कहा ‘बीजेपी को रोकने के लिए राज्यों की स्थानीय राजनीतिक परिस्थितियों पर आधारित इस तरह के गठबंधन समय की मांग हैं.’

मोदी सरकार को सत्ता में आने से रोकने के लिए SP-BSP गठबंधन सकारात्मक पहल : AAP

आप के राज्यसभा सदस्य संजय सिंह ने शनिवार को कहा कि मोदी सरकार को देश की सत्ता से दूर करने के लिए विपक्षी दलों की एकजुटता जरूरी है (फाइल फोटो)





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