On Herculean Seat Sharing Task, HD Deve Gowda’s Advice To Opposition


HD Deve Gowda said PM Modi claims that coalition government is unstable and cannot achieve anything

Kolkata: 

Former Prime Minister H D Deve Gowda Saturday said with the general elections close at hand, the opposition parties should forget their differences and come together to fight the BJP unitedly.

The Janata Dal (Secular) supremo said a small group of senior leaders should be formed to decide on a roadmap on how they will ensure good governance.

The herculean task of seat sharing for the coming Lok Sabha elections has to be addressed to ensure direct fight against the BJP, he said.

“People want a new government,” he said addressing a mammoth rally organised by Mamata Banerjee at the Brigade Parade Ground.

“A stable government is needed to build a strong nation, but after getting 282 seats in the 2014 elections, Narendra Modi instead of building a strong nation, wants to destroy the secular nature of the country and destroy all constitutional institutions,” Mr Deve Gowda said.

Stating that a question often asked is who would be the prime minister after Narendra Modi, he said the opposition leaders must have confidence that they can give a stable government for five years. This must be ensured by the galaxy of leaders congregated at the rally.

Mr Gowda said PM Modi claims that coalition government is unstable and cannot achieve anything, but the opposition has to show that it can give a stable government and develop the nation.

Referring to the coalition government led by him between June 1996-April 1997, he said it had sanctioned the Bogibeel Bridge in Assam, which was inaugurated by Prime Minister Modi recently.

“Delhi Metro was also cleared by my government, 36 crore poor people were helped through rice, wheat and kerosene oil at subsidised prices,” Mr Gowda said, stressing that a coalition government can ensure development of people and the nation.





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Lok Sabha Elections 2019: BJP can get a tough challenge on Alwar seat from Congress


2004 और 2009 में हुए आम चुनावों की बात करें तो राजस्थान की अलवर सीट से दोनों ही बार कांग्रेस द्वारा जीत हासिल की गई थी.

लोकसभा चुनाव 2019: अलवर सीट पर बीजेपी को कांग्रेस से मिल सकती है कड़ी चुनौती

फाइल फोटो





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Congress MLA claim on Patliputra lok Sabha Seat for Contest


आशुतोष चंद्रा/पटनाः बिहार के पाटलिपुत्र लोकसभा सीट पर महागठबंधन में अब रार शुरू हो गई है. जहां एक ओर आरजेडी के दो लोग इस सीट पर ताल ठोक रहे हैं. वहीं, अब पाटलिपुत्र सीट पर कांग्रेस विधायक ने भी दावा कर दिया है. पाटलिपुत्र के रण में अब महागठबंधन के ही तीन नेता अपना दावा ठोक रहे हैं. हैरानी की बात यह है कि पाटलिपुत्र सीट पर आरजेडी सुप्रीमो लालू यादव की बेटी मीसा भारती के खिलाफ आरजेडी नेता और कांग्रेस नेता मैदान में उतर गए हैं.

महागठबंधन में सीट शेयरिंग का कांटा अभी तक अटका हुआ है. जिसपर किसी तरह का फैसला नहीं लिया जा सका है. लेकिन महागठबंधन दल के नेता सीटों पर अपनी-अपनी दावेदारी कर रहे है. हालांकि पाटलिपुत्र लोकसभा सीट पर रार कुछ ज्यादा ही बढ़ गई है. मीसा भारती ने सबसे पहले इसपर दावा किया था. जिसके बाद आरजेडी में ही घमासान शुरू हो गया. क्योंकि इस सीट पर आरजेडी के कद्दावर नेता भाई वीरेंद्र भी ताल ठोक रहे हैं.

वहीं, अब कांग्रेस विधायक सिद्धार्थ ने भी अपना दावा कर दिया है. ऐसे में महागठबंधन में रार दिखने लगा है. हालांकि मीसा भारती और भाई वीरेंद्र दोनों ने सीट का फैसला आरजेडी अध्यक्ष को सौंपा हैं. लेकिन नेता अपनी ओर से सीट पर तैयारी शुरू कर दी है.

आपको बता दें कि मीसा भारती ने बुधवार को बिक्रम विधानसभा क्षेत्र में एक कार्यक्रम किया था. इस कार्यक्रम में मीसा भारती का आरेजडी के स्थानीय कार्यकर्ताओं ने विरोध किया था. उनका आरोप था कि मीसा भारती ने अपने कार्यक्रम में स्थानीय नेता को आमंत्रित तक नहीं किया है. वहीं, अपने कार्यक्रम के बैनर में स्थानीय विधायक की फोटो तक नहीं लगाई और न ही उन्हें आमंत्रित किया. इससे कार्यकर्ताओं ने अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए चेतावनी तक दे दी थी कि ऐसा रवैया रहा तो अंजाम बुरा होगा.

वहीं, अब कांग्रेस नेता और बिक्रम विधायक सिद्धार्थ ने भी पाटलिपुत्र से सीट से अपना दावा ठोक दिया है. उन्हें भी इस बात की नाराजगी है कि महागठबंधन में आरजेडी के साथ होने के बाद भी उन्हें उनके ही विधानसभा क्षेत्र में नकारा जा रहा है. कांग्रेस विधायक ने कहा है कि जिस दिन पाटलीपुत्र सीट कांग्रेस के खाते में आएगी उसी दिन जीत सुनिश्चित हो जाएगी.

कांग्रेस विधायक का दावा है कि जिस दिन पाटलीपुत्र सीट कांग्रेस के खाते में आएगा उसी दिन जीत सुनिश्चित हो जाएगी. कांग्रेस विधायक ने कहा है कि कांग्रेस किसान मजदूरों की पार्टी है. कांग्रेस को लेकर समाज में सभी जातीय बंधन टूट जाता है. हाल के दिनों में कांग्रेस का ग्राफ तेजी से बढ़ा है. कांग्रेस के पास हर सीट के लिए मजबूत उम्मीदवार है, और अगर पाटलीपुत्र सीट कांग्रेस के खाते में आती है तो मैं उसका प्रबल दावेदार हूं.

बहरहाल सीटों को लेकर महागठबंधन में रार शुरू हो गई है. इससे पहले मोतिहारी और गोपालगंज सीट पर आरएलएसपी नेता उपेंद्र कुशवाहा ने भी दावा ठोक दिया और कहा था कि आरएलएसपी ही दोनों लोकसभा सीट से उम्मीदवार होगा. वहीं, मुंगेर सीट पर भी महागठबंधन में घमासान जारी है. ऐसे में महागठबंधन में सीट शेयरिंग के फैसले का इंतजार किया जा रहा है. 





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BSP Chief Mayawati Birthday today may declare seat sharing with Samajwadi Party


खास बातें

  1. लखनऊ से लेकर दिल्ली तक होगा शक्ति प्रदर्शन
  2. जन्मदिन का निमंत्रण सहयोगी दलों को भी भेजा गया
  3. अखिलेश के साथ सीट बंटवारे पर हो सकता है एलान

नई दिल्ली:

बसपा सुप्रीमो मायावती का 63 वां जन्मदिन आज (15 जनवरी) लखनऊ और दिल्ली दोनों जगह मनाया जाएगा. इसके लिये पार्टी कार्यकर्ता व्यापक तैयारियों में जुटे हुए हैं.राष्ट्रीय जनता दल के नेता और बिहार के पूर्व उप मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव सोमवार देर रात मायावती के घर पहुंचे और उन्हें जन्मदिन की अग्रिम बधाई दी. दोनों नेता करीब एक घंटे तक साथ रहे.    मायावती का जन्मदिन हर साल ‘जन कल्याणकारी दिवस’ के तौर पर मनाया जाता है. 15 जनवरी को सुबह लखनऊ में पार्टी कार्यालय पर जन्मदिन मनाया जाएगा. दोपहर बाद वह दिल्ली चली जाएंगी. वहां जन्मदिन समारोह में सहयोगी दलों के नेताओं के शामिल होने की उम्मीद है. 

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मायावती अखिलेश के बसपा सपा गठबंधन की घोषणा के बाद अब कयास लगाये जा रहे हैं कि जन्मदिन के अवसर पर वह सीटों के बंटवारे का ऐलान कर सकती हैं. गौरतलब है कि दो दिन पहले साझा संवाददाता सम्मेलन में मायावती ने सीटों के बंटवारे पर जल्दी घोषणा करने की बात कही थी. बसपा प्रमुख जन्मदिन के दिन सामान्य तौर पर अपने कार्यालय पर प्रदेश पदाधिकारियों और लखनऊ मंडल के पदाधिकारियों से मिलती हैं. पार्टी सूत्रों का कहना है कि बसपा के सहयोगी दलों सपा, जद(एस), छत्तीसगढ़ कांग्रेस, इनेलो, राजद, तृणमूल कांग्रेस सहित कई दलों के नेताओं को भी जन्मदिन में शामिल होने का न्योता दिया गया है. 

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इन सभी दलों के नेताओं के दिल्ली में जुटने की संभावना को देखते हुए ही जन्मदिन लखनऊ के साथ-साथ दिल्ली में भी मनाने का फैसला लिया गया है. सूत्रों के अनुसार, सपा प्रमुख अखिलेश यादव और बसपा प्रमुख मायावती की संयुक्त रैलियों का कार्यक्रम भी तय हो चुका है. दोनों ही प्रत्येक मंडल में रैलियां करेंगे. बसपा सुप्रीमो मायावती के जन्मदिन को लेकर शहर में पार्टी कार्यकर्ताओं ने कई जगह पर उनके होर्डिंग और पोस्टर लगाये हैं जिसमें उनके जन्मदिन की बधाईयों के संदेश दिये गये हैं. 

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Kumaraswamy Reminds Congress On Lok Sabha Seat Talks


Seat-sharing is expected to be a litmus test for the Congress-JD(S) combine.

Bengaluru: 

As Congress and Janata Dal (Secular) get down to hold talks for the Lok Sabha polls in Karnataka, Chief Minister H D Kumaraswamy said his party should not be treated as “third grade citizens” and that both the partners adopt a “give and take policy” to put up a united fight against the BJP.

With the coalition partners expected to hold talks on the tricky seat-sharing issue amid pressure within the Congress not to cede much to Janata Dal (Secular), Mr Kumaraswamy stressed there should not be any “pettiness” on both sides.

Mr Kumaraswamy said Prime Minister Narendra Modi’s charisma was “fading” with growing anti-incumbency, and pitched for Congress president Rahul Gandhi for the top job while also admitting that there was a lack of consensus among anti-BJP parties on choosing Mr Gandhi.

Mr Kumaraswamy, who has completed seven months in office, however downplayed reports of contradictions within the coalition and said he would overcome all the “bitterness” smoothly. “Both of us (Congress-JD(S)) should go together (in Lok Sabha polls) is our opinion. Because the reason behind forming this government (in Karnataka) is to stop the BJP from coming to power and improve the atmosphere in the country…” Mr Kumaraswamy said when asked whether the JD(S) would go it alone if seat-sharing talks fail.

He said after the formation of the coalition government in the southern state, a lot of changes had taken place in the country’s political landscape, including BJP’s downslide and Congress victory in some bypolls and assembly elections in three states. “…in my opinion if Congress loses its way and tries to move with overconfidence, what will happen they will understand, with their past political experience, I do not think they will forget them. “They should treat us respectfully. They should not treat us as third grade citizens. There should be give and take policy,” Mr Kumaraswamy said.

The JD(S) has demanded 12 out of 28 seats for the Lok Sabha polls, to which the Congress has expressed its reservations. In the 2014 polls, BJP had won 17 seats in the state, Congress 9 and JD(S) 2 seats.

Seat-sharing is expected to be a litmus test for the Congress-JD(S) combine, mostly in the old Mysuru region constituencies, where the JD(S) is a dominant force in the Vokkaliga heartland and the Congress has its sitting MPs.

Reiterating that the coalition intend to face the Lok Sabha polls together, the Karnataka chief minister said leaders of both the parties are expected to discuss and come to a final decision later this month.

“There are 28 seats…they (Congress) should take two-thirds and give us one-third, this is what his feeling is, and mostly, I feel they will also agree,” he said. Asked whether his party’s demand for 12 seats was negotiable, Mr Kumaraswamy did not give a direct response. He however, said the two-third and one-third was the Congress’ formula for the coalition.

Congress and JD(S) had bitterly fought the May 2018 assembly polls, but joined hands as the polls threw up a hung verdict.





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SP and BSP allinances in Uttar Pradesh Know when will be announcement on seat name


नई दिल्ली:

उत्तर प्रदेश की 80 लोकसभा सीटों के लिये सपा बसपा गठबंधन की शनिवार को औपचारिक घोषणा के बाद दोनों दलों के अध्यक्ष अखिलेश यादव और मायावती अगले एक सप्ताह में यह तय कर लेंगे कि कौन किस सीट पर चुनाव लड़ेगा. साथ ही दोनों दल साझा चुनाव अभियान की भी रूपरेखा जल्द तय कर लेंगे. गठबंधन की रूपरेखा से जुड़े सपा के सूत्रों ने शनिवार को बताया कि दोनों दलों के बीच बटवारे वाली सीटों पर आपसी सहमति लगभग बन गयी है. इसकी सार्वजनिक घोषणा बसपा प्रमुख मायावती के 15 जनवरी को जन्मदिन के मौके पर या इसके एक दो दिन के भीतर कर दी जायेगी. इससे पार्टी कार्यकर्ता समय रहते चुनावी तैयारियों में जुट सकेंगे. प्रचार अभियान का आगाज अखिलेश और मायावती की उत्तर प्रदेश के प्रमुख शहरों में साझा रैलियों से होगा. बसपा के एक वरिष्ठ नेता ने बताया कि इसकी शुरुआत लखनऊ, गोरखपुर, वाराणसी और प्रयाग सहित अन्य प्रमुख शहरों से होगी. उन्होंने बताया कि दोनों दलों का शीर्ष नेतृत्व चुनाव प्रचार अभियान को जल्द अंतिम रूप देकर रैलियों की जगह और समय का निर्धारण करेंगे.

यह भी पढ़ें- ‘बुआ-बबुआ’ की जोड़ी ने कांग्रेस को दिया झटका, 38-38 सीटों पर लड़ेगी SP-BSP

गठबंधन में रालोद की सीटों को लेकर अभी कोई अंतिम फैसला नहीं होने के बारे में सपा के एक नेता ने बताया कि कांग्रेस के लिये छोड़ी गयी दो सीटों के अलावा रालोद के लिये फिलहाल दो सीट छोड़ गयी है लेकिन यह अंतिम आंकड़ा नहीं है. रालोद नेताओं के साथ बातचीत और जमीनी वास्तविकता को ध्यान में रखते हुये सपा-बसपा अपने कोटे की अधिकतम एक या दो सीट छोड़ने पर विचार कर सकते हैं. उल्लेखनीय है कि लखनऊ में शनिवार को अखिलेश और मायावती ने संयुक्त संवाददाता सम्मेलन कर सपा बसपा गठबंधन की औपचारिक घोषणा की. इस दौरान मायावती ने गठबंधन से कांग्रेस को अलग रखने की जानकारी देते हुये इस बात का स्पष्ट संकेत दिया कि यह फैसला सोची समझी रणनीति के तहत भाजपा के पक्ष में कांग्रेस के मतों का ध्रुवीकरण रोकने के लिये किया गया है. (इनपुट-भाषा)

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वीडियो- यूपी में साथ आए बुआ-बबुआ



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Bihar after seat sharing face dispute start in Mahagathbandhan


आशुतोष चंद्रा/पटनाः बिहार में महागठबंधन के बीच अब चेहरे को लेकर सियासत शुरू हो गई है. आगामी चुनाव के दौरान महागठबंधन के नेता किसे अपना चेहरा बताकर जनता से वोट मांगेंगे, अब इसे लेकर विवाद तेज हो गया है. हालांकि यह कयास पहले से ही लगाए जा रहे थे कि महागठबंधन में चेहरे को लेकर विवाद होना तय है. अब इस विवाद में कांग्रेस और आरजेडी आमने-सामने दिख रहे हैं.

कांग्रेस का दावा है कि देश के साथ-साथ बिहार में महागठबंधन का चेहरा राहुल गांधी ही होंगे, जबकि आरजेडी ने राहुल को अपना चेहरा मानने से इनकार कर दिया है. आरजेडी की नजरों में बिहार में महागठबंधन का चेहरा लालू और तेजस्वी यादव ही होंगे. अब महागठबंधन के चेहरे को लेकर हो रहे दावों के बीच नया विवाद खड़ा हो गया है.

बिहार महागठबंधन में सीट शेयरिंग को लेकर पहले ही विवाद सुलझते हुए नहीं दिख रहा है. हालांकि नेता इसे मानने को तैयार नहीं हैं. वहीं, महागठबंधन में चेहरे को लेकर विवाद होने के कयास पहले से ही लगाए जा रहे थे, जो अब शुरू हो चुका है. जिसमें कांग्रेस और आरजेडी आमने-सामने दिख रही है. कांग्रेस राहुल गांधी को चेहरा मान रहे तो वहीं आरजेडी लालू यादव को महागठबंधन का चेहरा बता रहे हैं.

कांग्रेस नेता प्रेमचन्द्र मिश्रा ने कहा है कि देश के साथ-साथ बिहार में भी महागठबंधन का चेहरा राहुल गांधी ही होंगे. कांग्रेस नेता ने कहा है कि लोकसभा चुनाव राष्ट्रीय स्तर का चुनाव है और 2019 का चुनाव नरेंद्र मोदी और राहुल गांधी के बीच होनेवाला है. इसके लिए कांग्रेस पार्टी अगल-अलग राज्यों में अपने सहयोगी दलों के साथ चुनावी मैदान में जाएगी. लेकिन जहां तक बिहार में महागठबंधन के चेहरे का सवाल है महागठबंधन का चेहरा राहुल गांधी ही होंगे.

वहीं, हम पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जीतन राम मांझी ने बिहार में राहुल गांधी को महागठबंधन का चेहरा मानने से साफ इनकार कर दिया है. जीतन राम मांझी ने कहा है कि लालू प्रसाद का चेहरा ही महागठबंधन का चेहरा होगा. हालांकि लालू प्रसाद जेल में हैं तो ऐसे में तेजस्वी यादव महागठबंधन के चेहरा होंगे, क्योंकि तेजस्वी यादव में काफी क्षमता है और उन्होंने काफी कम समय में खुद को साबित भी किया है.

आरजेडी नेता भी कुछ ऐसा ही कह रहे हैं. आरजेडी नेता शिवानंद तिवारी भी राहुल गांधी को महागठबंधन का चेहरा नहीं मान रहे हैं. उनका भी कहना है कि महागठबंधन का चेहरा तो लालू यादव ही होंगे. और उनके अनुपस्थिती में तेजस्वी यादव चेहरा होंगे. और इसके लिए महागठबंधन में दो राय नहीं है. लेकिन कांग्रेस आरजेडी की राय से अलग राहुल को अपना चेहरा बता रही है.





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Tejashwi Yadav says we will declare the seat sharing after the makar sankranti


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Mayawatis condition before seat sharing for Lok Sabha elections, Congress said this


नई दिल्ली:

कांग्रेस ने बीएसपी (BSP) प्रमुख मायावती (Mayawati)द्वारा सीटों के बंटवारे को लेकर रखी गई शर्त पर सफाई दी है. कांग्रेस प्रवक्ता टॉम वडक्कन ने कहा है कि ‘मायावती ने धमकी नहीं दी है. उन्होंने समझाया है कि दलितों के खिलाफ केसों को लेकर दबाव बनाना जरूरी है.’

वडक्कन ने कहा है कि ‘हम दलितों के खिलाफ पहले ही मामलों की समीक्षा कर रहे हैं. कानूनी प्रक्रिया में समय लगता है. समस्या को सुलझा लिया जाएगा. उन्होंने कहा कि कर्नाटक में जमीनी सच्चाई देखने के बाद सीटों के बंटवारे पर अंतिम फैसला पार्टी नेतृत्व लेगा. यह तो घर की ही बात है.’   

गौरतलब है कि मध्यप्रदेश और राजस्थान में सरकार बनाने के लिए समर्थन देने के बाद बसपा प्रमुख मायावती  ने कांग्रेस के सामने शर्त रख दी है. बसपा की मांग है कि मध्यप्रदेश और राजस्थान की कांग्रेस सरकार 2 अप्रैल को हुए भारत बंद के दौरान दोनों राज्यों में दर्ज मुकदमे वापस ले. बसपा प्रमुख ने चेतावनी देते हुए कहा कि अगर ऐसा नहीं होता है तो पार्टी दोनों राज्यों की सरकारों को समर्थन पर दोबारा विचार करेगी. उन्होंने कांग्रेस सरकारों को धमकी देते हुए कहा, ‘अगर कांग्रेस की नई सरकारों ने अविलंब उचित कार्रवाई नहीं की तो फिर बसपा को वहां की कांग्रेस सरकारों (मध्यप्रदेश व राजस्थान) को बाहर से समर्थन देने के मामले में पुनर्विचार करना पड़ सकता है.’

मध्यप्रदेश और राजस्थान में कांग्रेस को समर्थन जारी रखने के लिए BSP प्रमुख मायावती ने रखी यह शर्त

मायावती ने सोमवार को आरोप लगाया, ‘एससी/एसटी कानून 1989 व सरकारी कर्मचारियों को पदोन्नति में आरक्षण की पूर्ण बहाली की मांग को लेकर 2 अप्रैल को किए गए ‘भारत बंद’ के दौरान उत्तर प्रदेश सहित भाजपा शासित राज्यों में से मध्यप्रदेश व राजस्थान में जातिगत और राजनीतिक द्वेष की भावना के तहत कार्रवाई की गई थी और निर्दोष लोगों को फंसाया गया था.’ उन्होंने कहा कि अब मध्यप्रदेश और राजस्थान की नई कांग्रेस सरकारों को निर्दोष लोगों के खिलाफ दर्ज मामलों को तुरंत वापस लेना चाहिए और मुकदमों को खत्म करना चाहिए.

समर्थन देने के बाद मायावती ने कांग्रेस पर साधा निशाना, कहा- जनता ने दिल पर पत्थर रखकर जिताई हैं इतनी सीटें

मध्यप्रदेश और राजस्थान में कांग्रेस से सीटों को लेकर बात न बन पाने के बाद बीएसपी विधानसभा चुनावों में अकेले उतरी थी. बसपा को मध्यप्रदेश में दो और राजस्थान में 6 सीटों पर जीत मिली थी. बाद में कांग्रेस को पूर्ण बहुमत न मिलने की स्थिति में बीएसपी ने दोनों राज्यों में समर्थन देने के ऐलान किया था.

VIDEO: मध्य प्रदेश में मायावती का कांग्रेस को समर्थन देने का ऐलान

बता दें कि बहुजन समाज पार्टी (बसपा) ने हाल नतीजे आने के बाद भी कांग्रेस पर हमला बोला था. उन्होंने कहा था कि आम जनता ने अपने दिल पर पत्थर रखकर, न चाहते हुए भी कांग्रेस (Congress) का समर्थन किया है. मायावती (Mayawati) ने कहा था कि ‘हमारी पार्टी ने यह चुनाव भाजपा को सत्ता से बाहर करने के लिए लड़ा था, लेकिन दुःख की बात यह है कि हमारी पार्टी अपने इस मकसद में कामयाब नहीं हो सकी. मुझे मालूम हुआ है कि मध्यप्रदेश में अभी भी भाजपा (BJP) सत्ता में आने के लिए जोड़-तोड़ में लगी है. इसे रोकने के लिए हमारी पार्टी ने कांग्रेस की सोच और नीतियों से सहमत ना होते हुए भी, मध्य प्रदेश में कांग्रेस (Congress) को सरकार बनाने के लिए समर्थन देने का फैसला किया है. जिससे भाजपा अपने मकसद में कामयाब ना हो सके.’



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Kamal Nath will contest from sausar seat in madhya pradesh assembly bypolls


छिंदवाड़ा: मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ ने रविवार को कहा कि वह छिंदवाड़ा जिले की सौंसर विधानसभा सीट से विधानसभा उपचुनाव लड़ने को प्राथमिकता देंगे. इसके लिए वह सौंसर की जनता से बात करके अंतिम निर्णय लेंगे. मुख्यमंत्री बनने के बाद पहली बार अपने गृह नगर छिंदवाड़ा पहुंचे कमलनाथ ने रोडशो एवं जनसभा को संबोधित करने के बाद कहा, “http://zeenews.india.com/”मैं सौंसर विधानसभा सीट का वोटर हूं. छिंदवाड़ा जिले की सात सीटों में से इस सीट पर कांग्रेस सबसे ज्यादा मतों से जीती है. इसलिए मैं चुनाव लड़ने के लिए इसी सीट को प्राथमिकता दूंगा.”http://zeenews.india.com/” 

नौ बार छिंदवाड़ा लोकसभा सीट से रह चुके हैं सांसद
उन्होंने कहा, “http://zeenews.india.com/”इसके लिए मैं सौंसर की जनता से बात करके निर्णय लूंगा.”http://zeenews.india.com/” नौ बार छिंदवाड़ा सीट से सांसद रहे कमलनाथ ने 28 नवंबर को हुए विधानसभा का चुनाव नहीं लड़ा था. नियम के अनुसार उन्हें मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के छह माह के अंदर मध्यप्रदेश विधानसभा का सदस्य बनना जरुरी है. 

छिंदवाड़ा की सात में से सौंसर सीट से लड़ेंगे चुनाव
छिंदवाड़ा जिले में विधानसभा की सात सीटें हैं और इनमें से चार सीटें अमरवाड़ा (एसटी), परासिया (एससी), जुन्नारदेव (एसटी) और पांढुर्णा (एसटी) आरक्षित वर्ग के लिये हैं. जबकि कमलनाथ सामान्य वर्ग से ताल्लुक रखते हैं इसलिए वह जिले में तीन बची सामान्य सीटों छिंदवाड़ा, सौंसर और चौरई से ही उपचुनाव में प्रत्याशी बन सकते हैं. मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान पर तंज कसते हुए कमलनाथ ने जनसभा को संबोधित करते हुए कहा, “http://zeenews.india.com/”जनता घोषणाओं से थक चुकी है. इसलिए अब मैं कोई घोषणा नहीं करूंगा. होने वाले कार्यों की संपूर्ण जानकारी जिम्मेदार अधिकारी देंगे और कार्य के पूरा होने की समय-सीमा भी बतायेंगे.”http://zeenews.india.com/” 

किसानों, महिलाओं और युवाओं के लिए सरकार करेगी काम- कमलनाथ
कमलनाथ ने कहा है कि किसानों, युवाओं और महिलाओं के हितों के संरक्षण और विकास के लिये मध्यप्रदेश सरकार सदैव तत्पर रहेगी. उनकी चुनौतियां अब हमारी होंगी. प्रदेश में कृषि आधारित अर्थव्यवस्था को मजबूत किया जायेगा. युवाओं के लिये बेहतर रोजगार, महिलाओं की उन्नति और सुरक्षित वातावरण निर्माण के लिये राज्य सरकार वचनबद्ध है. उन्होंने कहा कि कृषि क्षेत्र अर्थव्यवस्था की बुनियाद है. किसानों को उनकी उपज की सही कीमत दिलाई जायेगी. जब किसान समृद्ध होगा, उसकी क्रय शक्ति बढ़ेगी, तभी गांव और शहर का व्यापार बढ़ सकेगा.

मध्य प्रदेश में रोजगार के अवसर होंगे पैदा- कमलनाथ
कमलनाथ ने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार ने किसानों का कर्जा माफ कर उनके हित में बड़ा निर्णय लिया है. राज्य सरकार वचनपत्र के वायदे के मुताबिक ही किसानों को न्याय दिलाएगी. वचनपत्र को जमीनी हकीकत और आवश्यकता के आधार पर तैयार किया गया है. इसमें हर वर्ग, हर व्यक्ति के चहुंमुखी विकास और उन्नति की बातों को शामिल किया गया है. उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश के विकास में नौजवानों का बहुत बड़ा योगदान होगा. आज नौजवान इंटरनेट और नई तकनीकी विकास से लैस है. अब उनके हाथों को काम चाहिये, उन्हें व्यवसाय चाहिये. मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्यप्रदेश के प्रति निवेशकों का विश्वास बढ़ेगा, उद्योग-धन्धे आयेंगे तथा युवाओं के लिये नये-नये रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे.

40 वर्षों से मिला है छिंदवाड़ा का साथ
उन्होंने कहा कि चुनौतियों को विकास, खुशहाली और उन्नति में बदलने के लिये प्रदेश सरकार सही सोच के साथ कार्य करेगी. उन्होंने छिंदवाड़ा की जनता के साथ प्रदेश के नागरिकों का आभार जताते हुए कहा कि 40 वर्ष पहले छिंदवाड़ा के लोगों के प्यार के साथ भरपूर विश्वास मिला था, जो आज तक कायम है. कमलनाथ ने कहा कि पिछले 40 वर्षों में छिंदवाड़ा विकास यात्रा में बहुत आगे निकल गया है. पहले छिंदवाड़ा में उद्योग नहीं थे, आज उद्योग-धन्धों की कमी नहीं हैं. युवाओं को रोजगार में स्थापित करने और उनके कौशल विकास के लिये प्रशिक्षण संस्थाओं की श्रृंखला है. ऐसी सुविधा पूरे विश्व में किसी एक जिले में नहीं है.

छिंदवाड़ा के तीन दिवसीय दौरे पर हैं कमलनाथ
इससे पहले छिंदवाड़ा के ईमलीखेडा हवाईपट्टी पहुंचने के बाद उन्होंने वहां से पोला ग्राउंड सभा स्थल तक रोड शो किया. इस दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं एवं विभिन्न संस्थाओं द्वारा उनका भव्य स्वागत किया गया. वह आज से तीन दिवसीय छिंदवाड़ा दौरे पर हैं. इस दौरान कमलनाथ जिले में 22 निर्माण कार्यों के भूमिपूजन करने के साथ-साथ 14 कार्यों का लोकार्पण भी करेंगे. वह नया साल छिन्दवाड़ा में ही मनाएंगे.

(इनपुट भाषा से)





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