For Top Job In Madhya Pradesh, Experience May Trump Youth


खास बातें

  1. राहुल गांधी कर सकते हैं आज ऐलान
  2. विधायक दल की बैठक में नहीं हुआ फैसला
  3. एमपी में पार्टी को मिली है 114 सीटें

भोपाल: मध्यप्रदेश का मुख्यमंत्री (CM of Madhya Pradesh) कौन होगा यह आम जनता के साथ-साथ कांग्रेस पार्टी के लिए भी एक बड़ा सवाल बनकर सामने आया है. पार्टी सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार पार्टी युवा चेहरे ज्योतिरादित्य सिंधिया (Jyotiraditya Scindia ) की तुलना में वरिष्ठ नेता कमलनाथ के तजुर्बे को ज्यादा तरजीह दे सकती है. हालांकि राज्य का अगला मुख्यमंत्री कौन होगा इसका निर्णय पूरी तरह से अब पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी पर छोड़ दिया गया है. ज्योतिरादित्य सिंधिया (Jyotiraditya Scindia) ने पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के साथ बैठक के बाद एक ट्वीट किया. उन्होंने लिखा कि हमनें  पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के साथ बैठक करने के बाद यह तय किया है कि सूबे के नए मुख्यमंत्री के नाम का चयन हाईकमान के द्वारा किया जाएगा. वो जो भी फैसला लेंगे हम उसे स्वीकार करेंगे.

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सूत्रों की मानें तो पार्टी कमलनाथ मुख्यमंत्री बना सकती है. बता दें कि मध्यप्रदेश में पार्टी के सरकार बनाने की स्थिति को देखते हुए कल रात कमलनाथ पार्टी के अन्य नेताओं के साथ मिलकर राज्यपाल से मिलने गए थे. जबकि बुधवार सुबह शिवराज सिंह चौहान के इस्तीफे के बाद अकेले ही उनसे मिलने पहुंच गए.

 

विधानसभा चुनाव परिणाम 2018 : मध्य प्रदेश

जानकार इसे एक संकेत के तौर पर भी देख रहे हैं. गौरतलब है कि राहुल गांधी ने तीनों राज्य में किसे मुख्यमंत्री बनाया जाए इसे लेकर अपने कार्यकर्ताओं से उनकी पसंद पूछी है. उन्होंने बुधवार को एक ऑडियो टेप भी जारी किया. इस टेप में वह अपने कार्यकर्ताओं से पूछ रहे हैं कि आखिर उनके हिसाब से तीनों राज्यों में किसे मुख्यमंत्री बनाना चाहिए.

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ऑडियो टेप में राहुल गांधी अपने कार्यकर्ताओं को आश्वासन दे रहे हैं कि वह बगैर किसी हिचक के उन्हें अपनी पसंद बताएं. वह कार्यकर्ताओं से कह रहे हैं कि आप यह न सोचें की मैं आपके नाम को जाहिर करूंगा, आपकी पहचान गुप्त रखी जाएगी और इसकी जानकारी सिर्फ मुझे होगी कि आपने किसे अपनी पसंद बताया है. बता दें कि कांग्रेस ने मध्यप्रदेश में कुल 114 सीटें जीतीं हैं. जबकि यहां मुख्यमंत्री पद के दावेदार के तौर पर कमलनाथ और ज्योतिरादित्य सिंधिया का नाम सबसे ऊपर चल रहा है. वहीं राजस्थान में पार्टी को 99 सीटें मिली हैं. यहां मुख्यमंत्री की रेस में वरिष्ठ नेता अशोक गहलोत और युवा नेता सचिन पायलट हैं. पार्टी सूत्रों के अनुसार पार्टी यह निर्णय अगले साल होने वाले लोकसभा चुनाव को ध्यान में रखकर करना चाहती है. 

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VIDEO: शिवराज सिंह ने की चुनाव आयोग से शिकायत.

 



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For Top Job In Madhya Pradesh, Experiemce May Trump Youth


Kamal Nath and Jyotiraditya Scindia are the top contenders for the chief minister role in Madhya Pradesh

Bhopal: 

Veteran leader Kamal Nath, who brought together warring factions to deliver a victory for the Congress in the bellwether heartland state of Madhya Pradesh, is most state leaders’ choice for the post of chief minister, sources said. The alternative is Jyotiraditya Scindia, who has the advantage of youth and popular appeal. The decision, however, was left to party chief Rahul Gandhi this evening – in a one-line resolution after a two-hour meeting of the state legislature party.

Mr Scindia said in a tweet: “After a meeting with Congress’ newly appointed lawmakers, we have decided that the chief minister of Madhya Pradesh will be chosen by the high command of the party. Whatever they decide, we will happily accept it.”

There are indications that Mr Nath is being positioned for the lead role, sources said.

Last night, he was the one to write to Governor Anandiben Patel, claiming majority and asking for an appointment to stake claim to form government.

This afternoon, he went alone to meet Shivraj Singh Chouhan after he stepped down from the top job — a task that usually falls to a chief ministerial candidate.

Among Kamal Nath’s many supporters is veteran leader Digvijaya Singh, say insiders. The two contemporaries have not always been the best of friends. But recently, asked about the advantages of youth versus age for the state’s top job, Mr Singh had responded, “There is no senior junior in politics”.

The only indication about the way Mr Gandhi is leaning came a year earlier, when at a rally in Mandsaur, Mr Gandhi had said, “Scindia is young, Kamal this time!”

Mr Scindia has made it clear that he was ready for the job if it was offered. “Absolutely…It would be an honour to serve as chief minister,” Mr Scindia has told NDTV.





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Rajasthan Madhya Pradesh Chhattisgarh election results: These are main reasons of BJP defeat


नई दिल्ली: पांच राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव के नतीजे सामने आ चुके हैं. हिंदी हार्टलैंड के तीन राज्यों में भारतीय जनता पार्टी की हार हुई है और भाजपा की यह हार काफी मायने रखती है. क्योंकि 2019 लोकसभा चुनाव से ठीक पहले तीन राज्यों में हार का झटका एक ओर भाजपा की उत्साह को कम करता है, वहीं 2019 के महामुकाबले के लिए कांग्रेस के मनोबल को बढ़ाता है. हालांकि, परिणाम सामने आने के बाद हर पार्टियां अपने नतीजों पर आत्मचिंतन और मंथन करेगी. 

जाहिर सी बात है कि बीजेपी भी उन कमियों की तलाश में होगी, जिसकी वजह से उसे इतनी ब़ड़ी हार मिली और एक ही झटके में तीन बड़े राज्य उसके हाथ से चले गए. इसके अलावा, अब सबके मन में हार-जीत के कारणों को जानने की इच्छा होगी. आखिर क्या वजह रही कि बिना गठबंधन के भी कांग्रेस ने इन राज्यों में जीत दर्ज की है. पिछले एक साल से अब तक क्या बदला है..क्या वो फैक्टर्स हैं जिन्होंने बीजेपी को नुकसान पहुंचाया, तो चलिए जानते हैं…

एमपी: BSP-SP के बाद 4 निर्दलीयों ने थामा कांग्रेस का हाथ, आंकड़ा पहुंचा बहुमत के पार

–  अगर चुनावी नतीजों पर गौर करें तो इन चुनावों में नोटबंदी, जीएसटी से भाजपा को सबसे ज्यादा झटका लगा है. क्योंकि भाजपा के वोट शेयर और उसके सीटों की स्थिति को देखें तो शहरी क्षेत्रों में भाजपा को भारी नुकसान हुआ है.   मध्य प्रदेश में शहरी क्षेत्रों की सीटों में भाजपा को 54 फीसद और राजस्थान में 41 फीसदी का नुकसान हुआ है.

क्या राहुल गांधी होंगे महागठबंधन का चेहरा? NDTV ने पूछा विपक्षी दलों से सवाल, जानें- क्या है उनकी राय

– राजस्थान में सचिन पायलट का असर भी भाजपा पर भारी पड़ा. पायलट की वजह से गुर्जर समुदाय के मतदाताओं ने भाजपा का साथ छोड़ दिया. राजस्थान की कई सीटों पर गुर्जर समुदाय काफी अच्छा प्रभाव रखता है. भाजपा को गुर्जर समुदाय बहुल सीटों में 61 फीसदी कमी हुई है. 

विधानसभा चुनाव: तीन राज्यों में ‘विजय’ के बाद बोलीं सोनिया गांधी- भाजपा की नकारात्मक राजनीति पर मिली जीत

– भाजपा से किसानों का मोहभंग ने भी इन चुनावों में काफी असर डाला है. भारतीय जनता पार्टी से जाट समुदाय दूर हट गया. राजस्थान में भाजपा को जाट बहुल सीटों की 58 फीसदी कम आई है. 

‘मामा’ शिवराज सिंह चौहान को सत्ता से बेदखल करने में कांग्रेस को आया पसीना, ये हैं कारण..

– आदिवासी वोटों पर भाजपा की पकड़ भी कमजोर हुई है. तीनों राज्यों में आदिवासी क्षेत्रों में भाजपा की सीटों में कमी देखने को मिली. राजस्थान में यह कमी 41 फीसदी, छत्तीसगढ़ में 35 फीसदी और मध्य प्रदेश में 24 फीसदी रही है.

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MP में कांग्रेस की जीत के बाद NDTV की ज्योतिरादित्य सिंधिया से खास बातचीत



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Shivraj singh chouhan gave tough fight to congress in Madhya Pradesh Assembly Polls 2018


खास बातें

  1. मध्‍यप्रदेश में स्‍पष्‍ट बहुमत हासिल नहीं कर पाई कांग्रेस
  2. राज्‍य में उसे 114 सीटें हासिल हो पाईं
  3. शिवराज की बीजेपी के खाते में आईं 109 सीट

नई दिल्‍ली: मध्‍यप्रदेश के विधानसभा चुनावों (Madhya Pradesh Assembly Polls 2018) में कांग्रेस (Congress) सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी है. एक दशक से अधिक समय से काबिज शिवराज सिंह चौहान (Shivraj singh chouhan) सरकार के खिलाफ ‘एंटी इनकंबेसी’ फैक्‍टर भी पूरी तरह से कांग्रेस के काम नहीं आया और वह बहुमत के लिए जरूरी अंक तक नहीं पहुंच सकी. परिणामों की अंतिम घोषणा के बाद कांग्रेस पार्टी के खाते में 114 सीट आईं और वह बहुमत के लिए जरूरी 116 के  आंकड़े से दो सीट दूर रही. मायावती की बहुजन समाज पार्टी (BSP)की ओर से समर्थन में घोषणा के बाद कांग्रेस को सत्‍ता की ‘सीढ़ी’ तो मिल गई है लेकिन शिवराज को पूरी तरह मात नहीं दे पाने की टीस लंबे समय तक उसे सालती रहेगी. मध्‍यप्रदेश के विधानसभा चुनाव के नतीजे इस बार टी20 के तरह बेहद रोचक रहे. सीटों के रुझान में दोनों पार्टियों के बीच पूरे समय कड़ा संघर्ष चलता रहा और आखिरकार देर रात कांग्रेस को राहत की सांस लेने का मौका मिला. कभी रुझान में कांग्रेस पार्टी बाजी मारती दिख रही थी तो कभी बीजेपी (BJP) के इस रेस में आगे निकलने से भगवा पार्टी के समर्थकों को खुशी मनाने का मौका मिलता रहा. शिवराज सिंह चौहान की अगुवाई वाली बीजेपी को ‘मात’ देने में कांग्रेस को एड़ी चोटी का जोर लगाना पड़ा.

अटलजी की इस कविता को याद कर बोले शिवराज, हार की जिम्मेदारी सिर्फ और सिर्फ मेरी


मध्‍यप्रदेश में इस बार हुए रिकॉर्ड मतदान के बाद ही कांग्रेस एक तरह से ‘विनिंग मोड’ में थी. ‘एंटी इनकंबेसी’ फैक्‍टर और एग्जिट पोल में अपने पक्ष में आए ज्‍यादातर रुझान को वह जीत का आधार मान रही थी लेकिन इस चुनावी समर में शिवराज सिंह ‘धरती पकड़’ साबित हुए. अंत में बाजी भले ही कांग्रेस के पक्ष में आई लेकिन शिवराज भी ‘विजेता’ से कम साबित नहीं हुए. दूसरे शब्‍दों में कहें तो मध्‍यप्रदेश (Madhya Pradesh) के चुनाव परिणामों को शिवराज की ‘हार’ के बजाय कांग्रेस की ‘जीत’ कहा जाना उपयुक्‍त होगा.

आखिर ऐसा क्या है कि मध्य प्रदेश में ‘मामा’ शिवराज हारते ही नहीं?

कांग्रेस ने इस बार सूबे में चुनाव पूरी तरह एकजुट होकर लड़ा था. वरिष्‍ठ नेता कमलनाथ (Kamal Nath) को हर कदम पर युवा ज्‍योतिरादित्‍य सिंधिया (Jyotiraditya Scindia) का साथ मिला. दोनों ने मिलकर बीजेपी को पटखनी देने की रणनीति को अमली जामा पहनाया था. बीजेपी के कुछ कद्दावर नेताओं ने बागी बनकर एक तरह से इस चुनाव में कांग्रेस के लिए ‘बी टीम’ का काम किया. पूर्व सांसद रामकृष्‍ण कुसुमरिया दो सीटों पर बागी प्रत्‍याशी बनकर बीजेपी के खिलाफ मैदान में उतरे तो सरताज सिंह ने तो ऐनचुनाव के पहले कांग्रेस का दामन थाम लिया. कुसुमरिया और सरताज, दोनों ही अटलबिहारी वाजपेयी के नेतृत्‍व में केंद्र में बनी बीजेपी सरकार में मंत्री रहे हैं. इन तमाम बातों के बावजूद शिवराज की कद्दावर छवि ने कांग्रेस को हर सीट के लिए कड़ा संघर्ष कराया. सीधी सी बात है कि सत्‍ता विरोधी रुझान के बावजूद शिवराज के ‘देसीपन’ ने बीजेपी को करारी हार से बचाए रखा. बीजेपी मध्‍यप्रदेश का यह ‘टी20 मुकाबला’ हारी जरूर लेकिन अपना सम्‍मान बचाने में सफल रखी. राजस्‍थान में वसुंधरा राजे और छत्‍तीसगढ़ में रमन सिंह की सरकार का इन चुनावों मे जिस तरह का हश्र हुआ, उसे देखते हुए शिवराज का प्रदर्शन हर तरह की सराहना का हकदार है.

भाजपा सांसद का CM शिवराज पर निशाना, कहा- ‘माई के लाल’ बयान से हुआ BJP को नुकसान

आखिरकार शिवराज सिंह में ऐसा क्‍या है कि उनकी एमपी में उनकी सरकार को मात देने का कांग्रेस का सपना पूरी तरह पूरा नहीं हो पाया. मध्‍यप्रदेश के लोग इसके पीछे कारण शिवराज सिंह की आम आदमी की छवि का मानते हैं. शिवराज ने बेहद चतुराई से अपनी यह छवि गढ़ी है. मध्‍यप्रदेश के बच्‍चों के लिए वे ‘मामा’ हैं तो महिलाओं के ‘भाई’. व्‍यवहार में शिवराज बेहद सौम्‍य हैं, सियायत में शायद ही उनका कोई ‘शत्रु’ हो. यही कारण रहा कि राज्‍य में दो दशक से अधिक समय तक सत्‍ता पर काबिज रहे. शिवराज के भाषणों में भी यह देसीपन झलकता था. लोगों को लगता था कि उनके हितों को ध्‍यान रखने वाला शख्‍स ही राज्‍य में सीएम पद पर है. उनकी ओर से मध्‍यप्रदेश में चलाई गईं कई योजनाओं को इस मामले में मील का पत्‍थर माना जा सकता है.

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वीडियो: शिवराज सिंह चौहान फिर जनता की अदालत में

भावांतर योजना से जहां उन्‍हें नाराज किसानों को साधने की हरसंभव कोशिश की, वहीं लाड़ली लक्ष्‍मी, मुख्‍यमंत्री कन्‍यादान योजना से आर्थिक रूप से कमजोर महिलाओं और बालिकाओं का दिल जीता. मुख्‍यमंत्री तीर्थ दर्शन योजना से उन्‍होंने राज्‍य के खर्चे पर बुजुर्गों को तीर्थयात्रा कराने का बीड़ा उठाया. इन योजनाओं को देशभर में प्रशंसा मिली और बाद में कई राज्‍यों ने इनका अनुसरण किया. इन योजनाओं के कारण शिवराज ने मध्‍यप्रदेश को बीजेपी के ‘गढ़’ में तब्‍दील करने का हरसंभव प्रयास किया. कांग्रेस के कई नेता भी निजी बातचीत में इस बात की तस्‍दीक करते हैं कि शिवराज की लोकप्रियता का कारण उनकी यही ‘देसी छवि’ है. जन आर्शीवाद यात्रा के जरिये वे पूरे मध्‍यप्रदेश में धूमे. किसान के पुत्र होने के कारण वे कृषि प्रधान राज्‍य मध्‍यप्रदेश को लोगों से बेहतर तरीके से कनेक्‍ट कर पाते हैं.अल्‍पसंख्‍यकों में भी उनकी अच्‍छी छवि है. हालांकि सत्ता विरोधी रुझान के कारण शिवराज के ये प्‍लस प्‍वॉइंट भी बीजेपी को जीत नहीं दिला पाए. वैसे, अंदरखाने यह बात भी चर्चा का विषय बनी हुई है कि बेहद कठिन लड़ाई में उलझे शिवराज को दिल्‍ली स्थित शीर्ष नेतृत्‍व से पूरा सहयोग नहीं मिल पाया. यदि वे राज्‍य में इस बार भी जीतते तो उनका बढ़ता सियासी कद काफी बढ़ जाता और यह अंततोगत्‍वा दिल्‍ली में काबिज शीर्ष नेताओं के लिए भविष्‍य में परेशानी का कारण बनता. कड़ी लड़ाई में शिवराज सिंह चौहान ने मध्‍यप्रदेश ‘गंवाया’ जरूर है लेकिन इस हार में भी वे अपना ‘कद’ बढ़ाने में सफल हुए हैं…



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Final Results: Congress Gets Madhya Pradesh After All. Over To Top Post Race


Congress Gets Madhya Pradesh After All. Over To Top Post Race: 10 Points

Madhya Pradesh: Kamal Nath, Jyotiraditya Scindia and Digvijaya Singh will meet Anandiben Patel

Bhopal:  The Congress will shortly stake claim to form the next government in Madhya Pradesh after emerging the largest party in a see-saw battle with the BJP, which lost power after putting up a strong fight. The Congress is two short of the majority mark of 116 in the 230-seat Madhya Pradesh assembly, but has closed the gap with help from Mayawati, who announced her support this morning.

  1. The Congress’s top trio of Kamal Nath, Jyotiraditya Scindia and Digvijaya Singh met Governor Anandiben Patel around noon.
  2. The party’s next challenge is likely to be an anticipated leadership tussle. Later today, all lawmakers will meet to pick the chief ministerial candidate but sources say the party favours Kamal Nath for now.
  3. After a sleepless night, the Congress finished with 114 seats, stopping just short of a majority but ending the ruling BJP’s dream run in one of India’s most important bellwether states.
  4. Outgoing Chief Minister Shivraj Singh Chouhan said he would resign and the BJP would not stake claim to form the government. With 109 seats, the party had last night indicated it may also meet the Governor for a shot at power. “We did not win a majority so will not stake claim,” Mr Chouhan, who ruled the state for three straight terms, said.
  5. Mayawati’s support was the game-changer for the Congress after its struggle to reach the target despite its top leader Kamal Nath telling reporters at 2.45 am that his party was winning an absolute majority.
  6. Kamal Nath had earlier in the day reached out to Mayawati, who had snubbed the Congress during alliance talks before the polls.
  7. The BSP has won two seats and the Samajwadi Party of Akhilesh Yadav one. He has also announced support for the Congress.
  8. The BJP, which ruled Madhya Pradesh for 15 years, trumped the Congress in vote share by a slender margin. The party received 41 per cent of the total votes polled, while the Congress got 40.9 per cent.
  9. The BJP fared badly in Mandsaur, the epicentre of farmer protests last year, from where Congress president Rahul Gandhi launched his election campaign.
  10. The party is seen to have lost out in rural areas and in reserved constituencies.

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Madhya Pradesh Assembly Election Results: Who will be the CM, Kamal nath, Jyotiraditya Scindhiya


नई दिल्ली: मध्य प्रदेश विधानसभा सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरने के साथ ही कांग्रेस ने अपना सियासी वनवास खत्म कर लिया है. राज्य में करीब 15 साल तक सत्ता से बाहर रही कांग्रेस लिए यह जश्न का वक्त है क्योंकि बसपा और सपा के साथ मिलकर कांग्रेस सरकार बनाती दिख रही है. मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव में सभी 230 सीटों के परिणाम आने के बाद 114 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी कांग्रेस ने प्रदेश में सरकार बनाने का दावा पेश किया है. हालांकि, कांग्रेस की सरकार मध्य प्रदेश में बनती तो दिख रही है, जिसके लिए कांग्रेस ने राज्यपाल से मिलने का समय मांगा है और राजभवन ने अपनी सहमति भी जता दी है. मगर अभी बड़ा सवाल है कि आखिर कांग्रेस मध्य प्रदेश में मुख्यमंत्री के तौर पर किसका राजतिकल करेगी. मध्य प्रदेश की ताज का सरताज कौन होगा यह अब भी बड़ा सवाल है. क्योंकि दावेदार दो बताए जा रहे हैं- कमलनाथ और ज्योतिरादित्य सिंधिया. 

Election Results 2018: विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद राहुल गांधी ने बताया कि उन्होंने PM मोदी से क्या सीखा


दरअसल, ऐसा माना जा रहा है कि कांग्रेस विधायक दल की बैठक के बाद ही यह निर्णय होगा कि ज्योतिरादित्य सिंधिया या फिर कमलनाथ में से कौन सीएम के रूप में आगे लाए जाते हैं. हालांकि, सूत्रों का मानना है कि दोनों नामों में से एक नाम पर सहमति राहुल गांधी और कांग्रेस का आलाकमान ही करेगा. हालांकि, खुद ज्योतिरादित्य सिंधिया भी कह चुके हैं कि मुख्यमंत्री को लेकर फैसला हाईकमान ही लेगा. 

मध्य प्रदेश में बहुमत के जादुई आंकड़े से दो कदम दूर रह गई कांग्रेस, जानें अब क्या होगा सियासी समीकरण

लेकिन मुख्यमंत्री के रेस में अभी कौन सबसे आगे चल रहे हैं, इस सवाल पर अभी भी संशय है. राजनीतिक पंडितों की मानें तो कमलनाथ का पलड़ा ज्यादा भारी लग रहा है. इसकी वजह है कि कमलनाथ न सिर्फ ज्यादा अनुभवी और मझे हुए राजनेता हैं, बल्कि उनकी राजनीतिक सोच और समझ भी ज्यादा परिपक्व नजर आती है. चुनाव कवर करने वाले राजनीतिक पत्रकारों का मानना है कि राज्य में टिकट बंटवारे में भी कलनाथ का ज्यादा हस्तक्षेप रहा. 

LIVE UPDATES: MP में कांग्रेस की राह हुई आसान, बसपा ने सरकार बनाने के लिए समर्थन का ऐलान किया

वहीं, ज्योतिरादित्य सिंधिया के पक्ष में यह बात जाती है कि वह कांग्रेस के लिए राज्य में एक युवा चेहरा के तौर पर हैं. बीते कुछ सालों में उन्होंने अपनी राजनीति को जो दिशा दी है, उससे वहां के लोगों की नजर में उनकी छवि काफी बेहतर हुई है. मगर कांग्रेस में अभी भी वह कमलनाथ के कद की तुलना में पीछे ही माने जा रहे हैं. ऐसा बताया जाता है कि ज्योतिरादित्य सिंधिया का टिकट बंटवारे में ज्यादा नहीं चल सका है. वहीं अगर 15 साल बाद सत्ता में कांग्रेस की वापसी हो रही है तो इसके पीछे कमलनाथ की रणनीतिक का कमाल ही माना जा रहा है. हालांकि, इससे  भी कोई इनकार नहीं कर सकता है कि कमलनाथ और ज्योतिरादित्य सिंधिया की जोड़ी ने ही कांग्रेस को जीत का स्वाद चखवाया है.

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मगर कमलनाथ और ज्योतिरादित्य सिंधिया में से किसी एक का चुनाव आज शाम तक हो जाएगा. मगर इतना जरूर है कि कांग्रेस पार्टी जो भी फैसला लेगी, वह लोकसभा चुनाव को ध्यान में रखकर जरूर लेगी. बता दें कि सभी 230 सीटों पर परिणाम आने के बाद कांग्रेस को 114, भाजपा के 109, बहुजन समाज पार्टी (बसपा) को दो, समाजवादी पार्टी को एक और निर्दलीय उम्मीदवारों को चार सीटें मिली हैं. बसपा प्रमुख मायावती ने कांग्रेस को समर्थन देने का ऐलान कर दिया है. इससे पहले सपा ने भी कांग्रेस कोही समर्थन देने का ऐलान किया है. इससे अब कांग्रेस की राह आसान हो गई है और अब कांग्रेस आसानी से सरकार बनाने के लिए जादुई आंकड़े को पूरा कर लेगी.  

VIDEO: मध्यप्रदेश में कांग्रेस ने राज्यपाल से मिलने का मांगा समय



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Will Support Congress In Madhya Pradesh To Keep BJP Out, Says BSP Chief Mayawati


Madhya Pradesh results: BSP chief Mayawati said her party will support Congress to keep BJP out

New Delhi: 

Mayawati today said her Bahujan Samaj Party (BSP) would support the Congress in Madhya Pradesh and Rajasthan, to keep the BJP out of power. Her support will take the Congress past the finishing line in both states, where it missed a majority in elections.

“Our aim is to keep the BJP out of power. And that is why we have decided to support the Congress in Madhya Pradesh,” Mayawati said this morning. The BSP has won two seats in the 230-seat Madhya Pradesh assembly, in which the Congress has emerged the largest party but is two short of the majority mark of 116. The BJP is not far behind, with 109 seats.

“We have decided to support the Congress in Rajasthan as well. We fought these elections to ensure that the BJP does not come back to power,” said Mayawati.

The Congress, which wrote to Governor Anandiben Patel late last night staking claim to power, is expected to meet her this morning.

While announcing her support, Mayawati did not spare the Congress her criticism. She said the Congress ruled most of the states in India but regional parties emerged because it was not working for the welfare of the people. “If the Congress had performed well, there would not have been a BJP either,” she said.

The Congress’s first overture to Mayawati went yesterday, as soon as it realised that its climb to the top of the heap in Madhya Pradesh in yesterday’s vote count was slow and uncertain.

After receiving Kamal Nath’s call, Mayawati called her leaders to Delhi for a meeting.

The BSP chief, a powerful Dalit leader from Uttar Pradesh with influence in swathes of rural north India, had snubbed the Congress during talks for seat-sharing in Madhya Pradesh and its neighbour Chhattisgarh. Acrimonious exchanges between Mayawati and the Congress at the time dampened hopes for a united opposition bloc to take on the BJP in next year’s national election.

Mayawati had also skipped an opposition meeting held on Monday to establish unity goals for 2019. Her ally in the state, Samajwadi Party leader Akhilesh Yadav, had also given the meeting a miss.

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Congress Beats BJP In Heartland States; Misses Majority In Madhya Pradesh


Final election results 2018: Congress stopped the BJP’s run in three heartland states

New Delhi:  The Congress ended the ruling BJP’s winning streak in India’s heartland, winning Chhattisgarh and emerging as the largest party in Madhya Pradesh and Rajasthan, in state elections that are seen as the dress rehearsal before next year’s national polls. “We accept the people’s mandate with humility,” Prime Minister Narendra Modi tweeted last evening as his party lagged in big states even before all results were in. Telangana, India’s newest state, voted back K Chandrashekar Rao’s TRS and in Mizoram, the Congress was ousted by the tribal Mizo National Front.

  1. The Congress has won 114 seats, two short of the majority mark in the 230-seat assembly. The BJP is not far behind with 109.
  2. Votes were counted overnight in Madhya Pradesh, where the Congress sought an appointment with Governor Anandiben Patel around midnight in a letter mailed and hand-delivered for good measure.
  3. Congress leader Kamal Nath told reporters at 2:45 am that his party “had won an absolute majority”. This morning, the party ended up two seats short, which means it needs help. Kamal Nath had yesterday reached out to Bahujan Samaj Party (BSP) leader Mayawati, who had snubbed the party during pre-poll alliance talks. A leader of Mayawati’s party, Sudhindra Bhadoria, told NDTV yesterday that the party would do all it can to stop the BJP from coming to power.
  4. In Rajasthan, the Congress was at 99 and touched the majority mark of 100 with its ally Ajit Singh; elections were held for 199 of the 200 assembly seats. The BJP has won 73 seats, Mayawati’s party has won six.
  5. In both Rajasthan and Madhya Pradesh, Congress celebrations have been dimmed somewhat by the anticipated power tussle. In Madhya Pradesh, the Congress is believed to be in favour of veteran warhorse Kamal Nath over Jyotiraditya Scindia for the post of chief minister.
  6. In Rajasthan, the decision may not be so simple. The party’s 99 legislators will meet a central party leader today to share their view on who they want as chief minister between state chief Sachin Pilot and two-time chief minister Ashok Gehlot.
  7. The Congress scored its best election results in years on a day it marked a year since Rahul Gandhi’s takeover. The party hopes the state election gains will consolidate its chief’s role in opposition efforts to form a grand alliance to take on PM Modi in next year’s polls. Accusing PM Modi of letting down voters and not delivering on his promises, Rahul Gandhi said last evening, “Mr Modi has taught me what not to do… Arrogance is fatal for a politician”.
  8. The shock defeat for the BJP was in Chhattisgarh, where Raman Singh was considered one of its most popular chief ministers. The Congress has far outstripped the BJP in the Maoist-hit state, winning 65 of the 90 seats and leading in three. The BJP has won 15 seats. The alliance of Ajit Jogi and Mayawati has won seven seats.
  9. K Chandrashekar Rao struck gold in Telangana, winning 88 of the state’s 119 seats. Congratulating him, rival Chandrababu Naidu said, “TDP respects the mandate of the people”. The Congress-TDP alliance won 21 seats.
  10. In the north-eastern state of Mizoram, the Congress was decimated by the regional Mizo National Front, which won 26 of the state’s 40 seats. The Congress won just five seats. The BJP, which aims to rule the whole of the northeast, has won only one seat.

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Madhya Pradesh election results 2018: Shivraj singh chauhan 11 ministers lost election


खास बातें

  1. 114 सीटों के साथ कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी
  2. बहुमत से दो सीट दूर रही गई कांग्रेस
  3. दूसरे नंबर पर रही भाजपा

भोपाल: मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान अपनी सीट बचाने में तो कामयाब रहे, लेकिन उनके 11 मंत्री अपनी सीट भी नहीं बचा पाए. कांग्रेस को 230 सीटों में से 114 पर जीत हासिल हुई है, वहीं दूसरे नंबर पर भाजपा रही जिसके खाते में 109 सीटें आई हैं. इसके अलावा बसपा ने दो, सपा ने एक और अन्य ने चार सीटों पर कब्जा किया है. कांग्रेस बहुमत के आंकड़े से दो सीट दूर रह गई. शिवराज सिंह चौहान ने बुधनी सीट पर कांग्रेस के अरुण सुभाष चंद्र को करीब 59 हजार वोटों से हराया है.

चुनाव आयोग के आंकड़ों के मुताबिक भोपाल दक्षिण-पश्चिम सीट से भाजपा के उमाशंकर गुप्ता कांग्रेस के पीसी शर्मा से 6032 वोटों से हार गए. जबलपुर उत्तर सीट से शरद जैन को कांग्रेस के विनय सक्सेना ने 578 वोटों से रहा दिया. वहीं ग्वालियर सीट से कांग्रेस के प्रधुम्न सिंह तोमर ने भाजपा के मंत्री जयभान पवैया को 11093 वोटों से हराया है. देवास की हाटपीपल्या सीट से भाजपा के मंत्री दीपक जोशी कांग्रेस के मनोज सिंह चौधरी 13519 वोटों से हा गए. इसके अलावा सेंधवा से भाजपा के मंत्री अंतरसिंह आर्य कांग्रेस के ग्यारसीलाल रावत से 17878 वोटों से हार गए.

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बड़ा मलहरा सीट की बात करें तो भाजपा की मंत्री ललिता यादव कांग्रेस के कुंवर प्रद्मुम्न सिंह लोधी से 15779 वोटों से हार गईं. मुरैना से भाजपा के मंत्री रुस्तम सिंह को कांग्रेस प्रत्याशी रघुराज सिंह ने करीब 20 हजार वोट से हरा दिया. डिंडौरी की शहपुरा सीट से भाजपा के मंत्री ओमप्रकाश धुर्वे कांग्रेस के भूपेंद्र मरावी से करीब 34 हजार वोट से हार गए. खरगोन से भाजपा के मंत्री बालकृष्ण पाटीदार करीब दस हजार वोट से कांग्रेस के रवि चंद्र जोशी से हारे हैं. भिंड की गोहद से भाजपा के मंत्री लाल सिंह आर्य कांग्रेस के रणवीर जाटव से 24 हजार वोट से हा गए. बुरहानपुर से भाजपा की मंत्री अर्चना चिटनीस को निर्दलीय ने छह हजार वोट से शिकस्त दी है.

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बता दें, मध्‍यप्रदेश की सभी 230 विधानसभा सीटों के नतीजे आ चुके हैं. बुधवार सुबह चुनाव आयोग ने फाइनल आकड़ें जारी किए हैं. यहां कांग्रेस ने 114 सीटों पर जीत हासिल की है, वहीं भाजपा 109 सीटों पर रह गई. हालांकि, कांग्रेस बहुमत के जादूई आंकड़े 116 से दो सीट दूर रह गई. वहीं दो सीटें बहुजन समाज पार्टी, एक समाजवादी पार्टी और चार निर्दलीय उम्मीदवारों के हिस्से में गई हैं. 

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Congress Writes To Madhya Pradesh Governor, Stakes Claim To Form Government


Congress’ Kamal Nath asked for a meeting with Governor Patel, as soon as the results are declared.

Bhopal/New Delhi: 

Even as results are being counted well past midnight in Madhya Pradesh, the Congress, which is emerging as the single largest party but slightly short of a majority, is not taking any chances. State party chief Kamal Nath late on Tuesday wrote to Governor Anandiben Patel, staking claim to form the government.

Claiming that the Congress has the support of Independent candidates, Mr Nath asked for a meeting with Governor Patel, as soon as the results are declared. Kamal Nath, a master strategist, has already opened talks with Mayawati’s Bahujan Samaj Party (BSP), the Samajwadi Party, Gondwana Gantantra Party and independents.

“The Congress party has emerged as the single largest party with a majority support. All the independents have in addition assured support to the Congress party,” Kamal Nath wrote in his letter.

“As the president of Pradesh Congress Committee, I seek an appointment with your Excellency late tonight, as soon as the results are officially declared along with my senior leaders to apprise you and seek your permission to form government in the state of Madhya Pradesh,” he added.

However, sources in Raj Bhavan, the Governor’s office, have said till the final results are announced, it would be difficult to commit a time for the meeting.

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Results have been declared in 178 of the state’s 230 constituencies and are awaited in 52 others. The Congress has won 88 seats and is leading in 25 others. If it wins all these seats, it will end up with 113 seats, three short of majority. 

Independent candidates have won three seats are leading in one more. If they support the Congress, the party will manage to cross the halfway mark.

The ruling BJP, meanwhile, has bagged 86 seats and is leading in 23 others.

Madhya Pradesh saw a close fight on Tuesday that swung wildly between the Congress and the BJP, whose Shivraj Singh Chouhan was eyeing a record fourth term. 

In 2013 elections, the BJP had won 165 of the 230 seats, followed by the Congress at 58 and Mayawati’s Bahujan Samaj Party (BSP) at 4.

A victory in the state sets the Congress up for a leadership battle between its top 3 in the state — Kamal Nath, Jyotiraditya Scindia and Digvijaya Singh.

So far, the party has been silent on the subject. As the results came in, Mr Scindia drove to Kamal Nath’s house and the leaders arrived together at the party office in Bhopal.

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