Madhya Pradesh: Jyotiraditya Scindia meet Shivraj Singh chauhan in closed room for 45 minutes in Bhopal


भोपाल:

पूर्व केंद्रीय मंत्री और कांग्रेस सांसद ज्योतिरादित्य सिंधिया (Jyotiraditya Scindia) और मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान (Shivraj Singh Chauhan) ने भोपाल में बंद कमरे में मुलाकात की है. सोमवार रात को दोनों करीब 45 मिनट बातचीत की. इस मुलाकात को लेकर राजनीति के गलियारों में चर्चाएं जोरों पर हैं. बैठक पर कई तरह के कयास लगाए जा रहे हैं, हालांकि, दोनों नेताओं ने इस मुलाकात को सौजन्य करार दिया. दरअसल सिंधिया सोमवार की रात दिल्ली से भोपाल पहुंचे. उसके बाद सिंधिया अचानक पूर्व मुख्यमंत्री चौहान के आवास पहुंच गए.

मुलाकात के बाद सिंधिया ने मीडिया से बात करते हुए कहा, ‘हम दोनों के बीच कोई मनमुटाव नहीं है, कोई कड़वाहट नहीं है, मैं ऐसा व्यक्ति नहीं हूं, जो चुनाव के समय की कड़वाहट को लेकर पूरी जिंदगी बिताऊं. जैसा कहा जाता है कि रात गई बात गई. इसलिए आगे की सोचना होगा. मध्य प्रदेश का भविष्य संवारना है, उज्जवल करना है, इसलिए हमें सबको साथ लेकर चलना है, खासकर कांग्रेस की जिम्मेदारी बनती है क्योंकि यह सत्ता में है. चुनाव मैदान में कशमकश होती है, मगर चुनाव के बाद सबको मिलकर साथ काम करना चाहिए.’

मध्य प्रदेश : कमलनाथ के शपथग्रहण में ‘मामा’ शिवराज ने जीता सबका दिल, देखें Video

सिंधिया ने चौहान के साथ हुई बातचीत को अच्छा बताते हुए कहा कि वे हमारे राज्य के मुख्यमंत्री रहे हैं उनसे मिलने आया था, बहुत सारी बातें हुई. सिंधिया से सवाल किया गया कि क्या विपक्ष का कांग्रेस को साथ मिलेगा तो उन्होंने कहा कि, विपक्ष को सदैव अच्छी चीजों का साथ देना चाहिए और कमियों को उजागर करना चाहिए. देश के प्रजातंत्र में विपक्ष की भूमिका भी उतनी ही महत्वपूर्ण होती है जितनी सत्ता पक्ष की होती है. केंद्र में कांग्रेस का महत्वूपर्ण योगदान है, अपेक्षा है कि इसी तरह का राज्य में भाजपा का रहेगा.

CM गहलोत के शपथ ग्रहण में जब सारे मतभेद भूल वसुंधरा ने भतीजे ज्योतिरादित्य को लगाया गले

पूर्व मुख्यमंत्री चौहान ने भी इस मुलाकात को सौजन्य मुलाकात करार दिया है. इससे पहले चौहान का मुख्यमंत्री कमलनाथ के शपथ ग्रहण समारोह में मंच पर जाना और सिंधिया व कमलनाथ द्वारा चौहान का गर्मजोशी से स्वागत खासा चर्चाओं में रहा था. अब यह मुलाकात सियासी गलियारों की चर्चा का विषय बन गई है.

(इनपुट- आईएएनएस)

कमलनाथ के शपथग्रहण समारोह में दिखा दिलचस्प नजारा, देखें VIDEO

VIDEO- बीजेपी नेता की हत्‍या पर बोले शिवराज सिंह चौहान, मन में गुस्सा और दुख है

 



Source link

Bhopal To Become India’s First City To Have A Cow Crematorium


A crematorium called ‘gau mukti dham’ will be built for cows in Bhopal.

Bhopal: 

If a cow dies an “unnatural or untimely death” in Bhopal, its last rites will be performed in an exclusive crematorium, city mayor Alok Sharma has said. This will be first-of-its kind in the country.

“A crematorium called ‘gau mukti dham‘ will be built for cows in Bhopal as soon as the Municipal Corporation gets a plot,” Mr Sharma told news agency ANI.

The mayor added that provision to build a cow crematorium in the Madhya Pradesh capital was introduced last year by the BJP government of Shivraj Singh Chouhan. The BJP lost power in elections last month, and a Congress government took charge.

sdik02sc

City mayor Alok Sharma said a crematorium called ‘gau mukti dham‘ will be built for cows in Bhopal.

“Till the time a cow gives milk, we call it ‘gau mata (mother)’, and when it stops giving milk, we call it a stray. Keeping this in mind, it was added in the last year’s budget that if cows die an unnatural or untimely death due to an accident or a disease, we will cremate them in a gau mukti dham,” he said.

In Delhi and Uttar Pradesh, special shelters are being built to relocate old and stray cattle.





Source link

Video : Shivraj Singh Chouhan and BJP leaders sing Vande Mataram in Bhopal


भोपाल:

मध्य प्रदेश में सामूहिक वंदे मातरम पर लगाई गई अघोषित रोक के बाद सोमवार सुबह भारतीय जनता पार्टी के नेताओं ने पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान  द्वारा की गई पूर्व घोषणा के मुताबिक मंत्रालय के उद्यान में पहुंचकर वंदे मातरम का गान किया. भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष राकेश सिंह, पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान सहित अनेक नेता बड़ी संख्या में मंत्रालय के उद्यान में जमा हुए और सभी ने सामूहिक वंदे मातरम का गान किया.  इस मौके पर शिवराज ने कहा कि प्रदेश सरकार ने वंदे मातरम गान को नए स्वरूप में करने की बात कही है, मगर इसे बंद नहीं किया जाना चाहिए. ज्ञात हो कि राज्य में बीते 13 सालों से माह के पहले कार्य दिवस पर मंत्रालय के उद्यान में सामूहिक वंदे मातरम होते आया है मगर सत्ता परिवर्तन के बाद जनवरी की पहली तारीख को वंदे मातरम नहीं हुआ. इसके चलते भाजपा ने सरकार पर हमला बोला. बाद में मुख्यमंत्री कमलनाथ की सरकार को यू-टर्न लेकर वंदे मातरम को नए स्वरूप में कराने का ऐलान करना पड़ा.  

13 साल पुरानी परंपरा टूटी तो बोले शिवराज: अगर कांग्रेस को राष्ट्रगीत गाने में शर्म आती है तो मैं गाऊंगा वंदे मातरम्

इससे पहले मध्य प्रदेश में सामूहिक ‘वंदे मातरम् गायन’ पर अघोषित तौर पर लगाई गई रोक से विवाद में आई कांग्रेस ने अपने ही तरह से जवाब देने की कोशिश की थी. कांग्रेस के विधानसभा चुनाव में पराजय झेलने वाले उम्मीदवारों की बैठक की शुरुआत ‘वंदे मातरम्’ के गान से हुई. राज्य में नवंबर माह में हुए विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के 115 उम्मीदवारों को हार का सामना करना पड़ा था. हार की क्या वजह रही, पार्टी के नेताओं ने किस तरह का सहयोग या असहयोग किया, इसकी समीक्षा के लिए गुरुवार शाम को पार्टी के प्रदेश दफ्तर में हारे हुए प्रत्याशियों की बैठक बुलाई गई थी. इस बैठक में हार के कारणों की चर्चा हूई. इस बैठक में पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष और मुख्यमंत्री कमलनाथ विशेष तौर पर उपस्थित रहे. बैठक की शुरुआत ‘वंदे मातरम्’ के गान से हुई।. बैठक में ‘वंदे मातरम्’ गाए जाने को वल्लभ भवन के उद्यान में सामूहिक गान न कराए जाने पर उठे विवाद को शांत किए जाने की जुगत के तौर पर देखा जा रहा है.  

मध्य प्रदेश सचिवालय में ‘वंदे मातरम’ न गाने को लेकर भाजपा ने कांग्रेस पर साधा निशाना, कहा… 

आपको बता दें कि राज्य में भाजपा के शासनकाल में साल 2005 में सामूहिक ‘वंदे मातरम्’ की शुरुआत हुई थी. हर माह की पहली तारीख को ‘वंदे मातरम्’ का गान होता आया है, मगर सरकार बदलने के बाद वल्लभ भवन के उद्यान में एक जनवरी को सामूहिक गान नहीं हुआ. इससे सरकार विवादों में घिर गई. सरकार ने ‘वंदे मातरम्’ गान व्यवस्था में बदलाव के साथ जारी रखने की बात कही और अब पार्टी की बैठक भी ‘वंदे मातरम्’ के गान से हुई.  

शिवराज सिंह चौहान ने मंत्रालय के सामने गाया वंदे मातरम​

टिप्पणियां

 

इनपुट : आईएनएस





Source link

Flights Delayed At Delhi, Bengaluru, Bhopal Airports Due To Fog


New Delhi: 

All flights at the Delhi airport are delayed due to bad weather, news agency ANI reported. Flight delays have been reported from Bengaluru and Bhopal as well. 

Thirteen trains headed to Delhi are running late due to thick fog and cold wave in many parts of north India.

Airlines such as Vistara and IndiGo have put out travel advisories asking passengers to check their flight status before heading for the airport. 

Jet Airways said a few of their flights at Delhi, Bengaluru and Bhopal have been affected due to fog. Vistara also said flight delays are expected in Bengaluru and Delhi. 

On Sunday, at least 50 flights scheduled between 6 am to 9 am were delayed due to foggy weather in Bengaluru, leaving passengers stranded for hours.

A Singapore-Bengaluru Indigo flight and a Goa-Bengaluru Air India flight were also diverted to Chennai due to fog at the Bengaluru airport.





Source link

Pakistan National, Imran Warsi, Who Stayed Back For Love, To Go Home After 10 Years In Bhopal Jail


Pakistan national Imran Qureshi Warsi will be sent to Pakistan on December 26 through Wagah border.

New Delhi: 

After spending 10 years in a Bhopal jail, a 40-year-old man from Pakistan will finally be sent back to his home country on December 26, officials said today.

Mohammed Imran Warsi was convicted by a local court in Bhopal and arrested in 2008 on charges of conspiracy, cheating and forging documents, under provisions of the Passport Act and the Official Secrets Act.

His story is similar to that of Mumbai resident Hamid Nihal Ansari who was recently released by Pakistan and sent back to India after he served six years in a jail on espionage charges.

Both had wandered off across the border for love.

Mr Warsi had come to India in 2004 on a 45-day visa to meet his relatives in Kolkata. However, he fell in love with an Indian woman and married her soon after. The couple had two children, even as Mr Warsi’s visa had expired long before.

In 2008, Mr Warsi illegally acquired some official documents and came to Bhopal to get a passport made.

He was arrested by the Bhopal police during this time and presented before a local court, which sentenced him to 10 years in jail and imposed a fine of Rs 8,000 on him.

34873vh

Mr Warsi’s sentence ended in March this year, but he has been forced to live at the Shahjahanabad Police Station since then awaiting completion of legal formalities.

“We have to send Warsi to the Wagah border by December 26 where he will be handed over to Pakistani officials after completion of legal work,” Shahjahanabad City Superintendent of Police Nagendra Kumar Pateriya said.

Office of the District Foreign Registration Officer Dharmveer Yadav has sent a letter and other documents to the Shahjahanabad police station to facilitate the repatriation of Mr Warsi.

Even though he is not under detention, Mr Warsi has been unable to leave the police station, for lack of official documents. Police officials provide him with food and other necessities. He sleeps inside the police station during the night, officials said.

“After falling in love in India, I forgot the date of expiry of my visa,” Mr Warsi told news agency ANI. “The police treated me very well, just like a family. I found loving people here the same way there are loving people in Pakistan. I believe good people find good people everywhere,” he added.

Mr Warsi said after going back to Pakistan, he will take the legal course to get his wife and children shifted to his home country.

Indian national Hamid Ansari was arrested in Pakistan in 2012 and released from jail this month. Mr Ansari spent the last three years in a Peshawar jail after being accused possessing a fake Pakistani identity card. He had entered Pakistan from Afghanistan, reportedly to meet a girl he had befriended online.

(With inputs from agencies)





Source link

Shivraj inquired about poor’s problems by reaching bhopal night house


नई दिल्ली: सोशल मीडिया पर खुद को ‘कॉमन मैन ऑफ द मध्य प्रदेश’ घोषित कर चुके पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान शनिवार देर रात कड़कड़ाती सर्दी में भोपाल की सड़कों पर आम जनता का हालचाल जानने निकल पड़े. इसी दौरान अचानक उन्होंने एक रैन बसेरे की ओर रुख किया और वहां रात गुजार रहे लोगों से कुशलक्षेम पूछी. सूबे के पूर्व मुखिया को इस तरह अपने बीच पाकर वहां आराम कर रहा मजबूर तबके के लोग गदगद हो गए.

रैन बसेरे में ठहरे वृद्धजन ने पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज को बातचीत के दौरान बताया कि उनकी सरकार में दिया गया ठेला उसकी कमाई का जरिया बना हुआ है. वह भोपाल के सात नंबर इलाके में चाय बेचता है. इसको लेकर उसने सीएम को धन्यवाद दिया. वहीं, अपनी शिकायत दर्ज कराते हुए चायवाले ने कहा, ‘मैं बिना मकान के जी रहा हूं. मुझे घर नहीं मिल पाया.’ इस पर शिवराज ने कहा कि संबल योजना इसलिए ही बनाई थी ताकि लोगों को घर मिल सकें. उन्होंने बेघर को आश्वासन दिया कि वह इसके लिए लड़ेंगे.

राज्य में 13 साल का लंबा कार्यकाल बिताने वाले पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान अब खुलकर आम जनता से मेल-मुलाकात कर रहे हैं. अपने मुख्यमंत्रित्व काल में हेलीकॉप्टर और निजी विमान से यात्रा करने वाले शिवराज अब आम जनता के बीच ट्रेन की सवारी कर रहे हैं. गुरुवार को ही उन्होंने भोपाल से बीना तक का सफर रेल में बैठकर किया. इस दौरान लोग पूर्व सीएम के साथ खुद को सेल्फी लेने से नहीं रोक सके.

shivraj
अपनी जिम्मेदारियों से मुक्त होकर मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान आम जनता से खुलकर मेल-मुलाकात कर रहे हैं.

सीएम की कुर्सी गंवाने के बाद बीजेपी विधायक शिवराज सड़क से लेकर सोशल मीडिया तक सक्रिय बने हुए हैं. इसके साथ ही ट्विटर पर उनकी हाजिरजवाबी खूब पसंद की जा रही है. हाल ही में जब पूर्व सीएम के साथ एक ‘भांजे’ ने चाय पीने की फरमाइश कर डाली तो उन्होंने उसका मजेदार अंदाज में जवाब दिया. 

मध्यप्रदेश ने नहीं खोया शिवराज’
मध्य प्रदेश के अलावा देश के दूसरे राज्यों में भी पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ‘मामा’ के नाम से लोकप्रिय हैं. यही वजह है कि ट्विटर और फेसबुक पर उनको लोग किसी न किसी तरीके से याद करते रहते हैं. एमपी में बीजेपी की हार के बाद एक यूजर @niranjanchauh ने ट्वीट किया, “http://zeenews.india.com/”आदरणीय शिवराज सिंह चौहान जी, मैं पटना बिहार का रहनेवाला हूं और सोशल मीडिया ट्वीटर पर पीछले तीन साल से जुडा़ हूं लेकिन इन तीन सालों में पहली बार किसी के हार के बावजूद विरोधी भी इतनी प्रशंसा कर रहे हैं तो वो आप हैं. आपमें अटल जी की जैसी विनम्रता झलकती है. सचमुच MP ने शिवराज को खो दिया.”http://zeenews.india.com/” इसके रिप्लाई में ‘मामाजी’ लिखते हैं, “http://zeenews.india.com/”ना मध्यप्रदेश ने शिवराज खोया है, और ना मैंने मध्यप्रदेश. मैं तो सिर्फ़ मध्यप्रदेश का हूं और मध्यप्रदेश मेरा.”http://zeenews.india.com/”

shivraj

बन गए ‘द कॉमन मैन ऑफ मध्य प्रदेश’
मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सरकार जाने के बाद से दो बार अपना ट्विटर प्रोफाइल बदला है. उन्होंने ट्विटर पर खुद को ‘द कॉमन मैन ऑफ मध्य प्रदेश’ (मध्य प्रदेश का आम आदमी) बताया है. इससे पहले इस्तीफा देने के तुरंत बाद शिवराज ने अपने ट्विटर प्रोफाइल पर लिखा था, ‘एक्स चीफ मिनिस्टर ऑफ मध्य प्रदेश, इंडिया’ लेकिन कुछ ही घंटों के बाद उन्होंने इसे बदल दिया.

http://zeenews.india.com/

एक पूर्व मुख्यमंत्री के द्वारा खुद को राज्य का एक आम आदमी लिखना सोशल मीडिया यूजर्स को काफी भा रहा है. यूजर्स शिवराज के प्रोफाइल का स्क्रीनशॉट लेकर काफी वाहवाही कर रहे हैं. लगातार एक के बाद ट्वीट करके शिवराज जता रहे हैं कि वह विपक्ष में रहकर पार्टी के लिए जमीनी स्तर पर काम करते रहेंगे.





Source link

Madhya Pradesh Assembly : Surprising election results may come in the seats of capital Bhopal


नई दिल्ली: मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल की सीटों पर इस बार का विधानसभा चुनाव काफी फेरबदल करा सकता है. बीजेपी का गढ़ बन चुकीं छह सीटों पर जहां कांग्रेस ने इस बार जोर लगाया वहीं आम आदमी पार्टी ने भी दम लगाया है. इसके अलावा सपा, बसपा समेत कई छोटे दल चुनाव में जोरआजमाइश कर चुके हैं. बीजेपी हो या कांग्रेस, इस बार इन दोनों प्रमुख दलों के लिए बागी प्रत्याशी भी परेशानी का कारण बने रहे हैं. मंगलवार को मतगणना के साथ परिणाम सामने आएंगे और तय हो जाएगा कि राजधानी के मतदाताओं की क्या पसंद रही.   

भोपाल जिले में कुल सात विधानसभा क्षेत्र हैं  बैरसिया, भोपाल उत्‍तर, भोपाल दक्षिण-पश्चिम, भोपाल मध्‍य, हुजूर, नरेला एवं गोविन्‍दपुरा. फिलहाल इनमें से छह पर बीजेपी का और एक पर कांग्रेस का कब्जा है. छह सीटें भोपाल शहर की हैं जबकि एक सीट बैरसिया ग्रामीण क्षेत्र की है.  

भोपाल उत्तर : कांग्रेस में राजधानी की इकलौती सीट बचाने की चुनौती

भोपाल उत्तर विधानसभा सीट पर कांग्रेस के आरिफ अकील एक बार फिर भाग्य आजमा रहे हैं. इस बार उन्हें बीजेपी की फातिमा रसूल सिद्दीकी ने टक्कर दी है. आरिफ अकील सन 1998 से लगातार इस क्षेत्र के विधायक हैं. बीजेपी ने इकलौती मुस्लिम महिला प्रत्याशी को इस सीट पर टिकट दिया. आरिफ अकील के लिए इस बार का चुनाव खासी मशक्कत वाला रहा.

भोपाल उत्तर सीट पर पर कुल 9 प्रत्याशी चुनाव लड़े हैं. कांग्रेस से आरिफ अकील, बीजेपी से फातिमा रसूल सिद्दीकी के अलावा आम आदमी पार्टी से मुन्ना सिंह चौहान, बीएसपी से प्रकाश और राष्ट्रीय लोक समता पार्टी से योगेंद्र कैलाशिया चुनाव लड़े. चार निर्दलीय उम्मीदवार भी मैदान में थे.

फातिमा कहती हैं कि वे अपने पिता की हार का बदला लेने के लिए कांग्रेस के आरिफ अकील के खिलाफ मैदान में उतरीं. सन 1980 और 1985 में उनके पिता कांग्रेस के रसूल अहमद विधानसभा चुनाव जीते थे. साल 1990 में हुए चुनाव में कांग्रेस को हार का सामना करना पड़ा और निर्दलीय उम्मीदवार आरिफ अकील जीत गए. सन 1977 में अस्तित्व में आई इस सीट पर पहली बार जनता पार्टी के हामिद कुर जीते थे. इसके बाद  इस सीट पर बीजेपी को सन 1993 में कामयाबी मिली और रमेश शर्मा यहां से जीते. इलाके में मुस्लिम वोटरों के दबदबे वाली इस सीट पर बीजेपी ने मुस्लिम प्रत्याशी का दांव खेला है.

आरिफ अकील के लिए इस बार यह चुनाव कड़ी चुनौती के रूप में सामने आया जबकि बीजेपी इस सीट पर नई उम्मीद तलाश रही है.

यह भी पढ़ें : EVM से छेड़छाड़ का डर, कांग्रेस नेताओं ने भोपाल में स्ट्रांग रूम के बाहर लगाया टेंट, कर रहे रतजगा

नरेला में बड़ी संख्या में प्रत्याशी, बंट सकते हैं वोट

भोपाल की नरेला विधानसभा सीट पर बीजेपी के मौजूदा विधायक और मंत्री विश्वास सारंग एक बार फिर चुनाव लड़े हैं. कांग्रेस ने महेंद्र सिंह चौहान से उनका मुकाबला हुआ. महेन्द्र सिंह वर्ष 2013 में हुए विधानसभा चुनाव में मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के खिलाफ सीहोर की बुधनी सीट से मैदान में थे और बड़े अंतर से हार गए थे.

नरेला में कुल 28 उम्मीदवार चुनाव लड़े हैं. बीजेपी के विश्वास सारंग, कांग्रेस के डॉ महेंद्र सिंह चौहान, सपाक्स के कर्नल केसरी सिंह, बीएसपी से मेहरबान सिंह तितोरिया, समाजवादी पार्टी के विपिन कुमार यादव और शेष छोटी पार्टियों के व निर्दलीय प्रत्याशी हैं. खास बात यह है कि महेंद्र नाम के तीन प्रत्याशी हैं.

मध्यप्रदेश की नरेला विधानसभा सीट पर अब तक दो बार चुनाव हुए हैं. यह सीट साल 2008 में अस्तित्व में आई. दोनों ही बार बीजेपी को जीत मिली है. कांग्रेस का खाता इस सीट पर अब तक नहीं खुला है. विश्वास सारंग ने साल 2013 के चुनाव में कांग्रेस के उम्मीदवार सुनील सूद को 26 हजार से ज्यादा वोटों से हराया था. सारंग शिवराज सरकार में राज्यमंत्री हैं. इससे पहले 2008 के चुनाव में भी यहां पर बीजेपी को ही जीत मिली थी. तब भी विश्वास सारंग ने कांग्रेस के सुनील सूद को हराया था. तब सुनील सूद को 53802 वोट और सारंग को 57075 वोट मिले थे.

दावा किया जा रहा है नरेला में सारंग ने विकास के कई काम किए. उन्होंने यहां पर कई फ्लाईओवर बनवाए जिसका फायदा उन्हें मिला है. सारंग सिविल इंजीनियर हैं. इस बार इस सीट पर आम आदमी पार्टी का भी  उम्मीदवार है. आप से रिहान जाफरी चुनाव लड़े हैं. यानी कि बीजेपी का मुकाबला सिर्फ कांग्रेस से ही नहीं आम आदमी पार्टी से भी था.

यह भी पढ़ें : चुनाव आयोग ने माना, भोपाल के जिस स्ट्रांग रूम में मतदान के बाद रखी गई थीं ईवीएम मशीनें, वहां बंद हो गए थे सीसीटीवी कैमरे

गोविंदपुरा में बहू के सामने ससुर की 44 साल पुरानी सीट बचाने की चुनौती  

गोविंदपुरा विधानसभा सीट से बीजेपी की ओर से कृष्णा गौर ने चुनाव लड़ा. कांग्रेस से गिरीश शर्मा मैदान में हैं.  गोविंदपुरा विधानसभा सीट बीजेपी के दिग्गज नेता, पूर्व मुख्यमंत्री और कृष्णा गौर के ससुर बाबूलाल गौर की पारंपरिक सीट रही है.  

गोविंदपुरा में 17 प्रत्याशी चुनाव लड़े हैं. बीजेपी से कृष्णा गौर, कांग्रेस से गिरीश शर्मा, बीएसपी से बाबूलाल वाल्मीकि, आप से मनोज कुमार पाल, सपाक्स से शैलेंद्र व्यास और बाकी छोटे दलों के व निर्दलीय उम्मीदवार हैं.

88 साल के बाबूलाल गौर भोपाल के गोविंदपुरा क्षेत्र से अब तक विधायक हैं. उन्होंने इस बार भी टिकट की दावेदारी की थी लेकिन पार्टी ने उनकी जगह उनकी बहू को टिकट दिया. बाबूलाल गौर पिछले 44 साल से इस सीट से विधायक हैं. वे रिकॉर्ड दस बार यहां से चुनाव जीत चुके हैं. गोविंदपुरा सीट पर बाबूलाल गौर पहली बार 1974 में निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में मैदान में उतरे थे और जीते थे.

इस सीट पर 1967 में पहली बार चुनाव हुआ था. यहां अब तक 11 विधानसभा चुनाव हुए हैं. इनमें कांग्रेस दो बार, बीजेपी आठ बार और अन्य एक बार विजयी रहे. 2013 के चुनाव में गौर ने कांग्रेस के गोविंद गोयल को हराया था. 2013 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी को 64.34 प्रतिशत और कांग्रेस को 25.35 प्रतिशत मत मिले थे.

यह भी पढ़ें : मध्य प्रदेश में क्या बीजेपी की इकलौती मुस्लिम प्रत्याशी ले पाएंगी पिता की हार का बदला ?

भोपाल मध्य में पुराने प्रतिद्वंदियों के बीच मुकाबला

मध्य विधानसभा क्षेत्र से बीजेपी के सुरेंद्रनाथ सिंह चुनावी रणभूमि में उतरे. कांग्रेस ने इस सीट पर आरिफ मसूद को फिर मौका दिया. भोपाल मध्य में कांग्रेस से आरिफ मसूद, बीजेपी से सुरेंद्रनाथ सिंह, आप से फराज खान, बीएसपी से गोकुल शाक्य, सीपीआई से फिदा हुसैन, सपाक्स से पीके मंजूरे, सपा से जितेंद्र कुमार साहू ने चुनाव लड़ा.

भोपाल मध्य विधानसभा क्षेत्र से 2013 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी के सुरेंद्र नाथ सिंह जीते थे. उन्होंने कांग्रेस के आरिफ मसूद को हराया था. साल 2008 के चुनाव में बीजेपी के ध्रुवनारायण सिंह ने कांग्रेस के नासिर इस्लाम को चुनावी मैदान में मात दी थी. 2013 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी के सुरेंद्र नाथ सिंह को 70696 वोट और कांग्रेस के आरिफ मसूद को 63715 वोट मिले थे. सन 2008 के चुनाव में बीजेपी के ध्रुवनारायण सिंह को 50061 और कांग्रेस के सुनील सूद को 47542 वोट हासिल हुए थे.

2013 के विधानसभा चुनाव में कुल 230 विधानसभा सीटों में से बीजेपी ने 165 सीटें जीतकर सरकार बनाई थी. वहीं कांग्रेस 58 सीटों पर ही जीत हासिल कर पाई थी. बसपा ने 4 और अन्य ने 3 सीटों पर जीत दर्ज कराई थी

भोपाल दक्षिण-पश्चिम में ‘आप’ बिगाड़ सकती है खेल

भोपाल दक्षिण-पश्चिम विधानसभा क्षेत्र में कांग्रेस के पीसी शर्मा का मुकाबला फिर बीजेपी के उमाशंकर गुप्ता से हुआ लेकिन इस बार आम आदमी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष आलोक अग्रवाल भी चुनाव लड़े जो कि इस सीट के परिणाम को प्रभावित करेंगे.

पीसी शर्मा की बड़े वोट बैंक पर अच्छी पकड़ है जिससे उमाशंकर गुप्ता के सामने काफी मुश्किल पैदा हुई. भोपाल दक्षिण-पश्चिम में नौ प्रत्याशी हैं. बीजेपी से उमाशंकर गुप्ता,  कांग्रेस से पीसी शर्मा, आम आदमी पार्टी से आलोक अग्रवाल, बीएसपी से रणधीर भोजाने चुनाव लड़े.

दक्षिण-पश्चिम विधानसभा सीट राज्य की हाई प्रोफाइल सीटों में से एक है. यहां के विधायक उमाशंकर गुप्ता शिवराज कैबिनेट में मंत्री हैं. इस सीट पर ज्यादातर बीजेपी का ही कब्जा रहा है. परिसीमन से पहले साल 1998 में कांग्रेस के पीसी शर्मा ने यहां चुनाव जीता था. उसके बाद से इस सीट पर बीजेपी ने ही जीत हासिल की है.

सन 2013 के चुनाव में बीजेपी के उमाशंकर गुप्ता ने कांग्रेस के संजीव सक्सेना को 18 हजार से ज्यादा वोटों से हराया था. उमाशंकर गुप्ता को इस चुनाव में 71167 वोट मिले थे. कांग्रेस के संजीव सक्सेना को 52969 वोट मिले थे. इससे पहले 2008 के चुनाव में भी गुप्ता ने जीत हासिल की थी. इस बार भी उन्होंने कांग्रेस के संजीव सक्सेना को हराया था. तब गुप्ता ने 26 हजार से ज्यादा वोटों से सक्सेना को हराया था.

भोपाल-हुजूर पर बीजेपी के सामने कब्जा बरकरार रखने की चुनौती

हुजूर विधानसभा क्षेत्र से बीजेपी के रामेश्वर शर्मा और कांग्रेस के नरेश ज्ञानचंदानी ने चुनाव लड़ा है. हुजूर सीट पर 12 उम्मीदवार हैं जिनमें सपाक्स से डॉ संभव कुमार जैन, गोंडवाना गणतंत्र पार्टी से राधा, बीएसपी से डीके सिरसवाल शामिल हैं.

इस सीट पर बीजेपी के बागियों ने पार्टी के सामने मुश्किल खड़ी की. सन 2008 में इस सीट से चुने गए बीजेपी के जितेंद्र डागा 2013 में टिकट कटने के बाद शांत रहे. इस बार उनको उम्मीद थी कि उन्हें मौका मिलेगा. लेकिन रामेश्वर शर्मा को फिर से टिकट मिलने से नाराजगी के बाद निर्दलीय नामांकन जमा कर दिया. हालांकि बाद में उन्हें मना लिया गया और उन्होंने नाम वापस ले लिया.

साल 2013 के चुनाव में रामेश्वर शर्मा ने 59 हजार से ज्यादा वोटों के अंतर से जीत दर्ज की. कांग्रेस के राजेंद्र मंडलोई को 49390 वोट मिले थे और रामेश्वर शर्मा को 108994 वोट मिले थे. साल 2008 के चुनाव में बीजेपी के जितेंद्र डागा ने कांग्रेस के भगवान दास साबनानी को 16 हजार से ज्यादा वोटों से हराया था. इस चुनाव में जितेंद्र डागा को 40241 वोट मिले थे तो वहीं भगवान दास साबनानी को 23261 वोट मिले थे.

हुजूर सीट पर 2008  से बीजेपी का कब्जा है. रामेश्वर शर्मा यहां के विधायक हैं. हुजूर पहले गोविंदपुरा विधानसभा का हिस्सा थी. हुजूर विधानसभा सीट भोपाल का सबसे बिखरा हुआ इलाका है. शहर का हर बाहरी क्षेत्र इस विधानसभा में आता है. विधानसभा क्षेत्र मुख्य रूप से तीन हिस्सों में बंटा हुआ है जिस वजह से तीनों इलाकों की समस्याएं अलग-अलग हैं.

बैरसिया में बगावत का झंडा

भोपाल जिले की बैरसिया विधानसभा सीट पर सात प्रत्याशी चुनाव लड़े हैं. कांग्रेस से जयश्री, बीजेपी से विष्णु खत्री, आप से शिवनारायण,  बीएसपी से अनीता अहिरवार, राष्ट्रीय लेक समता पार्टी से तोरण सिंह अहिरवार मैदान में हैं.

बीजेपी के विष्णु खत्री बैरसिया से मौजूदा विधायक हैं. उन्हें बीजेपी के बागी ब्रह्मानंद रत्नाकर का भी मुकाबला करना पड़ा है. बीजेपी के विष्णु खत्री 2013 में बैरसिया से चुनाव जीतकर विधायक बने थे. ब्रह्मानंद रत्नाकर ने साल 2008 में कांग्रेस के हीरालाल को इसी सीट पर 23 हजार वोट से हराया था. बैरसिया बीजेपी का किला माना जाता है. कांग्रेस महज दो बार 1957 और 1998 में इस सीट पर काबिज हो पाई है.

बैरसिया सीट पर साल 2013 के विधानसभा चुनाव में विष्णु खत्री (बीजेपी) ने 76657 वोट हासिल कर जीत दर्ज की थी. उन्होंने अपने प्रतिद्वंदी को 29304 मतों के अंतर से हराया था. कांग्रेस के महेश रत्नाकर को  47353 वोट मिले थे.

VIDEO : बीजेपी की इकलौती महिला उम्मीदवार

मध्यप्रदेश में कुल 231 विधानसभा सीटें हैं. इनमें से 230 सीटों पर चुनाव होते हैं जबकि एक सदस्य को मनोनीत किया जाता है. साल 2013 के चुनाव में बीजेपी को 165, कांग्रेस को 58, बसपा को चार और अन्य को तीन सीटें मिली थीं.



Source link

Madhya Pradesh: Congress Alleges Tampering With EVM Machines, Placed Tent Outside Strong Room in Bhopal


भोपाल: मध्य प्रदेश में मतदान के बाद से ही भाजपा और कांग्रेस आमने-सामने हैं. एक तरफ कांग्रेस सरकार और मशीनरी पर ईवीएम से छेड़छाड़ का आरोप लगा रही है. तो दूसरी भाजपा ने कांग्रेस पर तंज कसते हुए कहा कि हार से डरकर ईवीएम में गड़बड़ी का सहारा ले रही है. सागर व अनूपपुर में मतदान के बाद देरी से ईवीएम मशीनों के पहुंचने और भोपाल में स्ट्रांग रूम की बिजली जाने की वजह से सीसीटीवी कैमरों के ठप पड़ने की खबर के बाद अब कांग्रेस नेताओं ने स्ट्रांग रूम के बाहर डेरा डाल दिया है. टेंट लगाकर स्ट्रांग रूम के बाहर डटे हैं और रतजगा कर रहे हैं. कांग्रेस नेता अरुण यादव भोपाल की पुरानी जेल में बनाए गए स्ट्रांग रूम का जायजा लिया और पूर्व केंद्रीय मंत्री सुरेश पचौरी भी स्ट्रांग रूम पहुंचे. दूसरी तरफ, बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष राकेश सिंह ने कहा कि विधानसभा चुनावों में कांग्रेस को पूरी तरह हार नजर आ रही है, जिसके चलते वह तरह-तरह के आरोप लगा रही है. उन्होंने कहा कि नतीजे आने से पहले ही कांग्रेस ने अपनी हार के लिए ईवीएम पर छेड़छाड़ का सहारा ले लिया है. 

चुनाव आयोग ने माना, भोपाल के जिस स्ट्रांग रूम में मतदान के बाद रखी गई थीं ईवीएम मशीनें, वहां बंद हो गए थे सीसीटीवी कैमरे


आपको बता दें कि चुनाव आयोग ने एक दिन पहले ही स्वीकार किया था कि भोपाल के जिस स्ट्रांग रूम में मतदान समाप्त होने के बाद ईवीएम मशीनें रखी गई थीं वहां अचानक बिजली जाने की वजह से सीसीटीवी कैमरे करीब 1 घंटे तक बंद रहे. इसकी वजह से सब कुछ ठप पड़ गया. आयोग ने यह भी कहा है कि सागर में मतदान समाप्त होने के 2 दिनों बाद ईवीएम मशीनों को जमा करने के मामले में एक अधिकारी पर कार्रवाई की गई है. आपको बता दें कि भोपाल और सागर का मामला सामने आने के बाद से ही विपक्षी दल ईवीएम मशीनों के साथ छेड़छाड़ का आरोप लगा रहे हैं. चुनाव आयोग के बयान के मुताबिक ”भोपाल के कलेक्टर की रिपोर्ट के अनुसार 30 नवंबर को बिजली कटने की वजह से स्ट्रांग रूम के बाहर लगे सीसीटीवी कैमरे और एलईडी डिस्पले सुबह 8:19 से 9:35 तक बंद रहे. इसकी वजह से रिकॉर्डिंग नहीं हो पाई. बाद में एक अतिरिक्त एलईडी स्क्रीन, इनवर्टर और जेनरेटर की व्यवस्था की गई”. (इनपुट- IANS से भी)

मध्य प्रदेश : मतदान के 48 घंटे बाद पहुंचीं ईवीएम मशीनें, कांग्रेस ने लगाया धांधली का आरोप 

टिप्पणियां


VIDEO- मध्य प्रदेशः मतदान के दौरान खराब हुईं ईवीएम, सिंधिया ने की शिकायत



Source link

ASHA worker fall from Tower near Shivraj Singh Chouhan house in Bhopal


zeenews.india.com understands that your privacy is important to you and we are committed for being transparent about the technologies we use.  This cookie policy explains how and why cookies and other similar technologies may be stored on and accessed from your device when you use or visit zeenews.india.com websites that posts a link to this Policy (collectively, “the sites”). This cookie policy should be read together with our Privacy Policy.

By continuing to browse or use our sites, you agree that we can store and access cookies and other tracking technologies as described in this policy.

What are Cookies and Other Tracking Technologies?

A cookie is a small text file that can be stored on and accessed from your device when you visit one of our sites, to the extent you agree.  The other tracking technologies work similarly to cookies and place small data files on your devices or monitor your website activity to enable us to collect information about how you use our sites. This allows our sites to recognize your device from those of other users on our sites. The information provided below about cookies also applies to these other tracking technologies.


How do our sites use Cookies and Other Tracking Technologies?

Zeenews.com use cookies and other technologies to store information in your web browser or on your mobile phone, tablet, computer, or other devices (collectively “devices”) that allow us to store and receive certain pieces of information whenever you use or interact with our zeenews.india.com applications and sites. Such cookies and other technologies helps us to identify you and your interests, to remember your preferences and to track use of zeenews.india.com We also use cookies and other tracking technologies to control access to certain content on our sites, protect the sites, and to process any requests that you make to us.
We also use cookies to administer our sites and for research purposes, zeenews.india.com also has contracted with third-party service providers to track and analyse statistical usage and volume information from our site users. These third-party service providers use persistent Cookies to help us improve user experience, manage our site content, and analyse how users navigate and utilize the sites.

First and Third-party Cookies

First party cookies

These are those cookies that belong to us and which we place on your device or are those set by a website that is being visited by the user at the time (e.g., cookies placed by zeenews.india.com)

Third-party cookies

Some features used on this website may involve a cookie being sent to your computer by a third party. For example, if you view or listen to any embedded audio or video content you may be sent cookies from the site where the embedded content is hosted. Likewise, if you share any content on this website through social networks (for example by clicking a Facebook “like” button or a “Tweet” button) you may be sent cookies from these websites. We do not control the setting of these cookies so please check the websites of these third parties for more information about their cookies and how to manage them.

Persistent Cookies
We use persistent cookies to improve your experience of using the sites. This includes recording your acceptance of our cookie policy to remove the cookie message which first appears when you visit our site.
Session Cookies 
Session cookies are temporary and deleted from your machine when your web browser closes. We use session cookies to help us track internet usage as described above.
You may refuse to accept browser Cookies by activating the appropriate setting on your browser. However, if you select this setting you may be unable to access certain parts of the sites. Unless you have adjusted your browser setting so that it will refuse cookies, our system will check if cookies can be captured when you direct your browser to our sites.
The data collected by the sites and/or through Cookies that may be placed on your computer will not be kept for longer than is necessary to fulfil the purposes mentioned above. In any event, such information will be kept in our database until we get explicit consent from you to remove all the stored cookies.

We categorize cookies as follows:

Essential Cookies

These cookie are essential to our site in order to enable you to move around it and to use its features. Without these essential cookies we may not be able to provide certain services or features and our site will not perform as smoothly for you as we would like. These cookies, for example, let us recognize that you have created an account and have logged in/out to access site content. They also include Cookies that enable us to remember your previous actions within the same browsing session and secure our sites.

Analytical/Performance Cookies

These cookies are used by us or by our third-party service providers to analyse how the sites are used and how they are performing. For example, these cookies track what content are most frequently visited, your viewing history and from what locations our visitors come from. If you subscribe to a newsletter or otherwise register with the Sites, these cookies may be correlated to you.

Functionality Cookies

These cookies let us operate the sites in accordance with the choices you make. These cookies permit us to “remember you” in-between visits. For instance, we will recognize your user name and remember how you customized the sites and services, for example by adjusting text size, fonts, languages and other parts of web pages that are alterable, and provide you with the same customizations during future visits.

Advertising Cookies

These cookies collect information about your activities on our sites as well as other sites to provide you targeted advertising. We may also allow our third-party service providers to use cookies on the sites for the same purposes identified above, including collecting information about your online activities over time and across different websites. The third-party service providers that generate these cookies, such as, social media platforms, have their own privacy policies, and may use their cookies to target advertisement to you on other websites, based on your visit to our sites.

How do I refuse or withdraw my consent to the use of Cookies?

If you do not want cookies to be dropped on your device, you can adjust the setting of your Internet browser to reject the setting of all or some cookies and to alert you when a cookie is placed on your device. For further information about how to do so, please refer to your browser ‘help’ / ‘tool’ or ‘edit’ section for cookie settings w.r.t your browser that may be Google Chrome, Safari, Mozilla Firefox etc.
Please note that if your browser setting is already setup to block all cookies (including strictly necessary Cookies) you may not be able to access or use all or parts or functionalities of our sites.
If you want to remove previously-stored cookies, you can manually delete the cookies at any time from your browser settings. However, this will not prevent the sites from placing further cookies on your device unless and until you adjust your Internet browser setting as described above.
For more information on the development of user-profiles and the use of targeting/advertising Cookies, please see www.youronlinechoices.eu if you are located in Europe or www.aboutads.info/choices if in the United States.

Contact us

If you have any other questions about our Cookie Policy, please contact us at:
If you require any information or clarification regarding the use of your personal information or this privacy policy or grievances with respect to use of your personal information, please email us at [email protected]





Source link

Asha Worker Climbs Tower During Protest In Bhopal, Falls With A Thud


Two policewomen who tried to bring her down also fell off the tower.

Bhopal: 

An Asha (Accredited Social Health Activist) worker got injured after she fell off a mobile tower in Bhopal during a protest to demand regularisation of pay. The police were trying to bring her down from the mobile tower, barely 200 metres from Chief Minister Shivraj Singh Chouhan’s home, when two policewomen also got injured.

Around 3,000 Asha and Usha (Urban Social Health Activist) workers from across the state have been protesting outside Madhya Pradesh Chief Minister Shivraj Singh Chouhan’s home since Tuesday.

Congress leader Shobha Ojha attacked the chief minister over the protest and said that these women have been camping outside his home for more than 24 hours but “he doesn’t even have five minutes to listen to their demands”.

But BJP spokesperson Rahul Kothari claimed that their salaries were doubled about a week ago.

At around 3 pm, one of the protesters climbed the mobile tower. Three policewomen followed her to bring her down. After arguing at a height of around 30 feet, the cops reportedly tried to drag her down during which Reena, the protester, along with two constables lost balance and fell off the tower. All three got injured and taken to the hospital.

The protesting women are demanding an increase in minimum salaries, fixed salaries and travel allowance. The association alleged that they had been making these demands for too long, but all their pleas have fallen on deaf ears. So they headed towards the chief minister’s residence in Shyamala Hills, but were stopped near the Polytechnic Square by the police.

The women then sat in the middle of the road and raised slogans against the chief minister.

Asha workers assist in childbirth, provide first aid, help with vaccinations and educate communities on birth control measures and issues of sanitation as part of the National Rural Health Mission (NRHM)  introduced in 2005, which envisaged planting at least one Asha worker in every village by 2012. Each ASHA worker is meant to handle 1,000 people. 

For every childbirth they are paid Rs 300 and an additional Rs 250 for a week of follow-up visits and the delivery report. But this is only if the woman is a BPL card holder (below poverty line). For collecting samples for various tests, we get Rs 15. Our income depends entirely on the number of cases we handle. So when there are fewer cases, we barely earn anything.

Asha workers in Gujarat have also been demanding fixed wages, permanent employment with regularised working hours and social security benefits like maternity leave and health insurance.





Source link