Ashok Chawla resigns from NSE chairman post over Aircel-Maxis charges


नई दिल्ली:

नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) के चेयरमैन अशोक चावला ने तत्काल प्रभाव से अपने पद से इस्तीफा दे दिया है. इससे कुछ घंटे पहले ही केंद्र की ओर से सीबीआई को एयरसेल-मैक्सिस मामले में चावला के खिलाफ अभियोजन की कार्रवाई शुरू करने की अनुमति मिली थी. इसके तुरंत बाद चावला ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया. हालांकि, एक्सचेंज ने शुक्रवार रात को इस बारे में घोषणा करते हुये कोई विशेष ब्योरा नहीं दिया. भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) एनएसई की को-लोकेशन सुविधा में कथित खामियों की जांच कर रहा है. नियामक यह भी पता लगा रहा है कि क्या कुछ ब्रोकरों को एक्सचेंज द्वारा इस तीव्र फ्रिक्वेंसी कारोबार सुविधा में किसी तरह की अनुचित पहुंच उपलब्ध कराई गई.

एयरसेल मैक्सिस केस में पी चिदंबरम को फिर मिली राहत, पटियाला कोर्ट ने दी गिरफ्तारी से छूट

एक्सचेंज ने एक बयान में कहा कि हालिया कानूनी घटनाक्रमों के मद्देनजर चावला ने नेशनल स्टॉक एक्सचेंज आफ इंडिया लिमिटेड के निदेशक मंडल के लोक हित निदेशक-चेयरमैन के तौर पर तत्काल प्रभाव से इस्तीफा दे दिया है. पूर्व वित्त सचिव चावला 28 मार्च, 2016 को एनएसई के चेयरमैन बने थे. वह नागर विमानन सचिव और भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (सीसीआई) के चेयरमैन भी रह चुके हैं. चावला ने पिछले साल नवंबर में यस बैंक के चेयरमैन पद से इस्तीफा दिया था. इससे पहले सीबीआई ने दिल्ली की एक अदालत को बताया कि केंद्र ने पांच लोगों के खिलाफ अभियोजन की अनुमति दे दी है. इनमें मौजूदा और पूर्व अधिकारी हैं. ये लोग कांग्रेस नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री पी चिदंबरम और उनके पुत्र कार्ति से संबंधित एयरसेल मैक्सिस मामले में आरोपी हैं. 

एयरसेल-मैक्सिस मामले की जांच कर रहे सीबीआई अधिकारी का कार्यकाल बढ़ा 

टिप्पणियां

उस समय विदेशी निवेश संवर्द्धन बोर्ड (एफआईपीबी) के सदस्य जिनके खिलाफ अभियोजन की अनुमति मिली है उनमें तत्कालीन आर्थिक मामलों के सचिव अशोक झा, तत्कालीन संयुक्त सचिव अशोक चावला, वित्त मंत्रालय में तत्कालीन सचिव कुमार संजय कृष्ण और मंत्रालय में तत्कालीन निदेशक दीपक कुमार सिंह और मंत्रालय में तत्कालीन अवर सचिव राम शरण शामिल हैं. इन पांच में से तीन विभिन्न सरकारी विभागों में कार्यरत हैं जबकि दो सेवानिवृत्त हो चुके हैं. इनमें से तीन विभिन्न सरकारी विभागों में कार्यरत हैं जबकि दो सेवानिवृत हो चुके हैं.

Video: आरोप लगाने वालों को माफ करे ईश्वर : चिदंबरम



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National Stock Exchange Chairman Ashok Chawla, Named In Aircel-Maxis Case, Resigns


Ashok Chawla recently stepped down from the post of non-executive Chairman of Yes Bank.

New Delhi: 

National Stock Exchange (NSE) Chairman Ashok Chawla on Friday resigned from his post with immediate effect citing legal developments.

Mr Chawla is named, along with other bureaucrats and former Finance Minister P Chidambaram, in the Aircel-Maxis bribery case being probed by the Central Bureau of Investigation or CBI.

“Ashok Chawla has resigned as Public Interest Director/Chairman of the Board of Directors of the National Stock Exchange of India Ltd (NSE) with immediate effect in the light of recent legal developments,” the NSE said in a statement.

The CBI had filed its charge-sheet last July but had been waiting for the government’s nod to start prosecution against the bureaucrats. The Ministry of Finance had given its approval to act against Mr Chidambaram but similar permission was needed for the bureaucrats as well.

The CBI court had asked the investigation agency to procure the permission from the Finance Ministry by Friday.

Mr Chawla, who had been the Chairman of the country’s largest bourse since 2016, recently stepped down from the post of non-executive Chairman of Yes Bank citing personal reasons.

In July 2018, the CBI listed Mr Chidambaram as an accused in the Aircel-Maxis case, alleging that he had power to approve foreign investments only up to Rs 600 crore but had cleared Rs 3,200-crore investment without referring the matter to the Cabinet Committee on Economic Affairs.

The CBI had filed the charge-sheet against Mr Chidambaram, his son Karti Chidambaram and 16 others including former Union Secretary for Economic Affairs Ashok Kumar Jha, then Additional Secretary Ashok Chawla, two serving IAS officers — Joint Secretary Kumar Sanjay Krishna and Director Deepak Kumar Singh, and Under Secretary Ram Sharan.





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After Loan Waiver, Ashok Gehlot Announces More Sops For Rajasthan Farmers


Ashok Gehlot also announced pension for small and marginal farmers. (File)

Jaipur: 

Soon after the loan waiver, more sops are coming for farmers in Rajasthan. Chief Minister Ashok Gehlot on Wednesday said power tariff for them will remain stable for the next five years.

He also announced pension for small and marginal farmers.

Addressing a farmers’ rally in the state capital, in the presence of Congress President Rahul Gandhi, Mr Gehlot also promised to set up a farmers commission soon to redress their grievances at the earliest.

The Chief Minister said the government will provide one lakh power connections to farmers by June this year, adding the government will help set up food processing units on agricultural land, and that there will be no need of land conversion of plots up to 10 hectares. The state government will also help arrange loans for the project, he said.

“We want to build strong ties with farmers. We will take more initiatives depending on the feedback we receive from them,” he added.

“As mentioned in the manifesto, pensions will soon be given to small and marginal farmers,” Mr Gehlot said.

The Chief Minister accused the Centre of not releasing timely funds. “With the Centre delaying the funds, we shall give Rs 1,000 crore to ensure that farmers’ dues are paid on time.”

Hitting out at the opposition BJP, Mr Gehlot said the party has a fascist and anti-democratic mindset and can go to any extent to retain power. 

“They came to power by making false promises. The previous Vasundhara Raje government neglected work. Those who voted for BJP had felt cheated. The BJP again seems busy in diverting people’s attention from core issues by making personal attacks on Rahul Gandhi and his family,” said Mr Gehlot.





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Ashok Gehlot Rahul Gandhi Kisan Sabha jaipur Rally Congress lok sabha elections 2019


जयपुर:

राजस्थान की अशोक गहलोत (Ashok Gehlot) सरकार ने बुधवार को किसानों के लिए कई बड़ी घोषणाएं की. इन घोषणाओं में अगले पांच साल तक बिजली की दरें नहीं बढ़ाना और अगले छह माह में बिजली के एक लाख कृषि कनेक्शन देना शामिल है. गहलोत ने किसान रैली को संबोधित करते हुए कहा कि राज्य सरकार लघु एवं सीमांत किसानों को पेंशन देने की दिशा में काम कर रही है. उन्होंने कहा कि लघु व सीमांत किसानों को खाद्य प्रसंस्करण इकाई लगाने के लिए 10 हेक्टेयर तक की अपनी जमीन का परिवर्तन कराने जरूरत नहीं होगी. किसान भूमि रूपांतरण के बगैर अपनी इकाई लगा पाएगा.

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उन्होंने कहा, ‘एक लाख कनेक्शन बकाया पडे़ हैं. किसानों की मांग देखते हुए आगामी जून महीने तक 1 लाख कृषि कनेक्शन दिए जाएंगे और इसकी तैयारी हो चुकी है.’ गहलोत ने कहा कि अगले पांच साल तक किसानों की बिजली के कोई दाम नहीं बढ़ेंगे. उन्होंने कहा, ‘न्यूनतम समर्थन मूल्य पर किसानों का भुगतान बकाया है और केंद्र सरकार धनराशि जारी नहीं कर रही है, इसके बारे में हमने तय किया है कि जब तक पैसा नहीं आता है, राज्य सरकार राजफैड को एक हजार करोड रुपये  देकर किसानों का बकाया चुकाया जाएगा.’

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मुख्यमंत्री ने कहा इसी प्रकार आने वाले वक्त में चने और सरसों के न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीददारी की जाएगी. गहलोत ने कहा, ‘कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी का सपना है कि फूड प्रोसेंसिग के माध्यम से किसान के उत्पाद का मूल्य वर्धन हो, उसके उत्पाद का निर्यात हो, इसके लिए हमने पहल की है और तय करेंगे कि लघु और सीमांत किसानों के लिए अलग से योजना बने.’

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उन्होंने कहा, ’80 प्रतिशत किसान गांवों में रहते हैं. उनकी समस्या अलग तरह की होती है. उनकी तरफ ध्यान देना हमारा कर्तव्य है. सरकार गांवों पर ज्यादा फोकस कर रही है इसलिए किसानों का कर्जा माफ किया है. किसानों को फोकस करके कैसे हम आगे बढ़ें यह देश और प्रदेश की जरूरत है.’ लोकसभा चुनाव के बारे में उन्होंने कहा कि हमने लोकसभा चुनाव की तैयारी शुरू कर दी है. हम राजस्थान में सभी 25 लोकसभा सीटे कैसे जीते और भाजपा को कैसे सबक सिखाए यह हमारा संकल्प होना चाहिए.

VIDEO: राजस्थान के नटाटा गांव के किसानों दर्द

(इनपुट: भाषा)



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Ashok Leyland Bags Orders For 2580 Buses From State Transports


Ashok Leyland has received orders from IRT, Chennai, UPSRTC, and CTU for a total of 2580 buses. All the buses will be delivered before March 2019.

In one of the single largest orders from State Transport Undertakings for a single OEM, Ashok Leyland has bagged an order to supply 2580 buses. The buses have been ordered by the Institue of Road Transport (IRT), Chennai; Uttar Pradesh State Roadways Transport Corporation (UPSRTC), and Chandigarh Transport Undertaking (CTU). The company says that all the orders will be delivered before March 2019.

Speaking about the orders, Ashok Leyland – Managing Director, Vinod K. Dasari said, “We are very happy to receive the confirmation of these orders from State Transport Undertakings. Our ability to bring value, combined with our superior technology and innovation will help us maintain our leadership position in buses in India.”

Adding further, Ashok Leyland – Senior Vice President, Sanjay Saraswat said, “Our buses are durable, robust and employ the latest in technology. The cost of ownership and the product experience which we can deliver is the best in the industry. Our in-depth understanding of what works for our markets and customers is what differentiates us and has helped us win these orders.”

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Ashok Leyland is the fourth largest manufacturer of buses globally and is the country’s largest bus maker. The company says that the new orders further consolidate its leadership position in the market.

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Rajasthan Ashok Gehlot govt to Officials- No Deendayal Upadhyayas Photo In Letter Pads


जयपुर:

राजस्थान सरकार (Rajasthan Govt) ने सभी सरकारी दस्तावेजों से पंडित दीनदयाल उपाध्याय (Deendayal Upadhyay)की तस्वीर हटाने का आदेश बुधवार को जारी किया है. वसुंधरा राजे (Vasundhara Raje) के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार ने दिसंबर 2017 में सर्कूलर जारी करके सभी विभागों को आदेश दिए थे कि उनके लेटर पैड पर पंडित दीनदयाल उपाध्याय की तस्वीर का लोगो के रूप में इस्तेमाल करें. अब अशोक गहलोत सरकार ने उस सर्कूलर को वापस ले लिया है. 

राज्य के मुद्रण एवं लेखन सामग्री विभाग की ओर से दीनदयाल की तस्वीर हटाने का आदेश जारी किया गया. अतिरिक्त मुख्य सचिव रवि शंकर श्रीवास्तव की ओर से जारी इस आदेश के अनुसार राज्य मंत्रिमंडल की 29 दिसम्बर को हुई बैठक में किए गए फैसले के अनुसार यह कदम उठाया गया है. इसके तहत राज्य के समस्त राजकीय विभागों, निगमों,बोर्ड एवं स्वायत्तशासी संस्थाओं के लेटर पैड पर पंडित दीनदयाल उपाध्याय की तस्वीर का लोगो के रूप में प्रयोग/मुद्रण करने के संबंध में 11 दिसंबर, 2017 को जारी परिपत्र को वापस लिया जाता है.

राजस्थान में अशोक गहलोत ने वसुंधरा सरकार के कई फैसले पलटे, पंचायत चुनाव के लिए शैक्षणिक योग्यता की अनिवार्यता भी खत्म

बता दें, राजस्थान में कांग्रेस की सरकार बनते ही मुख्यमंत्री शोक गहलोत (Ashok Gehlot) ने वसुंधरा सरकार के कई फैसलों को पलट दिया था. नई सरकार ने पूर्ववर्ती वसुंधरा सरकार के पार्षदी और सरपंची चुनाव में शैक्षणिक योग्यता की अनिवार्यता के फैसले को खत्म कर दिया. मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की अध्यक्षता में हुई प्रदेश मंत्रिमंडल की पहली बैठक में किसानों का कर्ज माफ करने की पात्रता व मापदंड तय करने के लिए अंतर्विभागीय समिति गठित करने, वृद्धावस्था पेंशन बढ़ाने जैसे कई अहम फैसले भी लिए गए थे. दरअसल वसुंधरा राजे के नेतृत्व वाली तत्कालीन भाजपा सरकार ने 2015 में स्थानीय निकाय चुनावों में उम्मीदवारों के न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता संबंधी प्रावधान लागू किए गए थे. 

मायावती की समर्थन वापस लेने की ‘धमकी’ के बाद हरकत में राजस्थान की कांग्रेस सरकार, अशोक गहलोत ने कही यह बात

सूचना व जनसंपर्क मंत्री रघु शर्मा ने बताया था कि इसके साथ ही पूर्ववर्ती सरकार द्वारा पिछले छह महीनों में लिए गए फैसलों की समीक्षा भी की जाएगी. उन्होंने कहा कि किसानों के अल्पकालीन फसली कर्ज की माफी के सवाल पर मंत्रिमंडल ने अंतर्विभागीय समिति गठित करने का फैसला किया है. मुख्यमंत्री गहलोत यह समिति गठित करेंगे. शर्मा ने कहा कि राष्ट्रीयकृत बैंक, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक व भूमि विकास बैंक से कर्जमाफी की पात्रता व मापदंड क्या होंगे, इसको लेकर भ्रांतियां फैलाने की कोशिश की गई हैं लेकिन जल्द ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट हो जाएगी. उन्होंने कहा कि डॉ. भीमराव आंबेडकर विधि विश्वविद्यालय व हरिदेव जोशी पत्रकारिता विश्वविद्यालय फिर शुरू किया जाएगा.

(इनपुट- भाषा)

राजस्‍थान में किसानों की कर्जमाफी के बाद अब युवाओं की बारी, उपमुख्‍यमंत्री सचिन पायलट ने कहा यह…

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Ashok Gehlot-Led Rajasthan Government Sets Up Panel To Review Decisions Taken By BJP Regime


The Ashok Gehlot-led Rajasthan government has appointed 3 cabinet committees (File Photo)

Jaipur: 

The Rajasthan government on Tuesday appointed three cabinet and one inter-departmental committee of ministers and officials for various matters, including reviewing the decisions taken by the previous BJP government in the last six months.

Urban Development and Housing Minister Shanti Kumar Dhariwal will be the co-ordinator of the committee set up to review the decisions taken by the previous government, headed by Vasundhara Raje, in the last six months.

Energy Minister BD Kalla and Food and Civil Supply Minister Ramesh Meena will be the members of the committee.

The inter-departmental committee of ministers and officers headed by Mr Dhariwal will set the eligibility criteria of farmers for claiming loan waiver and also set the directions according to the loan waiver announcement.

The committee will have six ministers as members, according to a release issued by the government on Tuesday night.

The other committees will look into the issues of contractual employees in the government and finalising the governor’s speech in the upcoming assembly session.

(Except for the headline, this story has not been edited by NDTV staff and is published from a syndicated feed.)





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Ashok Gehlot Government To Junk Minimum Qualifications Requirement For Local Body Polls in Rajasthan


The Ashok Gehlot government will reverse several decisions taken by the previous government.

Jaipur: 

Weeks after coming to power in Rajasthan, the Congress today decided to reverse the previous Vasundhara Raje government’s decision to allow only those with minimum educational qualifications to fight the panchayat and local body elections. It will move an amendment to this effect in the state assembly soon.

Rajasthan had become the first state in the country to fix a minimum educational qualification to contest polls to Panchayati Raj institutions in 2015. The amendments to Section 19 of the Rajasthan Panchayat Raj Act, 1994, also made it mandatory for the candidates to have a functional toilet at their residences.

Then Home Minister Gulab Chand Kataria had said that the Congress was not justified in protesting the move after “failing to provide even basic education” to the people in over 60 years spent in power. Making the toilets mandatory was aimed at promoting Prime Minister Narendra Modi’s national cleanliness campaign, he added.

Other decisions by the  Ashok Gehlot cabinet include the “desaffronisation” of education and the removal of a logo featuring RSS ideologue Deendayal Upadhyaya from all circulars issued by government bodies. The Vasundhara Raje government had issued a circular mandating this on December 11, 2017. The government also decided to prioritise the Mahatma Gandhi National Rural Employment Gurantee Act in order to improve create more jobs for the people. 

As part as its move to desaffronise education, the government will institute a committee of historians to review the syllabus changes made by the previous administration. The Vasundhara Raje government’s decision to give away saffron cycles to students and enforce the surya namaskar at schools across the state will also be reconsidered.

Most of the alleged saffronisation was carried out in history and political science books, with references to Mahatma Gandhi being drastically reduced and Hindutva ideology Veer Savarkar being given more prominence. The Congress, on the other hand, was described as the “nurtured baby of the British empire” in a Class 11 textbook.





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rajasthan government cm ashok gehlot first cabinet meeting


नई दिल्ली: राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने बृहस्पतिवार को कहा कि विभागों के बंटवारे को लेकर राज्य कांग्रेस के भीतर कोई मतभेद नहीं है. उन्होंने कहा कि नवगठित मंत्रिमंडल की पहली बैठक 28 दिसंबर को पार्टी के स्थापना दिवस पर जयपुर में होगी. उन्होंने विभागों के बंटवारे को सही ठहराते हुए कहा कि यह अच्छी तरह से सोच समझकर किया गया है और लोगों द्वारा इसका ‘‘स्वागत’’ किया गया है.

राजस्थान में अशोक गहलोत सरकार के नए मंत्रियों के कामकाज का बंटवारा हो गया है. मुख्यमंत्री गहलोत ने वित्त और गृह सहित नौ विभाग अपने पास रखे हैं.

मुख्यमंत्री गहलोत की सलाह पर राज्यपाल कल्याण सिंह ने बुधवार देर रात मंत्रियों के बीच विभागों बंटवारा कर दिया था. गहलोत ने कहा,‘‘ राजस्थान के नवगठित मंत्रिमंडल की पहली बैठक 28 दिसम्बर को, जोकि कांग्रेस का स्थापना दिवस भी है, होगी और नई सरकार इस दिन एक अच्छी शुरुआत करेगी.’’

मुख्यमंत्री ने इन दावों को खारिज कर दिया कि विभागों के बंटवारे को लेकर राज्य कांग्रेस के भीतर मतभेद थे. उन्होंने कहा कि एकजुट कांग्रेस राज्य को सुशासन देने में मदद करेगी. उन्होंने मंत्रिमंडल के गठन में कथित देरी को लेकर आलोचनाओं को दरकिनार करते हुए कहा,‘‘मंत्रिमंडल के गठन में दो-तीन दिन लगते हैं और राज्य में दो दिनों के भीतर विभागों को सौंप दिया गया.’’

गहलोत ने कहा कि उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र में जब भाजपा सत्ता में आई थी तो उसने मुख्यमंत्रियों की घोषणा करने में सात से नौ दिन का समय लिया था. गहलोत ने कहा,‘‘हम सुशासन देंगे, कानून एवं व्यवस्था की स्थिति बेहतर करेंगे और युवाओं की आकांक्षाएं पूरी करने के लिए कदम उठायेंगे.’’

उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार ने पिछली कांग्रेस सरकार के कई बड़े निर्णयों को ‘‘अवरुद्ध’’ कर दिया था. उनकी पार्टी उनका अनुकरण नहीं करेगी. उन्होंने कहा,‘‘हम पिछली वसुंधरा राजे सरकार के अच्छे निर्णयों को अवरूद्ध नहीं करेंगे. वसुंधरा जी की सरकार के अच्छे काम को, हम लोगों के हित में अवरूद्ध नहीं करेंगे.’’

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य की कांग्रेस सरकार ने कृषि ऋण को माफ करके एक बड़ा फैसला किया है और इस कदम का सभी लोगों ने स्वागत किया है. उन्होंने आरोप लगाया कि राजे सरकार के ‘‘कुशासन’’ के कारण राज्य ने काफी कुछ भुगता है. उन्होंने दावा किया कि एक बड़ा जनादेश मिलने के बावजूद विकास का कोई भी कार्य नहीं किया गया.

गहलोत ने कहा कि राज्य कांग्रेस ने लोकसभा चुनाव के लिए तैयारियां पहले से ही शुरू कर दी है. उन्होंने यह भी उम्मीद जताई कि भाजपा को हराने के लिए विपक्षी पार्टियों का एक ‘‘महागठबंधन’’ जल्द ही होगा और यह सफल होगा. उन्होंने कहा कि मोदी सरकार को ‘‘जुमलों की सरकार’’ के रूप में याद किया जायेगा क्योंकि इस सरकार ने केवल वादे किये है और किसी भी वादे को पूरा नहीं किया है.

(इनपुट-भाषा)





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Portfolios allocated to Rajasthan Cabinet Ministers, Ashok Gehlot keeps nine, Sachin Pilot gets five departments


जयपुर:

राजस्थान (Rajasthan) में कांग्रेस सरकार (Rajasthan Cabinet) में विभागों के बंटवारे से जुड़ी खींचतान की खबरें थीं, मगर अब उस पर सहमति बनती दिख रही है. राजस्थान सरकार के विभागों का बंटवारा हो गया है और मुख्यमंत्री अशोक गहलोत (Ashok Gehlot) ने 9 विभाग अपने पास रखे हैं, वहीं उपमुख्यमंत्री सचिन पायलट (Sachin Pilot) को पांच विभाग मिले हैं. बता दें कि राजस्थान में  कांग्रेस ने बीजेपी को हराकर सत्ता हासिल की है. इससे पहले वसुंधरा राजे के नेतृत्व में बीजेपी की सरकार थी.

राजस्‍थान में किसानों की कर्जमाफी के बाद अब युवाओं की बारी, उपमुख्‍यमंत्री सचिन पायलट ने कहा यह…

मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने वित्त विभाग, आबकारी विभाग, आयोजना विभाग, नीति आयोजना विभाग, कार्मिक विभाग, सामान्य प्रशासन विभाग, राजस्थान राज्य अन्वेषण ब्यूरो, सूचना प्रौद्योगिकि एवं संचार विभाग और गृह मामलात और न्याय विभाग अपने पास रखे हैं. 

सचिन पायलट को 2019 में UPA सरकार बनने की उम्मीद, कहा- दबाव में है BJP, कारण भी बताया…

वहीं, डीप्टी सीएम सचिन पायलट के हिस्से में सार्वजनिक निर्माण विभाग, ग्रामीण विकास विभाग, पंचायती राज विभाग, विज्ञान और प्रदौगिकी विभाग और सांख्यिकी विभाग गया है. इन दोनों के अलावे 17 मंत्रियों के विभाग का भी बंटवारा हो गया है, जिसकी लिस्ट आप नीचे देख सकते हैं. 

बता दें कि इससे पहले राजस्थान में कांग्रेस सरकार में विभागों के बंटवारे से जुड़ी खींचतान की खबरों की पृष्ठभूमि में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने बुधवार शाम पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी से मुलाकात की थी. सूत्रों के मुताबिक गहलोत के अलावा पार्टी के राजस्थान प्रभारी अविनाश पांडे और कांग्रेस महासचिव केसी वेणुगोपाल भी गांधी के आवास 12 तुगलक लेन पहुंचे थे. इन तीन नेताओं ने कांग्रेस अध्यक्ष से मुलाकात के पहले पार्टी का वाररूम कहे जाने वाले 15 गुरुद्वारा रकाबगंज रोड पर करीब डेढ़ घंटों तक बैठक की. 

राजस्थान: कैबिनेट का हुआ गठन, 23 MLAs ने ली मंत्री पद की शपथ, 2019 को ध्यान में रख तय किए गए मंत्री

दरअसल, राजस्थान में 25 दिसंबर को मंत्रिमंडल विस्तार हुआ था जिसमें 13 कैबिनेट मंत्री और 10 राज्य मंत्रियों ने शपथ ली थी, लेकिन बुधवार शाम तक विभागों का बंटवारा नहीं हुआ. हालिया विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को जीत मिलने के बाद गत 17 दिसंबर को गहलोत ने मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली थी. प्रदेश कांग्रेस कमेटी अध्यक्ष सचिन पायलट ने भी साथ में शपथ ली थी जो इस सरकार में उप मुख्यमंत्री हैं. चुनावी नतीजे आने के बाद मुख्यमंत्री के चयन को लेकर भी लंबी खींचतान देखने को मिली. मैराथन बैठकों और गहन विचार-विमर्श के बाद गहलोत को मुख्यमंत्री और पायलट को उप मुख्यमंत्री बनाने के फार्मूले पर सहमति बनी थी. 





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