जहां एक हफ्ते बाद होना है डे/नाइट टेस्‍ट, वहां बत्‍ती गुल होने के कारण रोकना पड़ा मैच


ब्रिस्बेन: ब्रिस्बेन हीट और सिडनी थंडर्स के बीच गुरुवार शाम बिग बैश लीग मैच के दौरान गाबा मैदान के एक हिस्से में फ्लड लाइट बंद होने से मैच रद्द करना पड़ा. ऑस्‍ट्रेलिया इसी मैदान में एक सप्ताह बाद श्रीलंका के खिलाफ दिन-रात्रि टेस्ट की मेजबानी करेगा. क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया ने शुक्रवार को बताया कि बत्ती गुल होने के कारणों की जांच की जा रही है.

क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया के अधिकारी एंथनी एवर्ड ने कहा, ‘‘हम क्वींसलैंड स्टेडियम के साथ मिलकर जांच का काम कर रहे हैं ताकि भविष्य में होने वाले मैचों में यह सुनिश्चित हो सके कि ऐसी कोई समस्या नहीं हो.’’

VIDEO: 1 गेंद पर जीत के लिए चाहिए थे 6 रन, बिना शॉट खेले ही जीत लिया मैच

इससे पहले थंडर्स के कोच शेन बांड ने ऐसी स्थिति होने पर नियमों की समीक्षा की मांग की थी. उनकी टीम ने इस टी-20 मुकाबले में शेन वाटसन की शतकीय पारी के दम पर चार विकेट पर 186 रन बनाये थे. जिसके जवाब में हीट की टीम 10 रन पर दो विकेट गंवा कर संघर्ष कर रही थी.

कुछ इस अंदाज में क्रिकेट खेलते नजर आए सलमान, वायरल हो रहा जबरदस्त शॉट्स वाला VIDEO

इसके बाद मैदान के एक हिस्से में फ्लडलाइट की बत्ती गुल हो गई. एक घंटे तक जब मैच शुरू नहीं हो सका तो दोनों टीमों के बीच अंक बांटा गया.

बांड को लग रहा था कि मैदान में मैच जारी रखने के लिए पर्याप्ता रौशनी थी. उन्होंने कहा, ‘‘दुनिया में कई ऐसे मैदान है जहां इससे भी कम रौशनी है. इसलिए यह निराशाजनक है. यह प्रतियोगिता के लिए अच्छा नहीं है और मुझे लगता है कि नियमों की समीक्षा की जानी चाहिये.’’





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मोदी सरकार को सत्ता में आने से रोकने के लिए SP-BSP गठबंधन सकारात्मक पहल : AAP


आप ने कहा ‘बीजेपी को रोकने के लिए राज्यों की स्थानीय राजनीतिक परिस्थितियों पर आधारित इस तरह के गठबंधन समय की मांग हैं.’

मोदी सरकार को सत्ता में आने से रोकने के लिए SP-BSP गठबंधन सकारात्मक पहल : AAP

आप के राज्यसभा सदस्य संजय सिंह ने शनिवार को कहा कि मोदी सरकार को देश की सत्ता से दूर करने के लिए विपक्षी दलों की एकजुटता जरूरी है (फाइल फोटो)





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दिल्ली-NCR में स्कूलों के पास वाहन प्रदूषण रोकने के लिए चलेया जाएगा अभियान


नई दिल्लीः राष्ट्रीय राजधानी में प्रदूषण से लड़ाई जारी रखते हुए वाहनों से उत्पन्न होने वाले प्रदूषण के हानिकारक प्रभावों को लेकर जागरूकता फैलाने और स्कूलों के पास वाहन रोक कर इंतजार करते समय इंजन बंद करने के लिए लोगों को प्रोत्साहित करने के लिए दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में एक अभियान चलाया जाएगा. एनजीओ ‘लंग केयर फाउंडेशन’ के अभियान ‘नो आइडलिंग’ का लक्ष्य दिल्ली-एनसीआर में स्कूलों के आसपास वायु प्रदूषण का कम करना है. इसे इस सप्ताह शुरू किए जाने की संभावना है.

‘लंग केयर फाउंडेशन’ के सीईओ अभिषेक कुमार ने बताया कि यह अभियान बी.ई.एस.टी (ब्रीथ इजी स्टे टफ) क्लब स्कूल पहल का एक हिस्सा है. इसका लक्ष्य स्कूल के बाहर अभिभावकों, चालकों और अन्य लोगों द्वारा लाए गए उन वाहनों पर नजर रखना है, जिनके इंजनों को लोग स्कूलों के बाहर इंतजार करते समय बंद नहीं करते.

कुमार ने बताया कि केवल 10-20 मिनट की अवधि के बीच ही इन वाहनों के जरिए बच्चे उच्च स्तर के प्रदूषण की चपेट में आ जाते हैं. उन्होंने कहा, ‘‘बच्चों के, वायु प्रदूषण के स्तर में अचानक बढ़ोतरी की चपेट में आने की सबसे अधिक आशंका होती है, जो कि उच्च वायु प्रदूषण की स्थिति से बहुत ऊपर है और साल भर शहर के अधिकांश हिस्सों में प्रबल रहता है.’’ 

एनजीओ के संस्थापक एवं छाती रोग विशेषज्ञ डॉ. अरविंद कुमार ने कहा, ‘‘बच्चों के इस तरह के प्रदूषण में आने के अस्थायी लक्षण कफ, खांसी, आंखों में जलन, सिरदर्द, एलर्जी और छींक आना है. अधिक समय तक अत्यधिक प्रदूषण के संपर्क में रहने से बच्चों को अस्थमा, ब्रोंकाइटिस, मानसिक और शारीरिक विकास में कमी आदि जैसे रोग हो सकते हैं.’’ 

एनजीओ के निदेशक मातृश्री पी शेट्टी ने बताया कि यह अभियान नोएडा में ‘बाल भारती पब्लिक स्कूल’ के बीईएसटी क्लब द्वारा आयोजित ‘पहली दृश्य पहुंच’ के साथ शुरू होगा, जिसमें स्कूल और आसपास के चार अन्य स्कूल शामिल किए जाएंगे.





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exclusive interview: sachin pilot said, congress will win rajasthan assembly election 2018 | Exclusive: राजस्थान में कांग्रेस को सत्ता में लाने तक मैं न रुकने वाला हूं, न थकने वाला हूं


जयपुर: कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी के जयपुर दौरे से राजस्थान में परिवर्तन की बयार का आगाज होगा. यह कहना है प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष सचिन पायलट का पायलट का. जी मीडिया से खास बातचीत में पायलट ने कहा कि राहुल गांधी की यात्रा कार्यकर्ताओं में नए उत्साह का संचार करेगी और विधानसभा चुनाव का शंखनाद होगा. पायलट ने भारतीय जनता पार्टी की राजस्थान गौरव यात्रा पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब प्रदेश का प्रत्येक वर्ग सरकार के शासन में परेशान रहा है तो आखिर बीजेपी सरकार को किस बात पर गौरव हो रहा है. सचिन पायलट ने सीएम से सवाल पूछते हुए कहा कि अगर बीजेपी शासन में इतना ही विकास हुआ है तो क्यों सरकार कांग्रेस के सवालों के जवाब नहीं दे पा रही. पायलट ने कहा कि राहुल गांधी की यात्रा के बाद प्रदेश कांग्रेस के नेता भी राजस्थान की यात्रा पर निकलेंगे. सचिन पायलट से इन तमाम मुद्दों को लेकर बातचीत की संवाददाता सुशान्त पारीक ने.

सवाल- विधानसभा चुनाव से पहले राहुल गांधी की इस यात्रा के क्या मायने हैं?
जवाब-
राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद राहुल गांधी पहली बार जयपुर आ रहे हैं. एक तरीके से राहुल गांधी की यात्रा राजस्थान कांग्रेस में चुनावी शंखनाद होगी. कार्यकर्ताओं में नए उत्साह का संचार होगा राहुल गांधी के लिए लीडरशिप में चुनाव लड़ा जा रहा है तो उनके आने से नए सिरे से चुनावी अभियान का आगाज होगा. राहुल गांधी का यह कार्यक्रम ऐतिहासिक होगा.

सवाल- क्या राहुल गांधी की यात्रा वसुंधरा राजे के राजस्थान का गौरव यात्रा का जवाब देने की कोशिश है?
जवाब- मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे अब राजस्थान की यात्रा पर निकली है और हम साढ़े चार साल से राजस्थान की यात्रा कर रहे हैं. और यही वजह है कि अब मुख्यमंत्री को यात्रा पर निकलना पड़ा. राहुल गांधी और वसुंधरा राजे की यात्रा की कोई तुलना नहीं है. राहुल गांधी राजस्थान में परिवर्तन की बयार का आगाज जयपुर से करेंगे. उसके बाद अगस्त के आखिरी सप्ताह और सितंबर भी कई जिलों के दौरे करेंगे. वसुंधरा सरकार राजस्थान की जनता को सुशासन देने में नाकामयाब रही है. तो सवाल यह है कि आखिर किस बात पर गर्व किया जा रहा है. जब प्रत्येक वर्ग परेशान हो तो सरकार को गौरव यात्रा नहीं बल्कि जवाबदेही यात्रा निकालनी चाहिए.

सवाल- आप किसानों की आत्महत्या के मुद्दे को पुरजोर तरीके से उठा रहे हैं क्या यह चुनावी रणनीति है?
जवाब- देखिए यह शर्मनाक है कि राजस्थान में धरतीपुत्र की हालत दयनीय हो रही है. किसान आत्महत्या पर मजबूर है. नागौर में दलित और दिव्यांग किसान का मामला सबके सामने है. एक तरफ नीरव मोदी जैसे बिजनेसमैन लाखों करोड़ का फ्रॉड करके फरार हो रहे हैं. वहीं लोन के 80 हजार बकाया के लिए मंगलचंद नाम के इस किसान की कुर्की निकाल दी गई. मैंने उस परिवार से मुलाकात की है. लोन की बकाया 80 हजार की राशि कांग्रेस पार्टी ने चुकाई है, लेकिन यह मामला बताता है कि देश और राजस्थान में किस तरह से आर्थिक विषमता का माहौल है. जब किसान की शव यात्रा निकल रही हो ऐसे माहौल में राजस्थान गौरव यात्रा के कोई मायने नहीं है.

सवाल- सीएम का आरोप है कि कांग्रेस सत्ता में आने के बाद अपने वादे भूल जाती है इसलिए जनता इस बार, एक बार कांग्रेस, एक बार बीजेपी की परंपरा को बदलने वाली है.
जवाब- देखिए भारतीय जनता पार्टी की जब सरकार बनी थी उन्होंने 611 वायदे किए थे उनमें से एक भी पूरा नहीं हुआ. सरकार बनी तब एक लाख 40 हजार करोड़ का कर्ज था जो आज 2 लाख 50 हजार करोड़ का हो चुका है. सरकारी कंपनियों का दिवाला निकल चुका है. सरकारी स्कूलों को पब्लिक कंपनियों को दिया जा चुका है युवाओं के पास रोजगार नहीं है. जुमलेबाजी के तौर पर कोई भी बयान देना ठीक है लेकिन हकीकत इससे कोसों दूर है. सरकारी धन का दुरुपयोग कर बड़ी-बड़ी सभाएं की जा रही हैं तो हो सकता है कि जनता मुख्यमंत्री को उनको देखने आए लेकिन जब चुनाव में वोट डालने का समय आएगा तो जनता उसके लिए अभी से अपना मन बना चुकी है और इसकी बानगी उपचुनाव में हम देख चुके हैं.

सवाल- आप जमीन से जुड़े मुद्दे उठा रहे हैं लेकिन बीजेपी मुख्यमंत्री कह रही हैं कि कांग्रेस कहीं भी मुकाबले में ही नहीं है?
जवाब- समझ में नहीं आ रहा कि भारतीय जनता पार्टी ने पिछले सालों में एक भी प्रधानी का चुनाव नहीं जीता, एक भी उपचुनाव में जीत हासिल नहीं कर पाए. राजस्थान में जब भी उपचुनाव हुए भारतीय जनता पार्टी का सूपड़ा साफ हुआ तो आखिर किस आधार पर सीएम यह बात कह रही हैं. वैसे भी चुनाव में किसी भी पार्टी को गलतफहमी का शिकार नहीं होना चाहिए. जनता जनार्दन ही अपनी सरकार चुनती है इस बार जनता ने कांग्रेस को सत्ता में लाने का मन बना लिया.

सवाल- भारतीय जनता पार्टी 180 का आंकड़ा कह रही है, आपने सीटें निर्धारित की है?
जवाब- बीजेपी का 180 का आंकड़ा बेहद हास्यास्पद है. कांग्रेस ने कोई फिगर डिसाइड नहीं किया है लेकिन मैं यह दावे के साथ कह सकता हूं कि अब तक का राजस्थान में कांग्रेस सबसे बड़ा बहुमत हासिल करने जा रही है. पिछले जितने भी सीटों के लिए रिकॉर्ड कांग्रेस के नाम रहे हैं इस बार टूट जाएंगे.

सवाल- बीजेपी आरोप लगाती है क्योंकि उसके पास सीएम पद का कोई चेहरा नहीं है और यह चुनावी मुद्दा भी बनेगा?
जवाब- राजस्थान की जनता से जुड़े बहुत मुद्दे हैं जिनको उठाने की जरूरत है. कांग्रेस में कभी सीएम पद का चेहरा घोषित करने की परंपरा नहीं रही है कुछ अपवाद को छोड़कर. राजस्थान में भी यही परंपरा जारी रहेगी. राहुल गांधी के नेतृत्व में चुनाव लड़ा जाएगा. जीत के बाद कांग्रेस का जो एक तरीका है उसी के आधार पर सीएम चुना जाता है. यह सबको पता है कि बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने किस मजबूरी में वसुंधरा राजे को सीएम पद का चेहरा घोषित किया है.

सवाल- अभी दिल्ली में आप की राहुल गांधी से मुलाकात हुई बंद कमरे में क्या बातचीत हुई है?
जवाब- राहुल गांधी को हमने जयपुर आने के लिए इनवाइट किया था. उसी के संबंध में बातचीत हुई इसके अलावा राजस्थान चुनाव को लेकर फीडबैक दिया है. आने वाले दिनों में राजस्थान कांग्रेस किस तरीके से अपनी रणनीति बनाने जा रही है उस पर बातचीत हुई थी.

सवाल- क्या राजस्थान कांग्रेस के मुखिया के नाते आप भी चुनावी यात्रा पर निकलने जा रहे हैं?
जवाब- बिल्कुल चुनाव में यात्राएं बेहद जरूरी हैं. वैसे हमने मेरा बूथ मेरा गौरव कार्यक्रम के तहत पूरे राजस्थान की यात्रा की है. लेकिन राहुल गांधी के कार्यक्रम के बाद राजस्थान कांग्रेस की यात्रा का कार्यक्रम तैयार किया जा रहा है इसमें कांग्रेस के सभी नेता शामिल होंगे.

सवाल- आप 16 से 18 घंटे काम कर रहे हैं. बहुत सक्रिय हैं. कभी जयपुर कभी दिल्ली के बीच सफर करते हैं इस उर्जा का राज क्या है?
जवाब- मुझसे ज्यादा मेहनत करने वाले लोग कांग्रेस पार्टी में हैं. मुझे राहुल गांधी ने मौका दिया है. वैसे भी किसी भी नेता के लिए ऊर्जा का सबसे बड़ा स्त्रोत जनता होती है. जनता का प्यार मुझे लगातार मिल रहा है और अब केवल एक ही टारगेट है. राजस्थान विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को सत्ता में लाना. उसे हासिल किए बिना मैं ना रुकने वाला हूं न थकने वाला हूं. 





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बंगाल में BJP को रोकने में 'उलझी' कांग्रेस, एक गुट ममता का संग तो दूसरा चाहता है लेफ्ट का साथ



बंगाल में कांग्रेस का एक धड़ा यहां चाहता है कि वह ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल के साथ मिलकर चुनाव लड़े. ये रिपोर्ट तब सामने आ रही है, जब बंगाल में ही कांग्रेस सांसद अधीर रंजन चौधरी समेत दूसरे नेता चाहते हैं कि कांग्रेस लोकसभा चुनाव में लेफ्ट के साथ गठबंधन करे.



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बिजली चोरी रोकने गई BSES टीम पर दबंगों का हमला, 2 गिरफ्तार


दक्षिणपूर्वी दिल्ली में बिजली चोरी रोकने के लिए छापा मारने गई बीएसईएस की एक निरीक्षण टीम पर हमला किया गया जिससे बिजली वितरण कंपनी के दो कर्मचारी घायल हो गये. 





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Opinion: उत्तर प्रदेश में अपराध रोकने में कितनी सफल हुई योगी सरकार?


उत्तर प्रदेश में भारतीय जनता पार्टी की सरकार बने मुश्किल से 14 महीने हुए हैं और अभी से सरकार पर अपराध नियंत्रण में असफल होने के आरोप लगना शुरू हो गए हैं. प्रदेश की पिछली समाजवादी पार्टी सरकार के ऊपर भी ऐसे आरोप सरकार बनने के एक-दो साल बाद लगने लगे थे और अंततः, अपनी कुछ उपलब्धियों के बावजूद अपनी पार्टी और परिवार में कलह और अपराध नियंत्रण में असफल होने के आरोपों के बोझ तले अखिलेश यादव की सरकार चुनाव हार गई थी.

उत्तर प्रदेश अपने राजनीतिक गतिविधियों के अलावा यदि किसी और वजह से सुर्ख़ियों में रहता है तो वह है यहा की कानून-व्यवस्था और अपराध की स्थिति. इस घने प्रदेश में होने वाला अपराध जाति-गत और सांप्रदायिक घटनाओं और उन पर होने वाली राजनीति से कहीं गहरे से जुड़ा हुआ है. सच तो यह है कि 2007-2012 के दौरान सत्ता में रही बहुजन पार्टी की सरकार, और 2012-2017 के दौरान की सपा सरकार इन्ही दो आरोपों से घिरी और सत्ता से बेदखल भी हुई. और अब, विकास और बदलाव के नाम पर सत्ता में आई भारतीय जनता पार्टी की सरकार पर तेजी से दिशाहीनता के आरोप लगने शुरू हो चुके हैं. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भले ही अपने अनुशासन-प्रिय और भ्रष्टाचार-विरोधी छवि के लिए जाने जाते हों, लेकिन एक प्रशासक के तौर पर उनकी उपलब्धियां अभी सामने आनी बाकी हैं.

इसका खामियाजा प्रदेश की कानून-व्यवस्था और अपराध नियंत्रण की स्थिति पर दिखने लगा है. न केवल उन्नाव का बहुचर्चित अपहरण व बलात्कार काण्ड, बल्कि कासगंज, इलाहाबाद, गोरखपुर, लखनऊ समेत कई शहरों में हुई दुस्साहसी अपराधिक घटनाओं से लगता है कि मुख्यमंत्री के पसंदीदा प्रदेश पुलिस के महानिदेशक और शीर्ष प्रशासनिक अधिकारी अभी भी वह नहीं कर दिखा पा रहे हैं जो मुख्यमंत्री चाहते हैं. फिर विरोधाभास यह भी है कि एक ओर तो प्रदेश सरकार द्वारा संगठित अपराध को रोकने के लिए नया कानून लाया गया और पुराने अपराधियों को मुठभेड़ में पकड़ा या मार गिराया जा रहा है, तो दूसरी ओर आंकड़े बताते हैं कि इस वर्ष जनवरी से मार्च तक प्रदेश में बलात्कार के 899 मामले पुलिस में दर्ज हुए हैं. इसी अवधि में महिलाओं के विरुद्ध अपराध के मामलों की संख्या प्रदेश भर में 100 से अधिक रही है.

स्थिति से निबटने के लिए महिला हेल्पलाइन, डायल-100, एंटी-रोमियो दल जैसी सेवाएं एकीकृत किए जाने का प्रस्ताव है और बच्चों के खिलाफ यौन अपराध के मामलों में फ़ास्ट-ट्रैक अदालतें बनाने पर भी विचार्किया जा रहा है. इन सब के बावजूद अपराधियों में पुलिस का डर अभी भी नहीं दिख रहा और जिस बेख़ौफ़ तरीके से हत्याएं, लूटपाट अदि की वारदातें हो रही हैं, उससे लगता है कि थाना स्तर पर पुलिसकर्मियों में अपना काम सख्ती से करने का, और लापरवाही करने पर दंड मिलने का, कोई सन्देश नहीं गया है.

अखिलेश यादव, मायावती और कांग्रेस समेत विपक्षी दलों के नेता इस मोर्चे पर विफलता और सरकारी तंत्र की ढिलाई के लिए योगी को दोष दे रहे हैं. लेकिन पिछली दो सरकारों के कार्यकाल में भी न तो अपराधों की संख्या कम थी और न ही राजनीतिक लोगों का हत्या, बलात्कार आदि जैसी घटनाओं में संलिप्तिता कम थी. जहां मायावती की सरकार के दौरान संगठित अपराधियों पर सख्ती देखी गई थी, लेकिन बड़ी संख्या में तत्कालीन विधायक व मंत्री तमाम तरह में अपराध में लिप्त पाए गए थे, उन पर कार्यवाई हुई थी और वे सरकार या पार्टी से बाहर किये गए थे. अखिलेश यादव के कार्यकाल में जहां एक ही वर्ग के लोगों की बड़ी संख्या में पुलिस में तैनाती के आरोप लगे थे, लूटपाट, हत्या आदि की घटनाएं बढ़ी थीं और सबसे गंभीर बात यह थी कि बड़ी संख्या में अराजक तत्वों द्वारा पुलिसकर्मियों और पुलिस थानों पर हमले हुए थे.

पूरे परिदृश्य से तो यही लगता है कि उत्तर प्रदेश में अपराध पर नियंत्रण पाना किसी भी राजनीतिक दल की सरकार के बस के बात नहीं है. अपने कार्यकाल में मायावती और अखिलेश समय समय पर अपराध से सख्ती से निबटने की बातें करते थे और अब योगी आदित्यनाथ भी यही कहते हैं. ताबड़तोड़ हुई मुठभेड़ में कई दुर्दांत अपराधी मारे गए हैं, कई अपराधी मारे जाने के डर से आत्मसमर्पण कर रहे हैं, कई जिलों में पुलिस अधीक्षक बदले गए हैं, समीक्षा बैठकें हो रही हैं लेकिन कोई जमीनी बदलाव नहीं दिख रहा. प्रदेश के शहरों और कस्बों की सड़कों पर अराजक तत्वों का जमावड़ा, पुलिस की अकर्मण्यता, कोई कार्यवाई होने पर सत्तारूढ़ दलों के नेताओं की सिफारिश आना, आदि वैसे का वैसा है.

कई विशेषज्ञों का मानना है कि उत्तर प्रदेश अभी भी बड़े पैमाने पर सामाजिक और आर्थिक तौर पर पिछड़ा है, कृषि और उद्योग के क्षेत्र में कुछ बदलाव आने के बावजूद अभी भी प्रदेश के अधिकतर लोगों के जीवन में कोई बदलाव नहीं आया है और इससे उपजी हताशा व निराशा ही अपराध को बढ़ावा देती है. हाल में हुई कुछ अपराध भी यह संकेत देते हैं कि छोटे विवादों के बाद भी हत्या कर देने की वारदातें बढ़ी हैं. उस पर पुलिस का डर न होना, या किसी कार्यवाई को आसानी से एक फ़ोन करके रोक देना अपराधियों का हौसला और बढ़ाते हैं. राजधानी लखनऊ से लगे हुए गावों में भी लोग अपनी बेटियों को स्कूल भेजने में हिचकिचाते हैं क्योंकि स्कूल के रास्ते में मंडराते शरारती तत्वों के इरादे संदेहास्पद होते हैं. समुचित संख्या में शौचालयों के न होने की वजह से बच्चे खेत मैदान में जाते हैं जहां आवारा कुत्ते या अन्य जानवर उन्हें शिकार बना रहे हैं. फिर जातिगत विद्वेष कहीं से भी कम नहीं हुआ है, और एक ओर किसी विशेष जाति के लोगों पर शादी या समारोह मनाने पर हिंसा भड़कती है, तो दूसरी ओर दो अलग वर्गों के लड़के या लड़कियों की दोस्ती, प्रेम या शादी होने पर हत्या, बलात्कार या एसिड-अटैक की नौबत आ जाती है.

इन स्थितियों से पार पाना सिर्फ राजनीतिक दलों के बस में नहीं है. जिस तरह के सामाजिक या शैक्षिक बदलाव की जरूरत है, वह किसी भी सरकार की वरीयता में कभी रहता ही नहीं. ऐसी स्थिति में, इस सरकार के बाद किसी भी पार्टी की सरकार बन जाए, कुछ ख़ास बदलने वाला नहीं है.

(रतनमणि लाल वरिष्ठ लेखक और स्‍तंभकार है)

(डिस्क्लेमर : इस आलेख में व्यक्त किए गए विचार लेखक के निजी विचार हैं)

 





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