विधानसभा चुनाव परिणाम: छत्तीसगढ़ में नेता प्रतिपक्ष का नहीं जीत पाने का मिथक टूटा


रायपुर: छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव में बड़ी जीत के साथ ही कांग्रेस ने नेता प्रतिपक्ष के कभी भी चुनाव नहीं जीतने के मिथक को तोड़ दिया है. हालांकि विधानसभा अध्यक्ष इस चुनाव में भी नहीं जीत सके.

वर्ष 2000 में छत्तीसगढ़ राज्य की स्थापना हुई और जब पहली बार 2003 में विधानसभा के चुनाव कराए गए तब से लेकर 2013 के चुनाव तक नेता प्रतिपक्ष अपनी सीट नहीं बचा पाए थे. लेकिन इस वर्ष विधानसभा चुनाव में टीएस सिंह देव ने जीत हासिल कर इस मिथक को तोड़ दिया है. अंबिकापुर विधानसभा सीट से टी एस सिंह देव ने भारतीय जनता पार्टी के प्रत्याशी अनुराग सिंह देव को 39,624 मतों से पराजित किया है.

2003 में नंद कुमार साय चुनाव हारे
वर्ष 2000 में राज्य गठन के बाद यहां अजीत जोगी के नेतृत्व में कांग्रेस की सरकार बनी थी. इस दौरान बीजेपी के वरिष्ठ आदिवासी नेता नंद कुमार साय को विधानसभा में विपक्ष का नेता बनाया गया था.

2003 में जब पहली बार राज्य में विधानसभा के चुनाव हुए तब मारवाही सीट से नंद कुमार साय ने मुख्यमंत्री अजीत जोगी के खिलाफ चुनाव लड़ा था. साय चुनाव हार गए थे. हालांकि इस चुनाव में बीजेपी ने रमन सिंह के नेतृत्व में पूर्ण बहुमत की सरकार बनाई थी.

जब राज्य में बीजेपी की सरकार बनी तब कांग्रेस को विपक्ष में बैठना पड़ा और वर्ष 2003 से 2008 के दौरान महेंद्र कर्मा विपक्ष के नेता रहे. जब 2008 में विधानसभा के चुनाव हुए तब कर्मा दंतेवाड़ा सीट से चुनाव हार गए. वर्ष 2008 में बीजेपी की दूसरी बार सरकार बनी.

2013 के चुनाव में रविंद्र चौबे साजा सीट से हार गए
जब राज्य में 2008 से 2013 के बीच बीजेपी की सरकार थी तब रविंद्र चौबे विपक्ष के नेता रहे और 2013 के चुनाव में रविंद्र चौबे साजा सीट से हार गए. इस दौरान राज्य में तीसरी बार रमन सिंह के नेतृत्व में बीजेपी की सरकार बनी थी.

वर्ष 2013 में टीएस सिंह देव विपक्ष के नेता बने. इस वर्ष हुए चुनाव में सिंह देव अंबिकापुर से चुनाव मैदान में थे लेकिन इस चुनाव में जीत के साथ ही उन्होंने इस मिथक को भी तोड़ दिया कि नेता प्रतिपक्ष इस राज्य में चुनाव नहीं जीत सकते हैं.

यह मिथक है बरकरार
हालांकि बीजेपी के शासनकाल में किसी भी विधानसभा अध्यक्ष के चुनाव नहीं जीत पाने का मिथक बरकरार है. इस वर्ष चुनाव में विधानसभा अध्यक्ष गौरीशंकर अग्रवाल कसडोल सीट से चुनाव हार गए हैं. इससे पहले वर्ष 2008 और 2013 के चुनाव में भी विधानसभा अध्यक्ष चुनाव हार चुके हैं.

वर्ष 2013 के चुनाव में गौरीशंकर अग्रवाल ने कांग्रेस के राजकमल सिंघानिया को 22,928 मतों से पराजित किया था. इसके बाद वह विधानसभा अध्यक्ष चुने गए थे लेकिन इस वर्ष हुए चुनाव में अग्रवाल कांग्रेस की प्रत्याशी शकुंतला साहू से 48,418 मतों से चुनाव हार गए हैं.

इससे पहले 2008 से 2013 के मध्य बीजेपी सरकार में धरमलाल कौशिक विधानसभा अध्यक्ष रहे लेकिन वह 2013 के चुनाव में बिल्हा सीट में कांग्रेस के उम्मीदवार सियाराम कौशिक से चुनाव हार गए थे.

इसी तरह इससे पहले 2003 से 2008 के मध्य बीजेपी के प्रथम शासनकाल में प्रेमप्रकाश पांडेय विधानसभा अध्यक्ष थे लेकिन 2008 के चुनाव में वह भिलाई नगर सीट में कांग्रेस के बदरूददीन कुरैशी से चुनाव हार गए थे.

छत्तीसगढ़ में विधानसभा चुनाव संपन्न हो चुका है. राज्य में कांग्रेस ने 90 सीटों में से 68 सीटों पर जीत हासिल की है. वहीं बीजेपी को 15 सीट ही मिली है. जबकि पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी की पार्टी जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ :जे: को पांच सीट तथा बहुजन समाज पार्टी को दो सीटों पर कामयाबी मिली है.

(इनपुट – भाषा)





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छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव 2018 : जानिए किस सीट पर कौन जीता



छत्तीसगढ़ में 90 विधानसभा सीटों के लिए हुई मतगणना के बाद राज्य में कांग्रेस को प्रचंड बहुमत मिला है. पार्टी ने 68 सीटों पर जीत दर्ज की. जबकि 15 सालों से सत्ता में राज कर रही बीजेपी के खाते में 15 ही सीटें आईं. वहीं, दो सीटों पर बसपा और 5 सीटें जनता कांग्रेस के खाते में गई. आइए देखते हैं राज्य की किस विधानसभा सीट पर किस पार्टी ने जीत हासिल की.



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P. Chidambaram Attacks BJP, says no body try to ruin mandate – विधानसभा चुनाव परिणाम: चिदंबरम ने बीजेपी पर बोला हमला, कहा


विधानसभा चुनाव परिणाम: चिदंबरम ने बीजेपी पर बोला हमला, कहा- कोई जनादेश हड़पने का प्रयास न करे

पी. चिदंबरम ने बीजेपी पर साधा निशाना

खास बातें

  1. जनता ने दिखाया है कांग्रेस पर भरोसा
  2. बीजेपी लोकतंत्र की हत्या न करे – चिदंबरम
  3. कांग्रेस जनता से किए सभी वादे पूरे करेगी

नई दिल्ली: पूर्व वित्त मंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी चिदंबरम (P. Chidambaram) ने मंगलवार को आए मध्यप्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ के चुनाव परिणाम (Assembly Election Results 2018) के बाद एक बार फिर बीजेपी (BJP) पर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि कांग्रेस राजस्थान, छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश में सरकार (Assembly Election Results 2018) बनाएगी और किसी को भी उनका जनादेश हड़पने का प्रयास नहीं करना चाहिए. सिलसिलेवार ट्वीट में पूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा कि समूचे देश ने संविधान और संवैधानिक मूल्यों की रक्षा के लिए छत्तीसगढ़, राजस्थान और मध्य प्रदेश के मतदाताओं को मुबारकवाद दी है. उन्होंने कहा कि कांग्रेस तीनों राज्यों में सरकार बनाएगी. ना तो भाजपा को और ना ही राज्यपालों को, किसी को भी तीनों राज्यों में जनादेश हड़पने की कोशिश नहीं करनी चाहिए.

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भाजपा को अपनी हार स्वीकार करनी चाहिए. चिदंबरम ने कहा कि सबके लिए एक सीख है. कठिन मेहनत को कम करके मत आंकिए. कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने हार नहीं मानी. भाजपा के धन और सत्ता बल के खिलाफ उन्होंने लड़ाई लड़ी और उन्हें जीत मिली. गौरतलब है कि पांच राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव के नतीजों में बीजेपी को छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश और राजस्थान में हार का सामना करना पड़ा है.

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छत्तीसगढ़ में जहां बीजेपी महज 15 सीटें ही जीत पाई तो कांग्रेस ने यहां कुल 65 सीटें जीतीं जबकि वह तीन सीटों पर आगे चल रही है. वहीं राजस्थान में बीजेपी के नाम कुल 73 सीटें रहीं, जबकि कांग्रेस और उसकी सहयोगी पार्टियों ने यहां बहुमत का आंकड़ा छूते हुए कुल 101 सीटें जीतीं है. इसी तरह बीजेपी को मध्यप्रदेश में भी हार का मुंह देखना पड़ा. यहां पार्टी को 105 सीटों पर जीत मिली है जबकि वह तीन सीटों पर बढ़त बनाई हुई है. जबकि कांग्रेस को यहां 112 सीटों पर जीत मिली है जबकि वह भी तीन सीटों पर बढ़त बनाए हुए है. 

 



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Akhilesh Yadav Mocks BJP On Poll Fail, says Abki Baar… – विधानसभा चुनाव परिणाम: तीन राज्यों में हार के बाद बीजेपी का अखिलेश यादव ने उड़ाया मजाक, कहा


खास बातें

  1. अखिलेश यादव ने कहा- जनता सब जानती है
  2. लोकतंत्र में किसी का घमंड नहीं चलता- अखिलेश यादव
  3. बीजेपी को आगे भी मिलेगी हार

नई दिल्ली: भारतीय जनता पार्टी (BJP) की पांच राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव (Assembly Elections Results) में प्रदर्शन पर समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) ने पार्टी के शीर्ष नेतृत्व पर हमला बोला है. उन्होंने खासतौर पर मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में बीजेपी की हार पर तंज किया है. अखिलेश यादव ने पीएम मोदी (PM Modi) पर निशाना साधते हुए कहा कि इन विधानसभा चुनाव परिणाम को देखते हुए ‘अबकी बार मोदी सरकार’ का नारा देने वाली पार्टी का अब नारा ही बदल गया है. बीजेपी (BJP) का जिस तरह का प्रदर्शन (Assembly Elections Results) निकल कर आया है उसके बाद तो अब बीजेपी के लिए ‘अबकी बार खो दी सरकार’ का नारा ही बचता है. उन्होंने इसे लेकर कई ट्वीट भी किए. यादव ने अपने एक ट्वीट में लिखा कि एक और एक मिलकर ग्यारह बन जाते हैं, और यह स्थिति किसी को भी धूल चटा सकती है. बता दें कि 2017 में यूपी में हुए विधानसभा चुनाव (Assembly Elections Results) में बीजेपी (BJP)  ने समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी को हराते हुए राज्य में कुल 325 सीटें जीती थीं. यह हार इतनी बड़ी थी कि बाद में इन दोनों पार्टियों को बीजेपी के खिलाफ एक साथ आना पड़ा.

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गौरतलब है कि विधानसभा चुनाव में कांग्रेस ने इस बार मध्यप्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में जीत दर्ज की है. इन तीनों राज्यों में पहले बीजेपी की सरकार थी. कांग्रेस इन तीनों राज्यों में अब सरकार बनाने की स्थिति में है.इसी बाबत कांग्रेस पार्टी ने मध्यप्रदेश (MP Assembly Election Results) में सरकार बनाने को लेकर राज्यपाल आनंदीबेन पटेल को पत्र लिखकर मिलने का समय भी मांगा है. कांग्रेस सूत्रों ने बताया कि प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कमलनाथ (Kamal Nath) ने राज्यपाल को लिखे पत्र में उनसे मिलने का वक्त मांगा है और प्रदेश के विधानसभा चुनावों (MP Assembly Election Results) में कांग्रेस के सबसे बड़ी पार्टी के तौर पर उभरकर आने की संभावना और विजयी हुए निर्दलीय के समर्थन की बात करते हुए प्रदेश में सरकार बनाने का दावा भी पेश किया है. कमलनाथ (Kamal Nath) ने पत्र में लिखा है कि कांग्रेस पार्टी विधानसभा चुनाव में सबसे बड़ी पार्टी के तौर पर उभरकर आ रही है.

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इसके अलावा कांग्रेस को सभी निर्दलियों का भी समर्थन हासिल है. मध्यप्रदेश कांग्रेस ने देर रात चुनाव परिणाम को लेकर एक प्रेस कांफ्रेंस की. कमलनाथ ने प्रेस कांफ्रेंस में कहा कि हम एमपी में पूर्ण बहुमत के साथ अपनी सरकार बनाने जा रहे हैं. हमारी जीत के साथ ही एमपी की विकास यात्रा का नया इतिहास शुरू होने वाला है.उन्होंने कहा कि हमनें राज्यपाल जी को पत्र लिखा है ताकि हम उनके सामने अपना बहुमत साबित कर पाएं. इस दौरान उनके साथ पार्टी के अन्य वरिष्ठ नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया, दिग्विजय सिंह भी मौजूद थे. चुनाव आयोग (Election Commission) के मुताबिक प्रदेश में 230 विधानसभा सीटों में से अब तक घोषित परिणामों के अनुसार 107 सीटों पर भाजपा, 112 सीटों पर कांग्रेस जबकि चार सीटों पर निर्दलीय उम्मीदवार विजयी घोषित हुए है.



इसके अलावा रुझान के मुताबिक भाजपा 1, कांग्रेस 3 और बसपा 1 सीट पर आगे चल रहे हैं. राजस्थान में 199 सीटों के परिणाम घोषित हो चुके हैं. बीजेपी को यहां 73 सीटें मिली हैं वहीं, कांग्रेस 99 सीटें जीतने में कामयाब रही है. राज्य में बसपा को 6 सीटें मिली हैं. वहीं, 13 सीटों पर निर्दलीय उम्मीदवारों ने जीत दर्ज की है. वहीं, 90 सीटों वाली छत्तीसगढ़ विधानसभा में 87 के नतीजे आ चुके हैं. 65 सीटों पर कांग्रेस ने जीत दर्ज की है और 3 पर आगे चल रही है. वहीं, बीजेपी के खाते में महज 15 सीटें आई हैं.



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ZEE जानकारी: क्या कहते हैं मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ के चुनाव नतीजे?


अब सबसे पहले मध्य प्रदेश की बात कर लेते हैं. क्योंकि मध्य प्रदेश में समीकरण लगातार बदल रहे हैँ. 

मध्य प्रदेश में विधानसभा की 230 सीटें हैं. और बहुमत के लिए 116 सीटें चाहिएं. लेकिन बहुमत के इस आंकड़े को कोई भी पार्टी हासिल नहीं कर पाई है. 
कभी कांग्रेस नज़दीक आती है तो कभी बीजेपी. 

ताज़ा स्थिति ये है कि मध्य प्रदेश में बीजेपी 109 सीटों पर और कांग्रेस 114 सीटों पर आगे है. 

जबकि BSP के खाते में 2 सीटें दिख रही हैं. और अन्य को 5 सीटें मिलती दिख रही हैं.

आपको बता दें कि ये Final Figure नहीं है. मध्य प्रदेश में अभी भी वोटों की गिनती चल रही है. 

मध्य प्रदेश में 12 सीटें ऐसी हैं जहां पर कांग्रेस और बीजेपी के बीच वोटों का अंतर सिर्फ 1000 वोटों के आसपास है . यही वजह है कि कभी बीजेपी आगे निकल रही है तो कभी कांग्रेस . मध्य प्रदेश में अभी 2 से 3 राउंड के बीच वोटों की गिनती बाकी है . रात साढ़े 10 बजे तक मध्य प्रदेश के परिणाम सामने आ सकते हैं . बड़ी बात ये भी है कि मध्य प्रदेश में अब तक बीजेपी के 12 मंत्री चुनाव हार चुके हैं . 

यहां बीजेपी और कांग्रेस को समान वोट मिले हैं. दोनों को करीब 41% वोट मिले हैं. यहां पिछली बार के मुकाबले बीजेपी का वोट 4% कम हुआ है, जबकि कांग्रेस के Vote Share में 5% की बढ़ोतरी हुई है. 

मध्य प्रदेश में बीजेपी के खराब प्रदर्शन की सबसे बड़ी वजह है… सत्ता विरोधी लहर . मध्य प्रदेश में पिछले 15 वर्षों से बीजेपी की सरकार थी . कांग्रेस पार्टी… बीजेपी के खिलाफ इस नाराज़गी का फायदा उठाने में कामयाब रही . 

मध्य प्रदेश में कांग्रेस पार्टी ने सबसे पहले किसानों के मुद्दे को उठाया . जून 2017 में मंदसौर में किसानों पर लाठीचार्ज हुआ और गोलियां चलीं… जिसमें 6 किसान मारे गए . इस घटना के बाद से मध्य प्रदेश में शिवराज सिंह चौहान के खिलाफ माहौल बनना शुरू हुआ . पिछले एक वर्ष से मध्य प्रदेश में किसानों का आंदोलन बहुत तेज़ हो गया था. किसानों को उनकी फसलों का उचित मूल्य नहीं मिल रहा था . 

मध्य प्रदेश में 70 प्रतिशत लोग खेती करते हैं . वर्ष 2009 से 2014 के बीच मध्य प्रदेश में कृषि विकास दर 12 प्रतिशत थी . लेकिन वर्ष 2014 से वर्ष 2017 के बीच मध्यप्रदेश की कृषि विकास दर घटकर 9 प्रतिशत हो गई . कांग्रेस ने चुनाव में किसानों की इन समस्याओं को ज़ोर-शोर से उठाया और किसानों का कर्ज़ माफ करने का वादा भी किया . जिसके बाद किसान… कांग्रेस के ज़्यादा करीब हो गए . 

आपको याद होगा कुछ दिन पहले देश भर के किसान दिल्ली में आए थे. उनमें मध्य प्रदेश के किसान भी थे. लेकिन लगता है बीजेपी ने इन सारी तस्वीरों को हल्के में ले लिया और अंत में इसका नुकसान हुआ

भ्रष्टाचार के आरोपों की वजह से भी मध्य प्रदेश में बीजेपी को नुकसान हुआ . कांग्रेस के नेताओं ने अपनी चुनावी रैलियों में व्यापम के मामले में whistle-blowers और गवाहों की मौत के मुद्दे को उठाया . व्यापम घोटाले की वजह से शिवराज सिंह चौहान की छवि को काफी नुकसान हुआ . 

लेकिन बीजेपी को सबसे बड़ा झटका दिया… सवर्णों ने . केंद्र सरकार ने SC/ST Act में सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले को पलट दिया… जिसमें आरोपी की तुरंत गिरफ्तारी पर रोक लगाई गई थी . केंद्र सरकार के इस फैसले का सबसे बड़ा विरोध मध्य प्रदेश में हुआ . वर्ष 2014 में लोकसभा के चुनाव में मध्य प्रदेश में 48 प्रतिशत सवर्णों ने बीजेपी को Vote दिया था . लेकिन इस बार बीजेपी से नाराज़ सवर्णों ने मध्य प्रदेश में अपनी एक अलग राजनीतिक पार्टी बनाई और चुनाव भी लड़ा . 

इसके अलावा Social Media पर भी सवर्णों के संगठनों ने चुनाव में NOTA का Button दबाने का अभियान चलाया . NOTA का मतलब है… None of the above यानी… किसी भी पार्टी को Vote ना देना . मध्य प्रदेश में 1.5 प्रतिशत लोगों ने NOTA का Button दबाया . मध्य प्रदेश के 5 लाख से ज़्यादा लोगों ने किसी भी पार्टी को वोट नहीं दिया .

मध्य प्रदेश में साधु-संतों की नाराज़गी भी शिवराज सिंह चौहान पर भारी पड़ी . मध्य प्रदेश की सरकार ने कई संतों को मंत्री का पद भी दिया . लेकिन इसके बाद भी नाराज़गी कम नहीं हुई. 

अब मध्य प्रदेश के बाद राजस्थान की बात करते हैं। 

राजस्थान में विधासभा की 200 सीटें हैं, लेकिन चुनाव 199 सीटों पर हुआ था। 
आज आए नतीजों में कांग्रेस को 99 सीटें मिली हैं। 
जबकि बीजेपी को 73 सीटें मिली हैं, जबकि अन्य के खाते में 27 सीटें आई हैं।

राजस्थान में बीजेपी को करीब 39% और कांग्रेस को 39.2% वोट मिले हैं। बीजेपी को यहां करीब 7% वोट शेयर का नुकसान हुआ है, तो कांग्रेस को 6% वोट शेयर का फायदा हुआ है। 

राजस्थान में बीजेपी की हार की सबसे बड़ी वजह थी… कार्यकर्ताओं की उपेक्षा । मुख्यमंत्री के रूप में वसुंधरा राजे सिंधिया ने एक महारानी की तरह व्यवहार किया । मुख्यमंत्री का पद संभालने के बाद 4 वर्षों तक वसुंधरा राजे सिंधिया और बीजेपी के कार्यकर्ताओं का संवाद एकदम ना के बराबर था । राजस्थान में बीजेपी के टिकट पर लड़ रहे 14 मंत्री चुनाव हार गए । इससे भी साफ पता चलता है कि राजस्थान में बीजेपी के बड़े नेताओं का संवाद, जनता के साथ एकदम टूट गया था । राजस्थान की जनता की नाराज़गी पार्टी को लेकर नहीं बल्कि चेहरे को लेकर थी । राजस्थान में वसुंधरा के खिलाफ ये नारा खूब चर्चा में रहा कि PM से बैर नहीं… वसुंधरा की खैर नहीं । यानी… वसुंधरा राजे सिंधिया ने राजस्थान में बीजेपी के लिए जीत का रास्ता बंद कर दिया । 

वसुंधरा के खिलाफ गुस्सा इतना ज़्यादा था कि राजस्थान में बीजेपी के लिए 50 सीटें जीतना भी मुश्किल था। लेकिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रैलियों और बीजेपी के अध्यक्ष अमित शाह के चुनावी प्रबंधन की वजह से राजस्थान में बीजेपी की स्थिति बेहतर हुई और वो सम्मानजनक सीटें प्राप्त कर पाई। 

राजस्थान के चुनाव में कांग्रेस के नेतृत्व ने समझदारी से काम लिया । कांग्रेस पार्टी ने राजस्थान में किसी भी नेता को मुख्यमंत्री के उम्मीदवार के तौर पर पेश नहीं किया । अशोक गहलोत और सचिन पायलट का राजस्थान में अच्छा जनाधार है । लेकिन कांग्रेस पार्टी ने इन दोनों का नाम मुख्यमंत्री के उम्मीदवार के तौर पर आधिकारिक रूप से पेश नहीं किया । दोनों ही नेताओं के समर्थकों को लगा कि दोनों में से कोई भी नेता मुख्यमंत्री बन सकता है इसलिए सभी कार्यकर्ताओं ने कांग्रेस पार्टी के लिए एकजुट होकर प्रचार किया । 

फिर भी अशोक गहलोत और सचिन पायलट के बीच के संघर्ष का असर टिकट बंटवारे पर पड़ा । दोनों के आपसी संघर्ष की वजह से कांग्रेस के बहुत से नेताओं के टिकट कट गए । कांग्रेस के इन्हीं बागी नेताओं ने निर्दलीय के रूप में चुनाव लड़ा। इनमें से बहुत सारे निर्दलीय चुनाव जीत गए । अगर ऐसा नहीं होता तो कांग्रेस पार्टी, राजस्थान में 130 से भी ज़्यादा सीटें जीत सकती थीं । 

अशोक गहलोत इस वक्त कांग्रेस पार्टी में मुख्यमंत्री की दौड़ में सबसे आगे नज़र आ रहे हैं । राजस्थान की आने वाली सरकार में अशोक गहलोत और सचिन पायलट की भूमिका महत्वपूर्ण होगी । लेकिन मुख्यमंत्री कौन बनेगा ? इसका फैसला कल राजस्थान में कांग्रेस पार्टी के विधायक दल की बैठक के बाद हो सकता है। 

इस बीच सचिन पायलट और अशोक गहलोत के बीच महात्वाकांक्षा की दरारें नज़र आ रही हैं । आज जयपुर में कांग्रेस पार्टी के ये दोनों बड़े नेता प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान एक साथ नज़र आए । लेकिन दोनों के बीच की दूरियां साफ नज़र आ रही थीं । ये दोनों नेता अलग अलग बैठे हुए नज़र आ रहे थे ।

दिलचस्प तस्वीरें उस वक्त सामने आईं जब कांग्रेस पार्टी के नेताओं ने ही सचिन पायलट और अशोक गहलोत को एक साथ लाकर उनके हाथ मिलवाने की कोशिश की । उस वक्त इन दोनों ही नेताओं ने हाथ तो मिलाया लेकिन महात्वाकांक्षा की दरारें साफ़ दिख रही थीं। 

अब छत्तीसगढ़ की बात करते हैं। यहां बीजेपी की बुरी तरह से हार हुई है। 

वहां बीजेपी को सिर्फ 16 सीटें मिली हैं। जबकि कांग्रेस को 68 सीटें मिली हैं। 

अजीत जोगी और मायावती के गठबंधन को 6 सीटें मिली हैं। 

छत्तीसगढ़ में कांग्रेस को 43% से ज्यादा वोट मिले हैं, जबकि बीजेपी को 32% वोट मिले हैं। 2013 के मुकाबले कांग्रेस के वोट 3% बढ़े हैं और बीजेपी के वोट करीब 8% कम हुए हैं। 
छत्तीसगढ़ में रमन सिंह 2003 से बीजेपी की सरकार चला रहे थे। यानी वो पिछले 15 साल से छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री थे। 
लेकिन इस बार उन्हें सत्ता विरोधी लहर का सामना करना पड़ा । हालांकि उन्हें शायद इस बात की उम्मीद नहीं होगी कि वो इतनी बुरी तरह से हार जाएंगे। 
रमन सिंह की हार में सबसे बड़ी वजह है 15 वर्षों की Anti Incumbency यानी सत्ता विरोधी लहर। 

रमन सिंह को किसानों का गुस्सा भी झेलना पड़ा। छत्तीसगढ़ में किसान लगातार फसलों के दाम को लेकर बीजेपी के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे थे। और इसका नुकसान बीजेपी को चुनावों में उठाना पड़ा। 

रमन सिंह के खिलाफ किसानों की इस नाराज़गी का फायदा कांग्रेस ने उठाया। कांग्रेस ने अपने घोषणापत्र में किसानों की कर्ज़माफी का वादा किया, और ये दांव काम कर गया।

आज रमन सिंह ने पूरी शालीनता के साथ अपनी हार स्वीकार कर ली है।

अब NOTA की बात कर लेते हैं। मध्य प्रदेश में NOTA ने बहुत से नेताओं के समीकरण बिगाड़े हैं। 

यहां करीब 5 लाख 22 हज़ार से ज्यादा लोगों ने NOTA को वोट दिया। 

ये कुल वोटिंग प्रतिशत का 1.5% है। 

जबकि छत्तीसगढ़ में भी करीब 2% वोट NOTA को पड़े हैं। 

राजस्थान में भी करीब 4 लाख 66 हज़ार से ज्यादा लोगों ने NOTA को वोट दिया। 

यानी कुल मिलाकर जीत का फर्क नोटा से तय हो रहा है। ये साफ तौर पर सत्ता विरोधी लहर है। 





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Assembly Election Results 2018: Sonia Gandhi says Rahul had worked hard For Victory – चुनावी नतीजों में जीत के संकेत पर बोलीं सोनिया गांधी


नई दिल्ली: विधानसभा चुनाव 2018 के रुझानों के मुताबिक, छत्तीसगढ़ में बीजेपी का सुपड़ा साफ करने, राजस्थान में बहुमत का आंकड़ा पार करने और मध्य प्रदेश में कांटे की टक्कर देने के साथ ही कांग्रेस तीन राज्यों में सरकार बनाती दिख रही है. हालांकि, मध्य प्रदेश में अभी तस्वीर साफ नहीं है, बावजूद इसके कांग्रेस के नेता उत्साहित हैं कि वे वहां भी शिवराज सिंह सरकार से सत्ता छीनने में कामयाब हो जाएंगे. नतीजों की तस्वीर स्पष्ट होने से पहले राहुल गांधी, मां सोनिया गांधी से मिलने दस जनपथ गए हैं. छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की जीत हुई है, राजस्थान में बहुमत के करीब है और मध्य प्रदेश में अभी आर-पार की लड़ाई जारी है. 

राजस्थान विधानसभा चुनाव परिणाम : क्या ‘भितरघात’ ने कांग्रेस को बहुमत से पीछे कर दिया?


नतीजों से पहले जब सोनिया गांधी ने जीत का संदेश तो दिया, मगर कहा कि अभी फाइनल रिजल्ट का इंतजार करना चाहिए. एनडीटीवी ने जब पूछा कि क्या इन राज्यों के चुनाव परिणामों को प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी पर जनमत संग्रह कहा जा सकता है, तो इस पर राहुल गांधी ने कहा, “हम अंतिम परिणामों की प्रतीक्षा करेंगे. हालांकि, अभी वह टिप्पणी करने से इनकार कर रहे हैं. 

Election Results: राहुल गांधी आज ही बने थे पार्टी प्रेसीडेंट, सचिन पायलट ने दिया ये तोहफा

वहीं, सोनिया गांधी ने अपने बेटे राहुल गांधी की ओर इशारा किया और कहा कि ‘उसने काफी मेहनत की है और पार्टी को लीड किया है.’ दरअसल, अभी तक जो चुनावों के रुझान सामने आए हैं, उसमें सिर्फ छत्तीसगढ़ की तस्वीर साफ हो पाई है. राजस्थान में कांग्रेस कभी बहुमत पा ले रही है तो कभी पीछे हो जा रही है. वहीं, मध्य प्रदेश में बीजेपी और कांग्रेस में आगे-पीछे की होड़ लगी है. वहीं जीत की उम्मीद लगाए बैठी कांग्रेस को तेलंगाना और मिजोरम में बड़ा झटका लगा है. 

Rajasthan Elections Results 2018 Live: रुझानों में बहुमत से 6 सीट कम है कांग्रेस, बीजेपी नेता हुए मायूस

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तेलंगाना में कांग्रेस को 24 सीटों पर संतेष करना पड़ा है. वहीं केसीआर के नेतृत्व वाली टीआरएस को 84 सीट मिले हैं. वहीं मिजोरम में कांग्रेस 6 सीटों पर है. हालांकि, यह नतीजे ऊपर-नीचे हो सकते हैं. क्योंकि ये सारे आंकड़े रूझानों पर हैं और जब तक पूरा परिणाम नहीं आ जाता, तब तक तस्वीर पूरी तरह से स्पष्ट नहीं हो पाएगी. 

VIDEO: अबकी बार किसकी सरकार: पांच राज्यों का खास विश्लेषण



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मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव परिणाम LIVE अपडेट, भोपाल में खोले गए स्ट्रॉंग रूम, थोड़ी देर में शुरू होगी मतगणना


नई दिल्लीः मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव (Madhya Pradesh elections 2018) के नतीजे और रुझान सुबह 8 बजे से आना शुरू हो जाएंगे. राज्य की 230 सीटों पर 28 नवंबर को विधानसभा के लिए चुनाव हुए थे. यह मतगणना 51 जिलों में होगी और लगभग 1200 सीसीटीवी की निगरानी में होगी. हर राउंड के परिणाम अलग-अलग घोषित किये जाएंगे. अगले राउंड की गिनती तभी शुरू होगी, जब उससे पहले राउंड के परिणाम घोषित किये जा चुके हों. मतदान के बाद आए एग्जिट पोल ने 15 साल से प्रदेश में सत्तारूढ़ भाजपा एवं मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस के बीच कड़ी टक्कर की संभावना व्यक्त की है.  

LIVE: अपडेट

– थोड़ी देर में शुरू होगी मतगणना

– भोपाल में खोले गए स्ट्रॉंग रूम

– मतगणना के लिए 15 हजार अधिकारी और कर्मचारी तैनात किए गए

– सबसे पहले पोस्टल बैलेट की गिनती की जाएगी.

– 230 विधानसभा की काउंटिंग 306 मतगणना हॉल में होगी

– मध्य प्रदेश में 2899 प्रत्याशी चुनाव मैदान में है.

– मध्य प्रदेश में करीब साढ़े 8 बजे आएगा पहला रुझान

भाजपा ने सभी 230 सीटों पर अपने उम्मीदवार उतारे हैं, जबकि कांग्रेस ने 229 सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारे हैं और एक सीट अपने सहयोगी शरद यादव के लोकतांत्रिक जनता दल के लिये छोड़ी है. आम आदमी पार्टी (आप) 208 सीटों पर चुनाव लड़ रही है, बहुजन समाज पार्टी (बसपा) 227, शिवसेना 81 और समाजवादी पार्टी (सपा) 52 सीटों पर चुनावी मैदान में है. 

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मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान अपनी परंपरागत सीट बुधनी से चुनावी मैदान में है और उनके खिलाफ कांग्रेस ने पूर्व केन्द्रीय मंत्री एवं मध्यप्रदेश कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष अरूण यादव को मैदान में उतारा है. चौहान इस सीट से चार बार जीत चुके हैं और हर बार उन्होंने इस सीट पर अपनी जीत का अंतर बढ़ाया है. 





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BJP MPs scared before election results, says Shivraj’s loss may be due to ‘Mai ke Lal’ statement । चुनाव परिणाम से पहले घबराए BJP सांसद, बोले- शिवराज के ‘माई के लाल’ बयान से हो सकता है नुकसान


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Patna University Election: Stone pelting on Prashant kishor car in campus by ABVP – पटना यूनिवर्सिटी चुनाव: प्रशांत किशोर की गाड़ी पर पथराव, ABVP से कहा


पटना: पटना यूनिवर्सिटी में छात्रसंघ चुनाव (Patna University Election) के बीच  जदयू के राष्ट्रीय उपाध्यक्षप्रशांत किशोर की गाड़ी पर पथराव करने का मामला सामने आया है. सोमवार को पटना यूनिवर्सिटी के कैंपस में ही प्रशांत किशोर की गाड़ी पर पथराव किया गया. बताया जा रहा है कि वे कुलपति के दफ्तर से बाहर निकले थे तभी एबीवीपी कार्यकर्ताओं ने उनकी गाड़ी पर पथराव कर दिया. एबीवीपी का आरोप है कि प्रशांत किशोर छात्रसंघ चुनाव को प्रभावित करने की कोशिश कर रहे हैं.

इस घटना के बाद प्रशांत किशोर ने ट्वीट करके एबीवीपी पर निशाना साधा है. उन्होंने ट्वीट किया है, ‘एबीवीपी गुंडे और असामाजिक तत्वों से कुछ अच्छा करने की जरूरत है, जो कि आजकल बिहार में आपका चेहरा बन गए हैं. पटना यूनिवर्सिटी के छात्रसंघ चुनाव में संभावित हार की घबराहट मेरी गाड़ी पर पत्थर मारने से कम नहीं होगी.’ इसके साथ ही उन्होंने ट्वीट में लिखा है, ‘मेरे जख्मी होने की खबर सही नहीं है. मैं ठीक हूं, मेरी चिंता करने के लिए शुक्रिया.’

पटना यूनिवर्सिटी छात्रसंघ चुनाव बना BJP-JDU में तकरार की वजह, निशाने पर नीतीश कुमार के ‘संकट मोचक’


जहां एक ओर यूनिवर्सिटी कैंपस में प्रशांत किशोर को लेकर ड्रामा चल रहा था, वहीं भाजपा विधायकों का एक प्रतिनिधिमंडल राज्यपाल लालजी टंडन से मुलाकात कर चुनाव में धांधली की शिकायत कर रहा था. राज्यपाल ने शिकायत पर संज्ञान लेते हुए कुलपति को तलब भी किया है. 

वहीं, छात्र संघ चुनाव को लेकर आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने ट्वीट करके नीतीश कुमार पर निशाना साधा है. उन्होंने लिखा है, ‘नीतीश जी, छात्र संघ चुनाव में आप इतने निम्नस्तर तक जाकर हस्तक्षेप कर रहे है कि आपके सहयोगी दल भाजपा के 8 विधायक, मंत्री दो दिन से आपके और सरकार के खिलाफ प्रेस रिलीज जारी कर थू-थू कर रहे है. आपने अपने मित्र और महंगे निजी नौकरों तक को वीसी के पास भेजकर छात्र चुनाव में घिन्न मचा दिया है.’


एक अन्य ट्वीट में तेजस्वी ने लिखा है, ‘नीतीश कुमार जी, क्या सीएम आवास से अब छात्र संघ चुनाव में भी पैसा और शराब माफियाओं को पद बांटने का खेल खेला जाने लगा है? अधिकारियों को विरोधी छात्र संगठनों और छात्रों को हराने व गिरफ्तार करने का आदेश दिया जा रहा है. आपके आवास से ऐसी गुंडागर्दी गलत संसदीय परंपरा है.

आरक्षण खत्म करने की किसी में ताकत नहीं, हम हर कुर्बानी देने को तैयार: मुख्यमंत्री नीतीश कुमार

बता दें, छात्रसंघ चुनाव को लेकर भाजपा और बिहार में उसके सहयोगी दल नीतीश कुमार के जनता दल यूनाइटेड में तकरार भी देखने को मिली. जहां जदयू के उपाध्यक्ष प्रशांत किशोर भाजपा के निशाने पर आ गए हैं. हालांकि, भाजपा ने सीधे तौर पर उनका नाम नहीं लिया है, लेकिन एक प्रेस नोट जारी करके कहा है, पुलिस, प्रशासन और ‘कुछ इवेंट मैनेजमेंट प्रोफेशनल्स’ चुनाव प्रभावित करने की कोशिश कर रहे हैं. प्रेस नोट में जहां इवेंट प्रोफेशनल्स की बात की जा रही है, उसे जदयू नेताओं की तरफ ईशारे के रूप में देखा जा रहा है. 

BJP-JDU में सीट बंटवारे पर लालू यादव का तंज, बोले- ‘एगो बा पलटीमार, आ दूसरा बा कल्टीमार!’

गौरतलब है कि कुछ दिन पहले अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद की जदयू के छात्र विंग के कार्यकर्ताओं से झड़प हो गई थी. इसके बाद जदयू की तरफ से एफआईआर दर्ज करवाई गई. पुलिस ने एबीवीपी के स्थानीय दफ्तर पर छापेमारी की थी. इसके बाद भाजपा राज्य नेतृत्व ने इस कार्रवाई का जवाब देने के लिए विधान पार्षद डॉ. संजय पासवान और विधायक अरुण सिन्हा, नितिन नवीन एवं संजीव चौरसिया को उतारा, जिन्होंने संयुक्त प्रेस नोट जारी करके पुलिस और प्रशासन पर निशाना साधा.

राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनने के बाद पहली बार प्रशांत किशोर को मिली महत्वपूर्ण जिम्मेदारी, नीतीश कुमार ने सौंपा यह काम

जदयू में शामिल हुए चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर  





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छत्तीसगढ़ चुनावः हमेशा से ही राज्य की सियासत का बड़ा नाम रहे हैं अजीत जोगी


रायपुरः भारतीय राजनीति में अजीत जोगी का नाम बड़े नेताओं में शुमार होता है. कांग्रेस पार्टी से अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत करने वाले जोगी छत्तीसगढ़ के पहले मुख्यमंत्री रहे हैं. 29 अप्रैल 1946 को बिलासपुर के पेंड्रा में जन्में अजीत प्रमोद कुमार जोगी के दादाजी हिंदू धर्म के सतनामी समाज से ताल्लुक रखते थे. बाद में उन्होंने ईसाई धर्म अपना लिया था. अजीत जोगी ने भोपाल के मौलाना आजाद कॉलेज ऑफ टेक्नोलॉजी से मकैनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की और साल 1968 में यहां से गोल्ड मेडलिस्ट रहे. अपनी शिक्षा पूरी करने के बाद अजीत जोगी ने रायपुर के गवर्नमेंट इंजीनियरिंग कॉलेज में लेक्चरर के रूप में सेवाएं दीं.

इसी दौरान उनका चयन भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) के लिए हो गया, बाद में वह भारतीय प्रशासनिक सेवा यानि आईएएस के लिए भी चुन लिए गए. भारतीय प्रशासनिक सेवा के दौरान साल 1981 से 1985 तक अजीत जोगी इंदौर के डिस्ट्रिक्ट कलेक्टर रहे. 

जानकार बताते हैं कि इसी दौरान अजीत जोगी कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और मध्य प्रदेश के पूर्व सीएम अर्जुन सिंह के संपर्क में आए. जोगी की गिनती अर्जुन सिंह के चहेते अधिकारियों में होती थी. लेकिन जोगी के राजनीतिक जीवन की शुरुआज पूर्व पीएम राजीव गांधी के संपर्क में आने के बाद हुई.

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1986 से 87 के बीच अजीत जोगी को अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी में अनुसूचित जाति/जनजाति कल्याण समिति की जिम्मेदारी दी गई. 1986 से लेकर 98 तक अजीत जोगी दो बार के राज्यसभा सदस्य रहे.1998 में जोगी पहली बार रायगढ़ लोकसभा क्षेत्र से लिए चुने गए. इसी दौरान उन्हें कांग्रेस पार्टी ने राष्ट्रीय प्रवक्ता की जिम्मेदारी भी सौंपी.

नए राज्य के साथ मिली नई जिम्मेदारी
साल 2000 में छत्तीसगढ़ को अलग राज्य घोषित किया गया और अजीत जोगी राज्य के पहले मुख्यमंत्री बने. ये जिम्मेदारी जोगी ने साल 2003 तक संभाली. 2003 में राज्य में हुए विधानसभा चुनाव में कांग्रेस पार्टी हार गई और राज्य में पहली बार रमन सिंह के नेतृत्व में बीजेपी की सरकार बनी. इन चुनावों में जोगी खुद मरवाही सीट से मैदान में थे और उन्होंने बीजेपी के नंद कुमार साई को 54 हजार से ज्यादा वोटों से हराया था. इन चुनावों में कांग्रेस ने 37 सीटें जीती थी. 

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लोकसभा चुनाव में जीत के बाद भी केंद्र में नहीं मिला मौका 
इसके बाद साल 2004 में हुए लोकसभा चुनाव में अजीत जोगी ने कांग्रेस की तरफ से छत्तीसगढ़ की महासमुंद सीट से चुनाव लड़ा. इस दौरान उनका मुकाबला कांग्रेस से बीजेपी में शामिल हुए वरिष्ठ नेता विद्याचरण शुक्ल से था. जोगी ने विद्याचरण शुक्ल जैसे दिग्गज नेता को हराकर छत्तीसगढ़ की राजनीति में अपना कद सबसे ऊपर कर लिया. इन चुनावों में केंद्र में कांग्रेस गठबंधन की सरकार बनी लेकिन अजीत जोगी को सरकार में कोई बड़ी जिम्मेदारी नहीं दी गई. जोगी अभी भी छत्तीसगढ़ की राजनीति में ही खुद को आजमाना चाहते थे. इसलिए उन्होंने सांसद का अपना कार्यकाल पूरा ना करके वापस विधानसभा चुनाव लड़ने का मन बनाया. 

नहीं छूटा राज्य की राजनीति का मोह 
साल 2008 में छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव में जोगी एक बार फिर मरवाही से मैदान में उतरे. इस बार भी राज्य में कांग्रेस की हार हुई लेकिन अजीत जोगी ने बंपर वोटों से चुनाव जीता. अजीत जोगी ने बीजेपी के ध्यान सिंह पोर्ते को 42 से ज्यादा हराया था. इसके बाद साल 2009 में हुए लोकसभा चुनाव में जोगी मैदान में नहीं उतरे. छत्तीसगढ़ बनने के बाद ऐसा पहली बार हुआ जब अजीत जोगी ने विधानसभा का अपना कार्यकाल पूरा किया. 2013 में हुए छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव में अजीत जोगी मरवाही विधानसभा सीट से अपने बेटे अमित जोगी को मैदान में उतारा. अमित जोगी ने बीजेपी समीरा पैकरा को 46 से ज्यादा वोटों से हराया था. इसके बाद साल 2014 में हुए लोकसभा चुनाव में अजीत जोगी ने महासमुंद लोकसभा सीट से एक बार फिर ताल ठोकी. लेकिन इस बार जोगी मोदी हवा में बीजेपी के चंदूलाल साहू से 1217 वोटों से हार गए. 

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बेटा, पत्नी और बहू मैदान में
इस बार के विधानसभा चुनाव में राज्य के पहले मुख्यमंत्री जोगी पहली बार कांग्रेस पार्टी से अलग चुनाव लड़ रहे हैं. इस बार अजीत जोगी अपनी अलग पार्टी जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (JCC-J) के साथ मैदान में हैं.  राज्य की 90 सीटों में जोगी की पार्टी 55 सीटों पर चुनाव लड़ रही है बाकि 35 सीटों पर जेसीसीजे ने बीएसपी को समर्थन किया है.

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इस बार अजीत जोगी के बेटे अमित जोगी के अलावा उनकी बहू ऋचा जोगी भी चुनाव मैदान में है. ऋचा जोगी अकलतरा सीट से चुनाव मैदान में है. वहीं कोटा विधानसभा सीट से जेसीसी के टिकट पर अजीत जोगी की पत्नी रेणु जोगी भी चुनाव मैदान में है.  





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